नई दिल्ली,10 अगस्त (युआईटीवी)- फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान में अचानक करीब 300 फीट की ऊँचाई गिरने की घटना के बाद विमानन क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। नागर विमानन मंत्रालय ने रविवार को कहा कि घटना की जांच पूरी होने तक उड़ान के मुख्य पायलट और फर्स्ट ऑफिसर को रोस्टर से हटा दिया गया है। वहीं, मुख्य पायलट के साइकोएक्टिव सब्सटेंस स्क्रीनिंग टेस्ट में कन्फर्मेटरी जाँच की जरूरत सामने आने के बाद अब अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अभी मुख्य पायलट की ड्रग टेस्ट की अंतिम रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है और किसी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाजी होगी।
यह घटना 4 अगस्त को एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान एआई2379 में हुई थी। एयरबस ए320 विमान,जिसका पंजीकरण वीटी-ईएक्सओ था,फुकेत से दिल्ली के लिए उड़ान भरने के बाद क्रूज चरण में था। इसी दौरान विमान ने अचानक लगभग 300 फीट की ऊँचाई खो दी। अचानक ऊँचाई में आई इस गिरावट से विमान में सवार यात्रियों और चालक दल के सदस्यों में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। हालाँकि,कुछ समय बाद विमान स्थिर हो गया और चालक दल ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए विमान को सुरक्षित रूप से दिल्ली हवाईअड्डे पर उतार लिया।
इस घटना में कुछ यात्रियों और केबिन क्रू सदस्यों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। विमान में कुल 137 यात्री सवार थे,जिनमें तीन शिशु भी शामिल थे। इसके अलावा विमान में आठ क्रू सदस्य थे। इनमें दो पायलट और छह केबिन क्रू सदस्य शामिल थे। अचानक ऊँचाई कम होने की घटना के बाद यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। हालाँकि,विमान को सुरक्षित तरीके से दिल्ली में उतार लिया गया और किसी बड़े हादसे को टाल दिया गया।
नागर विमानन मंत्रालय के अनुसार, इस तरह की घटना के बाद निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया के तहत विमान के दोनों फ्लाइट क्रू सदस्यों का साइकोएक्टिव सब्सटेंस स्क्रीनिंग टेस्ट किया गया। विमानन सुरक्षा नियमों के तहत पायलट और अन्य संबंधित क्रू सदस्यों की जाँच की जाती है,ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उड़ान के दौरान किसी ऐसे पदार्थ का प्रभाव नहीं था,जो उनकी कार्यक्षमता या निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता हो।
मंत्रालय ने बताया कि दोनों फ्लाइट क्रू सदस्यों की निर्धारित जाँच की गई थी। हालाँकि, मुख्य पायलट के प्रारंभिक स्क्रीनिंग टेस्ट के नतीजे में कन्फर्मेटरी टेस्ट की आवश्यकता का संकेत मिला। इसके बाद संबंधित नमूनों को आगे की जाँच के लिए निर्धारित प्रयोगशाला में भेज दिया गया है। मंत्रालय ने साफ तौर पर कहा है कि कन्फर्मेटरी टेस्ट की अंतिम रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल मुख्य पायलट के संबंध में किसी तरह का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।
नागर विमानन मंत्रालय ने कहा कि नमूनों को कन्फर्मेटरी विश्लेषण के लिए निर्धारित प्रयोगशाला में भेज दिया गया है और अब अंतिम रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जा रही है। मंत्रालय के मुताबिक,जाँच और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने तक नागर विमानन महानिदेशालय ने दोनों फ्लाइट क्रू सदस्यों को रोस्टर से हटा दिया है। यानी जाँच पूरी होने और संबंधित रिपोर्ट सामने आने तक दोनों पायलटों को उड़ान ड्यूटी नहीं दी जाएगी।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि जाँच के नतीजे और कन्फर्मेटरी टेस्ट की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही आगे की उचित कार्रवाई की जाएगी। इससे यह स्पष्ट है कि फिलहाल मुख्य पायलट के खिलाफ किसी अंतिम कार्रवाई का फैसला नहीं लिया गया है। विमानन अधिकारियों की ओर से अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि आगे किस तरह की कार्रवाई की आवश्यकता है।
इस पूरी घटना की जाँच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो द्वारा की जा रही है। अधिकारियों ने इस घटना को गंभीर घटना की श्रेणी में रखा है। जाँच एजेंसी विमान की अचानक ऊँचाई में आई गिरावट के कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। जाँच के दौरान उड़ान से जुड़े तकनीकी पहलुओं,पायलटों के संचालन,मौसम संबंधी परिस्थितियों,विमान की प्रणालियों और अन्य संभावित कारणों की समीक्षा की जा सकती है। जाँच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक वजह को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
इस बीच फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स के अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा ने कहा है कि यदि मुख्य पायलट का डोप टेस्ट अंतिम रूप से सकारात्मक पाया जाता है,तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। उनके मुताबिक,ऐसी स्थिति में पायलट का उड़ान लाइसेंस रद्द किया जा सकता है और उसे अन्य दंडात्मक कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। हालाँकि,उन्होंने भी अंतिम निर्णय को जाँच और कन्फर्मेटरी रिपोर्ट से जोड़कर देखा है।
विमानन क्षेत्र में पायलटों की फिटनेस और नशीले या साइकोएक्टिव पदार्थों के इस्तेमाल को लेकर नियम बेहद सख्त हैं। इसका कारण यह है कि विमान उड़ाने के दौरान पायलट की सतर्कता,निर्णय लेने की क्षमता और प्रतिक्रिया का समय सीधे तौर पर सैकड़ों यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा होता है। ऐसे में किसी भी पायलट के स्क्रीनिंग टेस्ट में संदिग्ध परिणाम सामने आने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे की जांच की जाती है।
इस मामले में भी मंत्रालय ने जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुँचने के बजाय कन्फर्मेटरी जाँच की प्रक्रिया अपनाई है। प्रारंभिक स्क्रीनिंग में किसी पदार्थ की मौजूदगी का संकेत मिलना अपने आप में अंतिम पुष्टि नहीं माना जाता। अंतिम निष्कर्ष के लिए नमूनों का निर्धारित प्रयोगशाला में विस्तृत विश्लेषण किया जाता है। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की नियामकीय कार्रवाई तय की जाएगी।
एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान में हुई अचानक ऊँचाई गिरने की घटना ने एक बार फिर उड़ान सुरक्षा और क्रू की फिटनेस से जुड़े सवालों को चर्चा में ला दिया है। फिलहाल मुख्य पायलट और फर्स्ट ऑफिसर दोनों को ड्यूटी से हटाया गया है और विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो की जाँच जारी है। अब सबसे महत्वपूर्ण रिपोर्ट कन्फर्मेटरी ड्रग टेस्ट की अंतिम रिपोर्ट होगी। इसके साथ ही जाँच एजेंसी की रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट होगा कि विमान ने अचानक ऊँचाई क्यों खोई और इस घटना के पीछे तकनीकी,मानवीय या अन्य कोई कारण था। जब तक दोनों जांचों के निष्कर्ष सामने नहीं आते,तब तक इस मामले में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचना उचित नहीं होगा।
