जन्माष्टमी पर पीएम मोदी ने देशवासियों को दी शुभकामनाएँ,कहा- श्रीकृष्ण की निष्काम कर्म की शिक्षा दिखाती है सही राह

नई दिल्ली,4 सितंबर (युआईटीवी)- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए खास तौर पर निष्काम कर्म के सिद्धांत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य संदेशों में निष्काम कर्म की गहरी प्रेरणा निहित है,जिसने निरंतर मानवता को सही मार्ग दिखाया है। प्रधानमंत्री ने कामना की कि भक्ति और आराधना का यह पर्व देशवासियों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शक्ति और नई प्रेरणा लेकर आए। उन्होंने अपने संदेश का समापन ‘जय श्रीकृष्ण’ के साथ किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर देशवासियों को जन्माष्टमी की बधाई देते हुए भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनकी शिक्षाओं को याद किया। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण के दिव्य संदेशों में निष्काम कर्म की गहन प्रेरणा मौजूद है। यह प्रेरणा केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है,बल्कि मानव जीवन में कर्तव्य, जिम्मेदारी और कर्म के महत्व को भी समझाती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाएँ लंबे समय से मानवता का मार्गदर्शन करती रही हैं और आज भी लोगों को जीवन की चुनौतियों के बीच सही दिशा दिखाती हैं।

जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता के अनुसार,भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। इसी कारण हर वर्ष देशभर में जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त दिनभर उपवास रखते हैं और मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं। मंदिरों में भजन-कीर्तन,झांकियों और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में जन्माष्टमी की परंपराएँ और आयोजन अलग-अलग तरीके से दिखाई देते हैं। मथुरा और वृंदावन में इस पर्व का विशेष महत्व है, क्योंकि इन्हें भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ा प्रमुख क्षेत्र माना जाता है। यहाँ जन्माष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचते हैं। मंदिरों को सजाया जाता है और भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं तथा उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों की झांकियाँ प्रस्तुत की जाती हैं। वहीं देश के अन्य हिस्सों में भी भक्तिभाव और उल्लास के साथ जन्माष्टमी मनाई जाती है।

प्रधानमंत्री मोदी के इस वर्ष के संदेश की खास बात यह रही कि उन्होंने केवल पर्व की शुभकामनाएँ देने के बजाय भगवान श्रीकृष्ण की कर्म संबंधी शिक्षा को भी प्रमुखता दी। निष्काम कर्म का अर्थ ऐसे कर्म से है,जिसमें व्यक्ति अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा से करता है, लेकिन उसके परिणाम को लेकर अत्यधिक आसक्ति नहीं रखता। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्म के महत्व का संदेश दिया था। इसी विचार को प्रधानमंत्री ने अपने शुभकामना संदेश के माध्यम से लोगों के सामने रखा।

निष्काम कर्म का सिद्धांत व्यक्ति को अपने दायित्वों पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा देता है। जीवन में कई बार परिणाम हमारी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं आते,लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति अपने कर्तव्य से पीछे हट जाए। भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं में कर्म को प्राथमिकता देने और पूरी निष्ठा से अपने दायित्व का निर्वहन करने पर जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री के संदेश में इसी विचार की झलक देखने को मिली।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कामना की कि जन्माष्टमी का पर्व सभी के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शक्ति लेकर आए। जन्माष्टमी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है,बल्कि यह लोगों को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन,उनके विचारों और उनके संदेशों से प्रेरणा लेने का अवसर भी प्रदान करता है। श्रीकृष्ण का जीवन संघर्ष,नीति,कर्तव्य,मित्रता और धर्म के प्रति प्रतिबद्धता जैसे अनेक पहलुओं से जुड़ा रहा है। ऐसे में जन्माष्टमी का अवसर लोगों को उनके जीवन और शिक्षाओं को समझने तथा उन्हें अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2025 में भी जन्माष्टमी के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएँ दी थीं। उस समय उन्होंने आस्था,उल्लास और उत्साह से जुड़े इस पर्व के माध्यम से लोगों के जीवन में नई ऊर्जा और उमंग आने की कामना की थी। इस वर्ष के संदेश में भी शुभकामनाओं के साथ भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा को विशेष स्थान दिया गया, लेकिन इस बार निष्काम कर्म के सिद्धांत पर उनका जोर अधिक स्पष्ट दिखाई दिया।

प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय में आया है,जब देशभर में जन्माष्टमी को लेकर धार्मिक उत्साह देखने को मिल रहा है। मंदिरों में विशेष सजावट की गई है और श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियों में जुटे हैं। कई स्थानों पर श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी इस पर्व का हिस्सा बनते हैं।

जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के संदेशों को याद करने का विशेष महत्व माना जाता है। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश देते हुए जीवन के कर्तव्य,धर्म और कर्म से जुड़े कई महत्वपूर्ण सिद्धांत समझाए थे। इनमें कर्म करते रहने और फल की चिंता में उलझे बिना अपने दायित्व को पूरा करने का संदेश प्रमुख है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में इसी निष्काम कर्म की भावना को मानवता के लिए मार्गदर्शक बताया।

प्रधानमंत्री के शुभकामना संदेश में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सकारात्मक सोच और कर्म के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश भी दिखाई दिया। उन्होंने देशवासियों के जीवन में शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा आने की कामना करते हुए जन्माष्टमी के आध्यात्मिक पक्ष को सामने रखा। उनका संदेश इस बात पर केंद्रित रहा कि भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाएँ आज भी लोगों को कठिन परिस्थितियों में अपने कर्तव्य पर टिके रहने और सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।

कुल मिलाकर,श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश धार्मिक शुभकामनाओं के साथ भगवान श्रीकृष्ण के कर्म दर्शन को रेखांकित करने वाला रहा। उन्होंने निष्काम कर्म की शिक्षा को मानवता का मार्गदर्शन करने वाला बताया और देशवासियों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा तथा शक्ति की कामना की। देशभर में भक्ति और उल्लास के साथ मनाए जा रहे इस पर्व के बीच प्रधानमंत्री का संदेश लोगों को भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं से प्रेरणा लेने और अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा के साथ पालन करने का संदेश देता है। उन्होंने सभी देशवासियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएँ देते हुए ‘जय श्रीकृष्ण’ के साथ अपना संदेश समाप्त किया।