वाशिंगटन,7 मई (युआईटीवी)- ईरान युद्ध शुरू होने के बाद दुनिया की राजनीति और कूटनीति में लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। इस युद्ध ने न केवल पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है,बल्कि वैश्विक शक्तियों के बीच भी मतभेद गहरा दिए हैं। इसी बीच कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप लियो और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच तीखी बयानबाजी ने अंतर्राष्ट्रीय राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। दोनों नेताओं के बीच विवाद का मुख्य मुद्दा ईरान, युद्ध और परमाणु हथियारों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण है।
पोप लियो ने युद्ध शुरू होने के बाद लगातार शांति और युद्धविराम की अपील की है। उन्होंने युद्ध को पूरी मानवता पर एक कलंक बताया और कहा कि दुनिया को केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहिए,बल्कि हिंसा रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। पोप का कहना था कि युद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान आम नागरिकों,बच्चों और बेबस लोगों को होता है।
उन्होंने सेंट पीटर्स स्क्वायर में आयोजित साप्ताहिक प्रार्थना सभा के दौरान कहा था कि दुनिया उन लोगों के दर्द को अनदेखा नहीं कर सकती,जो संघर्षों के बीच फँसे हुए हैं। उनके अनुसार मानवता का भविष्य केवल शांति और संवाद से ही सुरक्षित रह सकता है।
हालाँकि,पोप के इन बयानों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी। ट्रंप ने आरोप लगाया कि पोप के बयान ऐसे संकेत देते हैं मानो वह ईरान के परमाणु हथियार रखने की क्षमता का समर्थन कर रहे हों। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने कहा कि यदि ईरान के पास परमाणु हथियार पहुँच गए,तो पूरी दुनिया खतरे में पड़ जाएगी और वैश्विक स्थिरता पूरी तरह प्रभावित होगी।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो जल्द ही पोप से मुलाकात करने वाले हैं,ऐसे में वह पोप तक कौन सा संदेश पहुँचाना चाहते हैं। इस पर ट्रंप ने दो टूक कहा कि उनका रुख पूरी तरह स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि वह पोप को खुश करें या नहीं,लेकिन ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। ट्रंप ने कहा कि दुनिया को यह समझना होगा कि परमाणु हथियारों का प्रसार पूरी मानव सभ्यता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
ट्रंप ने आगे कहा कि यदि ईरान परमाणु शक्ति बन जाता है,तो दुनिया बंधक बन जाएगी। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका वैश्विक सुरक्षा को लेकर समझौता नहीं करेगा और हर संभव कदम उठाएगा,ताकि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनके फैसले किसी धार्मिक नेता की संतुष्टि या नाराजगी पर आधारित नहीं होंगे,बल्कि राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिए जाएँगे।
दूसरी ओर पोप लियो ने ट्रंप के आरोपों को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी भी परमाणु हथियारों का समर्थन नहीं किया और न ही किसी देश को ऐसी क्षमता हासिल करने की वकालत की है। पोप ने कहा कि जो लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं, उन्हें सच्चाई के साथ बात करनी चाहिए। उनके अनुसार,उनका उद्देश्य केवल युद्ध को रोकना और निर्दोष लोगों की जान बचाना है। उन्होंने कहा कि शांति की अपील करना किसी भी तरह से परमाणु हथियारों का समर्थन नहीं माना जा सकता।
यह विवाद उस समय और बढ़ गया,जब अप्रैल में ट्रंप ने पोप की आलोचना करते हुए उन्हें विदेश नीति के मामलों में कमजोर बताया था। ट्रंप ने कहा था कि उन्हें ऐसा पोप पसंद नहीं,जो लगातार उनकी नीतियों की आलोचना करे और जो ईरान को लेकर नरम रुख रखता दिखाई दे। उस समय भी ट्रंप ने आरोप लगाया था कि पोप के बयान अमेरिका की सुरक्षा नीति के खिलाफ हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल दो नेताओं के बीच व्यक्तिगत मतभेद नहीं है,बल्कि यह वैश्विक राजनीति में दो अलग-अलग दृष्टिकोणों की लड़ाई भी है। एक तरफ पोप लियो युद्ध रोकने,कूटनीति और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं,वहीं दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक शक्ति को सबसे अहम मानते हैं। यही कारण है कि दोनों नेताओं के बयान लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इस बयानबाजी का असर दिखाई दे रहा है। कई यूरोपीय देशों ने युद्धविराम और शांति वार्ता की जरूरत पर जोर दिया है,जबकि अमेरिका अब भी ईरान पर सख्त रुख बनाए हुए है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों,तेल की कीमतों और सुरक्षा व्यवस्था को भी प्रभावित किया है। दुनिया भर में यह आशंका बढ़ रही है कि यदि यह संघर्ष लंबा चला तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दुनिया युद्ध और टकराव की दिशा में आगे बढ़ेगी या फिर कूटनीति और शांति का रास्ता निकाला जाएगा। पोप लियो लगातार मानवता और शांति की बात कर रहे हैं,जबकि डोनाल्ड ट्रंप सुरक्षा और शक्ति को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों नेताओं के बीच यह वैचारिक टकराव वैश्विक राजनीति में और भी बड़ा मुद्दा बन सकता है।
