अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

ईरान पर दबाव जारी रहेगा,परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे: डोनाल्ड ट्रंप,सैन्य नीति और ऊर्जा सुरक्षा पर भी रखी बात

वॉशिंगटन,23 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार किसी भी परिस्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगी। उन्होंने कहा कि भारी सैन्य और कूटनीतिक दबाव के बावजूद ईरान अभी तक परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी ठोस समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ है। ट्रंप का कहना है कि बातचीत के दौरान तेहरान बार-बार अपना रुख बदलता रहा है,जबकि अमेरिका अपनी नीति पर पूरी तरह कायम है। उन्होंने विश्वास जताया कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान पर दबाव लगातार बढ़ रहा है और अंततः उसे समझौते की दिशा में आगे बढ़ना पड़ेगा।

जॉर्जिया में आयोजित एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनाव,अमेरिका की सैन्य रणनीति,वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और देश की आर्थिक स्थिति पर विस्तार से अपनी बात रखी। यह सभा चुनावी रैली जैसी रही,जिसमें बड़ी संख्या में उनके समर्थक मौजूद थे। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने ईरान के साथ हालिया संघर्ष में जान गंवाने वाले चार अमेरिकी सैनिकों को श्रद्धांजलि भी दी और कहा कि देश उनकी कुर्बानी को कभी नहीं भूलेगा।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने भाषण में कहा कि ईरान के खिलाफ अपनाई गई नीति केवल किसी एक सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका उद्देश्य लंबे समय तक अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि ईरान पर लगातार दबाव बनाए रखना आवश्यक है,क्योंकि यदि उसे परमाणु हथियार विकसित करने का अवसर मिला तो यह केवल पश्चिम एशिया ही नहीं,बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की ओर से बातचीत के लिए लगातार प्रयास किए गए, लेकिन हर बार ईरान ने अपनी शर्तों में बदलाव कर दिया। ट्रंप ने कहा कि तेहरान बातचीत की मेज पर आने की इच्छा तो दिखाता है,लेकिन जब समझौते का समय आता है तो वह नए मुद्दे उठाने लगता है। उनके अनुसार,यही कारण है कि अब तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान बेहद कठिन दबाव का सामना कर रहा है और भविष्य में उसे अपनी नीति बदलनी ही पड़ेगी।

ट्रंप ने अपने संबोधन में दोहराया कि अमेरिका का सबसे बड़ा उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया,तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। उनके अनुसार,अमेरिका इस मुद्दे पर किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा और आवश्यकता पड़ने पर हर संभव कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल अमेरिकी हितों की रक्षा का मामला नहीं है,बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता से भी जुड़ा हुआ विषय है।

राष्ट्रपति ने अपने भाषण में अमेरिकी अर्थव्यवस्था का भी उल्लेख किया और कहा कि अंतर्राष्ट्रीय तनाव के बावजूद देश की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। उन्होंने दावा किया कि शेयर बाजार लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है और निवेशकों का भरोसा पहले से अधिक मजबूत हुआ है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव को वह एक सीमित झड़प मानते हैं और इसका अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद से शेयर बाजार कई बार नई ऊँचाइयों पर पहुँचा है,जो इस बात का संकेत है कि निवेशक अमेरिकी अर्थव्यवस्था और सरकार की नीतियों पर विश्वास जता रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार की आर्थिक और विदेश नीति एक-दूसरे की पूरक हैं। उनके अनुसार,मजबूत अर्थव्यवस्था अमेरिका को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रभावशाली बनाती है,जबकि सख्त विदेश नीति देश की सुरक्षा को मजबूत करती है। ट्रंप ने कहा कि दोनों क्षेत्रों में उनकी सरकार सफल रही है और इसका लाभ अमेरिकी नागरिकों को मिल रहा है।

अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने ईरानी सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक वर्ष के दौरान ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान 52 हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों की हत्या की गई है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में पर्याप्त महत्व नहीं मिला,जबकि यह मानवाधिकारों से जुड़ा अत्यंत गंभीर मामला है। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरानी सरकार अपने ही नागरिकों के खिलाफ कठोर दमनकारी नीति अपना रही है और दुनिया को इस पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

