नई दिल्ली,22 जुलाई (युआईटीवी)- संसद तक मार्च के दौरान हुई हिंसक झड़प के मामले में दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने अब तक कुल 10 एफआईआर दर्ज करते हुए प्रदर्शन के दौरान हुई विभिन्न घटनाओं की अलग-अलग कोणों से जाँच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार,यह कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के उद्देश्य से की जा रही है। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों पर हमले, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने,बैरिकेड्स तोड़ने,बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने और अन्य कानून-व्यवस्था संबंधी मामलों को लेकर अलग-अलग थानों में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जाँच अभी प्रारंभिक चरण में है और उपलब्ध सभी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक,संसद तक मार्च के दौरान हुई घटनाओं से जुड़े मामलों में संसद मार्ग थाने में सबसे अधिक चार एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसके अलावा कनॉट प्लेस थाने में तीन एफआईआर दर्ज हुई हैं,जबकि मंदिर मार्ग,बाराखंभा रोड और कर्तव्य पथ थानों में एक-एक मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान अलग-अलग स्थानों पर हुई घटनाओं और उनके स्वरूप के आधार पर संबंधित थाना क्षेत्रों में मुकदमे दर्ज किए गए हैं,ताकि प्रत्येक घटना की अलग से जाँच की जा सके और जिम्मेदार लोगों की पहचान सुनिश्चित हो सके।
इन मामलों में एक महत्वपूर्ण एफआईआर नई दिल्ली के हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र में बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने से संबंधित है। जिस समय यह प्रदर्शन हुआ, उस दौरान संसद का सत्र भी चल रहा था। ऐसे में संसद और आसपास का इलाका अत्यंत संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्र माना जाता है। पुलिस के अनुसार,बिना पूर्व अनुमति ड्रोन उड़ाना सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन है और इस मामले की भी अलग से जाँच की जा रही है। अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि ड्रोन किसने उड़ाया,उसका उद्देश्य क्या था और क्या उससे किसी प्रकार की सुरक्षा चुनौती उत्पन्न हुई।
दिल्ली पुलिस ने यह भी बताया कि प्रदर्शन के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स के एक जवान पर हुए हमले के मामले में भी एफआईआर दर्ज की गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कुछ लोग जवान के साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में प्रदर्शनकारियों के एक समूह को रैपिड एक्शन फोर्स के वाहन पर पथराव करते और उसमें तोड़फोड़ करते हुए भी देखा गया है। पुलिस ने इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और उनकी पहचान के लिए व्यापक जाँच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जा रहा है। अब तक 250 से अधिक वीडियो की जाँच की जा रही है। इनमें प्रदर्शनकारियों और आम लोगों के मोबाइल फोन से बनाई गई रिकॉर्डिंग,विभिन्न स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, ड्रोन कैमरों से प्राप्त दृश्य और पुलिसकर्मियों के बॉडी-वॉर्न कैमरों में रिकॉर्ड हुई वीडियो शामिल हैं। जाँच एजेंसियों का मानना है कि इन वीडियो के आधार पर हिंसा में शामिल लोगों की स्पष्ट पहचान की जा सकेगी और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज का मिलान अन्य तकनीकी साक्ष्यों से भी किया जा रहा है। जाँच दल घटनास्थल पर मौजूद लोगों की गतिविधियों,हिंसा के समय की परिस्थितियों और उपद्रव की शुरुआत कैसे हुई,इसका क्रमवार विश्लेषण कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार,यदि जाँच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो आगे और भी मामले दर्ज किए जा सकते हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा,चाहे वह किसी भी संगठन या समूह से जुड़ा हो।
गौरतलब है कि यह प्रदर्शन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि देश में पेपर लीक और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के मामलों में सरकार प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही है। इसी मुद्दे को लेकर हजारों लोग मध्य दिल्ली में एकत्र हुए और जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालने का प्रयास किया।
जंतर-मंतर से संसद भवन की दूरी एक किलोमीटर से भी कम है,लेकिन संसद सत्र के दौरान सुरक्षा कारणों से इस क्षेत्र में विशेष प्रतिबंध लागू रहते हैं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को निर्धारित क्षेत्र से आगे बढ़ने से रोकने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेड्स लगाए थे। हालांकि बड़ी संख्या में मौजूद प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने पर अड़ गए और उन्होंने बैरिकेड्स को हटाने का प्रयास किया। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई,जिसने कुछ ही समय में हिंसक रूप ले लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार,स्थिति उस समय और अधिक तनावपूर्ण हो गई,जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। झड़प के दौरान कई स्थानों पर धक्का-मुक्की हुई और कुछ वाहनों तथा सुरक्षा अवरोधकों को भी नुकसान पहुँचा। इस पूरे घटनाक्रम में दर्जनों पुलिसकर्मी घायल हुए,जबकि कई प्रदर्शनकारियों को भी चोटें आईं। घायलों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुँचाया गया।
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों के अनुसार,लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सभी नागरिकों को प्राप्त है,लेकिन हिंसा,सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाना और सुरक्षाकर्मियों पर हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि निष्पक्ष जाँच के आधार पर सभी तथ्यों को सामने लाया जाएगा और जो भी व्यक्ति हिंसा या कानून तोड़ने में शामिल पाया जाएगा,उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा ने एक बार फिर राजधानी में बड़े प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। फिलहाल पुलिस की जाँच जारी है और 250 से अधिक वीडियो सहित अन्य तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। जाँच एजेंसियों की कोशिश है कि घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने लाई जाए और हिंसा के लिए जिम्मेदार प्रत्येक व्यक्ति की पहचान कर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
