वीडियोकॉन के पूर्व प्रमोटर वेणुगोपाल धूत दिवालिया घोषित (तस्वीर क्रेडिट@DeshbandhuMp)

वीडियोकॉन के पूर्व प्रमोटर वेणुगोपाल धूत दिवालिया घोषित, एसबीआई के 12,668 करोड़ रुपये के कर्ज की वसूली का रास्ता खुला

नई दिल्ली,6 नवंबर (युआईटीवी)- वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर वेणुगोपाल नंदलाल धूत को बड़ा झटका लगा है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की मुंबई पीठ ने उन्हें दिवालिया घोषित कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया है। बैंक ने वीडियोकॉन समूह की कंपनियों को दिए गए कर्ज के बदले धूत की ओर से दी गई व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर 12,668 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि वसूलने की माँग की थी। इस फैसले के बाद धूत के खिलाफ व्यक्तिगत गारंटर के रूप में दिवालियापन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

ट्रिब्यूनल ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा 123 के तहत एसबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे मंजूरी दी। इसके साथ ही धूत की संपत्तियों के प्रबंधन और लेनदारों के बीच उनके वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। इस मामले में ट्रिब्यूनल ने दिवाला पेशेवर आशीष नारायण को बैंकरप्सी ट्रस्टी नियुक्त किया है। उन्हें धूत की संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेकर उनका प्रबंधन करने और नियमानुसार लेनदारों के दावों का निपटारा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

एसबीआई के मुताबिक, 30 सितंबर तक वेणुगोपाल धूत पर कुल 12,668.06 करोड़ रुपये की देनदारी बकाया थी। इसमें मूल कर्ज के साथ ब्याज और जुर्माने की रकम भी शामिल है। यह देनदारी वीडियोकॉन समूह की विभिन्न कंपनियों को दिए गए टर्म लोन, वर्किंग कैपिटल सुविधाओं और अन्य वित्तीय सहायता से जुड़ी हुई है। इन कर्जों के लिए धूत ने व्यक्तिगत गारंटी दी थी। वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस लिमिटेड भी उन कंपनियों में शामिल है,जिनके कर्ज के लिए ये गारंटियाँ दी गई थीं।

दरअसल, वीडियोकॉन समूह की कंपनियों ने बैंकों से लिए गए कर्ज का भुगतान नहीं किया था। इसके बाद एसबीआई ने फरवरी 2018 में धूत की ओर से दी गई व्यक्तिगत गारंटियों को लागू करने की कार्रवाई शुरू की। बैंक का उद्देश्य गारंटी के आधार पर बकाया रकम की वसूली करना था। हालाँकि,धूत की व्यक्तिगत दिवालियापन समाधान प्रक्रिया के दौरान कर्ज चुकाने के लिए एक योजना पेश की गई थी,लेकिन लेनदारों ने उसे स्वीकार नहीं किया।

धूत की ओर से प्रस्तुत भुगतान योजना में सिलीगुड़ी में प्रस्तावित एक रियल एस्टेट विकास परियोजना के जरिए तीन वर्षों के भीतर 600 करोड़ रुपये चुकाने की बात कही गई थी। इस प्रस्ताव के तहत भुगतान परियोजना से होने वाली संभावित आय पर निर्भर था। हालाँकि,कुल स्वीकृत दावों की तुलना में 600 करोड़ रुपये की यह पेशकश एक प्रतिशत से भी कम थी। यही वजह रही कि इस योजना को लेकर लेनदारों और समाधान प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों ने गंभीर सवाल उठाए।

समाधान पेशेवर ने भी भुगतान योजना पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि प्रस्तावित रकम की उपलब्धता कई ऐसी परिस्थितियों पर निर्भर थी,जिनका पूरा होना निश्चित नहीं था। सिलीगुड़ी की रियल एस्टेट परियोजना को भविष्य में मिलने वाली जरूरी मंजूरियों और उससे होने वाले संभावित नकदी प्रवाह के आधार पर भुगतान का वादा किया गया था। योजना में तत्काल या अग्रिम भुगतान का कोई प्रावधान भी नहीं था। ऐसे में लेनदारों के लिए यह भरोसा करना मुश्किल था कि तय समय में प्रस्तावित रकम वास्तव में मिल पाएगी।

इन परिस्थितियों को देखते हुए लेनदारों ने भुगतान योजना को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद धूत की व्यक्तिगत दिवालियापन समाधान प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। ट्रिब्यूनल ने इस वर्ष जुलाई में इस समाधान प्रक्रिया को समाप्त कर दिया था। साथ ही, लेनदारों को उनके बकाया कर्ज की वसूली के लिए बैंकरप्सी की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दे दी गई थी। इसी आदेश के बाद एसबीआई ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर धूत के खिलाफ दिवालियापन की याचिका दाखिल की।

अब ट्रिब्यूनल के ताजा आदेश के बाद बैंकरप्सी ट्रस्टी को आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। उन्हें सबसे पहले धूत के लेनदारों से उनके दावों की जानकारी आमंत्रित करनी होगी। इसके बाद उनकी संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेकर उनका प्रबंधन करना होगा। ट्रिब्यूनल ने ट्रस्टी को 90 दिनों के भीतर एक प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया है। इस रिपोर्ट में संपत्तियों,लेनदारों के दावों और आगे की कार्रवाई से संबंधित जरूरी जानकारियाँ शामिल होंगी।

इस प्रक्रिया के तहत धूत की संपत्तियों का आकलन किया जाएगा और कानून के मुताबिक उनका इस्तेमाल बकाया भुगतान के लिए किया जाएगा। बैंकरप्सी ट्रस्टी की जिम्मेदारी होगी कि वे संपत्तियों का उचित प्रबंधन करें और निर्धारित नियमों के अनुसार लेनदारों के बीच वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाएँ।

वीडियोकॉन समूह का कर्ज विवाद लंबे समय से वित्तीय क्षेत्र में चर्चा का विषय रहा है। अब समूह के पूर्व प्रमोटर के खिलाफ व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर शुरू हुई दिवालियापन कार्यवाही इस मामले में एक अहम पड़ाव मानी जा रही है। एसबीआई की 12,668 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली संबंधी माँग और धूत की संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर आने वाले दिनों में प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद अब सबकी नजर बैंकरप्सी ट्रस्टी की रिपोर्ट और संपत्तियों से जुड़े अगले कदमों पर रहेगी।