प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@BJP4Rajasthan)

वैश्विक संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी की देशवासियों से बड़ी अपील,ईंधन बचाने और विदेशी मुद्रा संरक्षण पर दिया जोर,सोने की खरीदारी से बचने की दी सलाह

हैदराबाद,11 मई (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देशवासियों से एक विशेष अपील करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह देशहित को सर्वोपरि रखते हुए संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करे। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष,वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं और अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री ने ईंधन की बचत,सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग, अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने और विदेशी मुद्रा के संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

प्रधानमंत्री ने इस संदेश से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किया,जिसमें वह सिकंदराबाद के परेड ग्राउंड में आयोजित भारतीय जनता पार्टी की एक विशाल जनसभा को संबोधित करते दिखाई दे रहे हैं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया एक असाधारण आर्थिक चुनौती के दौर से गुजर रही है। कई देशों में महँगाई तेजी से बढ़ रही है,आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है और युद्ध जैसी परिस्थितियों ने ऊर्जा संकट को और गहरा कर दिया है। ऐसे समय में भारत को आत्मनिर्भरता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना के साथ आगे बढ़ना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देशभक्ति केवल सीमा पर जाकर बलिदान देने तक सीमित नहीं है। कठिन परिस्थितियों में जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन करना भी सच्ची देशभक्ति है। उन्होंने कहा कि अगर देश का प्रत्येक नागरिक छोटे-छोटे स्तर पर भी योगदान दे,तो भारत इन वैश्विक चुनौतियों का मजबूती से सामना कर सकता है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से ईंधन बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पूरी दुनिया में भारी बढ़ोतरी हुई है और भारत जैसे बड़े देश के लिए ऊर्जा आयात पर अत्यधिक निर्भरता विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव डालती है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि जहाँ भी संभव हो,मेट्रो रेल और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। साथ ही उन्होंने निजी वाहनों के उपयोग को कम करने और कार पूलिंग जैसी व्यवस्थाओं को अपनाने की सलाह दी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि लाखों लोग प्रतिदिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भी ईंधन की बचत करें,तो इससे देश को बड़े स्तर पर विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने उद्योगों और व्यापारिक संस्थानों से भी माल ढुलाई के लिए रेल परिवहन को प्राथमिकता देने की अपील की,क्योंकि इससे लागत कम होने के साथ-साथ ईंधन की खपत भी घटेगी। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया और कहा कि भारत को ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कोविड काल के दौरान विकसित हुई कार्य प्रणालियों को फिर से अपनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के समय देश ने वर्क फ्रॉम होम,ऑनलाइन मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी व्यवस्थाओं को बड़े पैमाने पर अपनाया था। उस दौरान इन व्यवस्थाओं ने न केवल कामकाज को सुचारु बनाए रखा,बल्कि यात्रा और ईंधन की खपत में भी कमी लाई। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज एक बार फिर समय की माँग है कि सरकारी और निजी संस्थान इन व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दें।

उन्होंने कहा कि तकनीक के बेहतर उपयोग से कार्यक्षमता में भी वृद्धि हुई थी और लोगों का समय तथा संसाधन दोनों बचे थे। यदि आवश्यक बैठकों और कार्यों को ऑनलाइन माध्यम से किया जाए,तो इससे बड़ी मात्रा में ईंधन की बचत संभव है। प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्रीय हित से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि हर नागरिक और संस्था को इस दिशा में सकारात्मक सोच के साथ कदम बढ़ाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने विदेशी मुद्रा संरक्षण के संदर्भ में अनावश्यक विदेश यात्राओं और विदेशी पर्यटन पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि फिलहाल विदेशों में छुट्टियाँ मनाने,डेस्टिनेशन वेडिंग करने और गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं से बचें। उन्होंने कहा कि भारत में पर्यटन के अनगिनत सुंदर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध स्थान मौजूद हैं,जिन्हें बढ़ावा देना चाहिए। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी,बल्कि देश के पर्यटन उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

उन्होंने लोगों से भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की भी अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि नागरिक रोजमर्रा की जरूरतों के लिए स्थानीय स्तर पर बने उत्पाद खरीदेंगे,तो इससे देश के छोटे उद्योगों,कारीगरों और उद्यमियों को लाभ होगा। उन्होंने जूते,बैग,कपड़े और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं में मेड इन इंडिया उत्पादों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

प्रधानमंत्री मोदी ने गैर-जरूरी सोने की खरीदारी को भी सीमित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में सोने का बड़ा आयातक देश है और बड़े पैमाने पर सोने की खरीदारी विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ाती है। ऐसे में यदि लोग एक वर्ष तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचें,तो इससे देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी। उन्होंने इसे व्यक्तिगत त्याग नहीं,बल्कि राष्ट्रीय सहयोग की भावना बताया।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था को जोड़ते हुए खाद्य तेल की खपत कम करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि अत्यधिक खाद्य तेल का उपयोग स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक है और भारत को बड़ी मात्रा में खाद्य तेल का आयात करना पड़ता है। यदि लोग तेल की खपत कम करें,तो इससे स्वास्थ्य लाभ के साथ-साथ विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।

प्रधानमंत्री ने किसानों से भी विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता न केवल मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित करती है,बल्कि आयात पर निर्भरता भी बढ़ाती है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग 50 प्रतिशत तक कम करने और प्राकृतिक खेती को अपनाने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के साथ-साथ खेती की लागत भी कम करती है।

उन्होंने किसानों को डीजल पंपों के स्थान पर सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंप अपनाने के लिए भी प्रेरित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को ऊर्जा के स्वदेशी और टिकाऊ स्रोतों की दिशा में आगे बढ़ना होगा। सौर ऊर्जा आधारित तकनीकों से किसानों का खर्च कम होगा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कोविड महामारी के कारण दुनिया पहले ही आपूर्ति श्रृंखला संकट का सामना कर रही थी। इसके बाद यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने हालात को और जटिल बना दिया। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद भारत ने अपने नागरिकों और किसानों को राहत देने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं।

उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में उर्वरकों की कीमतें बेहद अधिक हैं और एक बोरी उर्वरक लगभग 3000 रुपये में बिक रही है,जबकि भारत सरकार किसानों को वही बोरी 300 रुपये से भी कम कीमत पर उपलब्ध करा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार लगातार यह प्रयास कर रही है कि वैश्विक संकट का असर देश के गरीबों,किसानों और मध्यम वर्ग पर कम से कम पड़े।

प्रधानमंत्री की इस अपील को आर्थिक चुनौतियों के बीच सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा समय केवल सरकार के प्रयासों से नहीं,बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही देश मजबूत स्थिति में रह सकता है। प्रधानमंत्री ने लोगों से आत्मनिर्भरता,संयम और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने का आग्रह करते हुए कहा कि यदि 140 करोड़ भारतीय मिलकर छोटे-छोटे प्रयास करें,तो भारत किसी भी वैश्विक संकट का मजबूती से सामना कर सकता है।