नई दिल्ली,6 नवंबर (युआईटीवी)- भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। देश की रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने गुरुवार को स्वदेशी सतह से सतह पर मार करने वाली प्रलय मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया। यह परीक्षण ओडिशा के तट के पास किया गया,जिसमें मिसाइल ने निर्धारित सभी उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए इसे भारत की आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक और स्वदेशी सैन्य क्षमता को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि डीआरडीओ ने गुरुवार सुबह 11 बजकर 10 मिनट पर प्रलय मिसाइल का सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण यानी यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल के तहत आयोजित किया गया था। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने निर्धारित मानकों के अनुसार प्रदर्शन किया और सभी तय उद्देश्यों को पूरा किया। विभिन्न रेंज उपकरणों के माध्यम से एकत्र किए गए आँकड़ों ने भी परीक्षण की सफलता की पुष्टि की है।
राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर डीआरडीओ की टीम और परीक्षण से जुड़े सभी वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वदेशी प्रलय मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण भारत की रक्षा क्षमताओं को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस सफलता से देश की स्वदेशी मिसाइल विकास क्षमता को भी मजबूती मिलेगी। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए भारत लगातार आधुनिक तकनीक और स्वदेशी सैन्य उपकरणों के विकास पर जोर दे रहा है।
प्रलय मिसाइल का सफल परीक्षण ऐसे समय में हुआ है,जब भारत अपनी सैन्य तैयारियों और आधुनिक रक्षा प्रणालियों को लगातार मजबूत कर रहा है। सतह से सतह पर मार करने वाली यह मिसाइल देश की सामरिक क्षमताओं के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके परीक्षण के दौरान निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्ति से इसके प्रदर्शन का मूल्यांकन करने में मदद मिली है। उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण का उद्देश्य संबंधित सैन्य जरूरतों और परिचालन मानकों के आधार पर प्रणाली की क्षमता को परखना होता है।
प्रलय मिसाइल के परीक्षण से पहले पिछले महीने डीआरडीओ ने स्वदेशी हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम का भी सफल उड़ान परीक्षण किया था। इस परीक्षण में प्लेटफॉर्म ने समुद्र तल से लगभग 21 किलोमीटर की ऊँचाई हासिल की थी। इसके साथ ही उसने समताप मंडल में लंबे समय तक उड़ान भरने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया था। रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की तकनीक भविष्य में निगरानी,संचार और विभिन्न सैन्य अभियानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक,प्रायोगिक उड़ान के दौरान इस प्लेटफॉर्म ने औसतन 21 किलोमीटर की ऊँचाई हासिल की। इसके बाद इसे लगभग 20 किलोमीटर की ऊँचाई पर 30 मिनट से अधिक समय तक संचालित किया गया। निर्धारित समय तक उड़ान भरने के बाद इसे जमीन पर वापस उतरने का निर्देश दिया गया। पूरी प्रक्रिया के बाद सिस्टम को सुरक्षित रूप से बरामद कर लिया गया। उड़ान के दौरान एकत्र किए गए तकनीकी आंकड़ों का भी विश्लेषण किया गया।
इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह प्रदर्शित करना था कि स्वदेशी प्लेटफॉर्म समताप मंडल में लंबे समय तक काम करने में सक्षम है। पृथ्वी की सतह से काफी ऊँचाई पर स्थित यह क्षेत्र निगरानी और संचार से संबंधित अभियानों के लिए उपयोगी माना जाता है। सामान्य विमान और उपग्रहों के बीच आने वाला यह क्षेत्र विशेष प्रकार के एयरबोर्न प्लेटफॉर्म के संचालन के लिए महत्वपूर्ण संभावनाएँ प्रदान करता है।
हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म की उड़ान के दौरान तकनीकी निगरानी के लिए कई आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। प्लेटफॉर्म से ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन तक वास्तविक समय में वीडियो और विमान के प्रदर्शन से संबंधित आँकड़े लगातार भेजे गए। इससे जमीन पर मौजूद विशेषज्ञों को उड़ान की स्थिति और सिस्टम के कामकाज पर लगातार नजर रखने में मदद मिली।
इस स्वदेशी सिस्टम में इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट, जीपीएस रिसीवर, ऑनबोर्ड कैमरे और ऊँचाई नियंत्रित करने वाले उपकरणों सहित कई महत्वपूर्ण तकनीकी प्रणालियाँ लगाई गई थीं। इन उपकरणों की मदद से प्लेटफॉर्म की स्थिति, दिशा, ऊँचाई और उड़ान से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं की निगरानी की गई। अधिकारियों के अनुसार, मिशन के दौरान सभी सब-सिस्टम ने उम्मीद के मुताबिक काम किया और परीक्षण के निर्धारित उद्देश्यों को पूरा करने में सफल रहे।
इस हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म के उड़ान परीक्षण को सफल बनाने के लिए कई रक्षा और नागरिक एजेंसियों ने मिलकर काम किया। इसमें भारतीय वायुसेना, सैन्य वायुयोग्यता एवं प्रमाणन केंद्र, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण सहित अन्य संबंधित एजेंसियों का सहयोग रहा। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के जरिए परीक्षण की पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।
भारत में रक्षा तकनीक के स्वदेशी विकास को पिछले कुछ वर्षों में लगातार गति मिली है। मिसाइल प्रणालियों से लेकर निगरानी उपकरणों और आधुनिक हवाई प्लेटफॉर्म तक, देश अपनी जरूरतों के अनुरूप तकनीक विकसित करने पर ध्यान दे रहा है। प्रलय मिसाइल का सफल परीक्षण और हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म की उपलब्धि इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
इन दोनों परीक्षणों से भारत की रक्षा अनुसंधान क्षमता और स्वदेशी तकनीकी विकास को मजबूती मिली है। खासतौर पर प्रलय मिसाइल के सफल उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण से इसके प्रदर्शन को निर्धारित सैन्य मानकों पर परखने का अवसर मिला है। आने वाले समय में ऐसे स्वदेशी रक्षा उपकरण देश की सैन्य तैयारियों को मजबूत करने और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