हालाँकि,ट्रंप के इस दावे को लेकर स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से पुष्टि सामने नहीं आई है। फिर भी उन्होंने अपने समर्थकों के सामने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि अमेरिका मानवाधिकारों के पक्ष में खड़ा रहेगा और जहाँ कहीं भी निर्दोष लोगों पर अत्याचार होगा,वहाँ अपनी आवाज उठाता रहेगा।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने कार्यक्रम से पहले डोवर एयर फ़ोर्स बेस पर आयोजित एक सम्मान समारोह में भी हिस्सा लिया। यह समारोह ईरान के साथ संघर्ष में मारे गए चार अमेरिकी सैनिकों के पार्थिव शरीर के स्वदेश लौटने के अवसर पर आयोजित किया गया था। अमेरिका में इस तरह के समारोह को “डिग्निफाइड ट्रांसफर” कहा जाता है,जिसमें देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को पूरे सैन्य सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी जाती है।

ट्रंप ने कहा कि उन सैनिकों का बलिदान पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने विशेष रूप से शहीद लेफ्टिनेंट टायलर फीहान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका परिवार जॉर्जिया में रैली स्थल के पास रहता है। राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने शहीद सैनिक की माँ शेरी,पिता स्टीफन और चाचा डेविड को एयर फ़ोर्स वन से अपने साथ यात्रा करने का निमंत्रण दिया था,ताकि वे इस कठिन समय में उनके साथ रह सकें। उन्होंने कहा कि टायलर की सेवा और बलिदान को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा और पूरा अमेरिका उनके परिवार के साथ खड़ा है।

अपने भाषण में ट्रंप ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब पहले की तुलना में विदेशी तेल आपूर्ति और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर कम निर्भर है। उनके अनुसार,अमेरिका और वेनेजुएला के बढ़े हुए तेल उत्पादन ने वैश्विक ऊर्जा संतुलन को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने दावा किया कि दोनों देशों को मिलाकर दुनिया के लगभग 62 प्रतिशत तेल संसाधन उपलब्ध हैं,इसलिए अमेरिका पहले की तरह समुद्री मार्गों पर निर्भर नहीं रह गया है।

हालाँकि,उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि होरमुज़ जलडमरूमध्य का वैश्विक व्यापार में महत्वपूर्ण स्थान बना हुआ है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना नहीं है,बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि ईरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग का इस्तेमाल किसी प्रकार के दबाव या धमकी के साधन के रूप में न कर सके। ट्रंप ने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

होरमुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है। खाड़ी क्षेत्र से निर्यात होने वाले कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत इसी मार्ग से होकर दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुँचता है। यदि इस मार्ग पर किसी प्रकार का सैन्य तनाव बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है,तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। ऐसे हालात में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है,जिससे दुनिया के कई देशों में महँगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है।

भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए भी पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आयात करता है। इसलिए यदि होरमुज़ जलडमरूमध्य में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है,तो इसका असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति,समुद्री मालभाड़े और घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक तनाव बने रहने की स्थिति में परिवहन लागत बढ़ सकती है,जिसका प्रभाव विभिन्न वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इस क्षेत्र में किसी भी बड़े सैन्य टकराव का प्रभाव वैश्विक वित्तीय बाजारों,निवेश,समुद्री व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ता है। इसी कारण दुनिया के कई देश अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील करते रहे हैं।

डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि उनकी सरकार ईरान के प्रति सख्त नीति जारी रखने के पक्ष में है। परमाणु कार्यक्रम,क्षेत्रीय सुरक्षा,ऊर्जा आपूर्ति और मानवाधिकार जैसे मुद्दों को उन्होंने एक-दूसरे से जुड़ा हुआ बताते हुए कहा कि अमेरिका इन सभी क्षेत्रों में अपने राष्ट्रीय हितों और वैश्विक सुरक्षा के लिए सक्रिय रहेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि भविष्य में ईरान बातचीत के लिए गंभीरता से आगे आता है तो अमेरिका कूटनीतिक विकल्पों पर विचार कर सकता है,लेकिन परमाणु हथियारों के मुद्दे पर किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।

फिलहाल वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव कम होने के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। दोनों देशों के बीच अविश्वास की स्थिति बनी हुई है और परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद लगातार जारी हैं। ऐसे में आने वाले समय में पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी। वहीं,भारत सहित अनेक देश इस घटनाक्रम पर सतर्कता से निगरानी रखे हुए हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में होने वाला हर बड़ा घटनाक्रम वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।