अबू धाबी,15 मई (युआईटीवी)- नरेंद्र मोदी अपनी पांच देशों की विदेश यात्रा के पहले चरण में गुरुवार को अबू धाबी पहुँचे,जहाँ उनका भव्य स्वागत किया गया। संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी के एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने विशेष रूप से एयरपोर्ट पहुँचकर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया,जिसे भारत-यूएई संबंधों की गहराती मित्रता का प्रतीक माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी और यूएई के राष्ट्रपति के बीच हुई प्रतिनिधिमंडल-स्तरीय वार्ता में दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण समझौतों और सहमति पत्रों का आदान-प्रदान किया। इनमें रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से जुड़ा समझौता भी शामिल रहा। माना जा रहा है कि यह समझौता ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग के लिहाज से बेहद अहम साबित होगा। दोनों देशों ने ऊर्जा,निवेश,आपूर्ति शृंखला और क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिस तरह यूएई वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को एस्कॉर्ट किया,वह केवल उनका नहीं,बल्कि पूरे भारत और भारतीय जनता का सम्मान है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच विश्वास और मित्रता लगातार नई ऊँचाइयों तक पहुँच रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों का भी उल्लेख किया और कहा कि यूएई के राष्ट्रपति ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की,जिसके लिए भारत उनकी सराहना करता है। उन्होंने कहा कि कठिन समय में मित्र देशों का सहयोग और संवेदनशीलता संबंधों को और अधिक मजबूत बनाती है।
वार्ता के दौरान मध्य पूर्व में मौजूदा तनाव और सुरक्षा स्थिति भी चर्चा का प्रमुख विषय रही। प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई पर हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि किसी भी देश को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि यूएई ने जिस संयम,साहस और दूरदर्शिता का परिचय दिया है,वह सराहनीय है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत यूएई की राष्ट्रीय एकता,सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करता है। उन्होंने यूएई नेतृत्व द्वारा उठाए गए कदमों की प्रशंसा करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत पूरी मजबूती के साथ यूएई के साथ खड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत भविष्य में भी हर परिस्थिति में अपने मित्र देश का समर्थन करता रहेगा।
पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी संघर्ष और उसके वैश्विक प्रभाव का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि युद्ध जैसी परिस्थितियों का असर पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा संवाद और कूटनीति के जरिए समस्याओं के समाधान का समर्थक रहा है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान ही स्थायी स्थिरता का मार्ग है।
प्रधानमंत्री मोदी ने होर्मुज स्ट्रेट का उल्लेख करते हुए कहा कि इस समुद्री मार्ग को मुक्त,खुला और सुरक्षित बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है और इसकी सुरक्षा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि इस संबंध में अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का पालन अनिवार्य है।
भारत और यूएई के बीच ऊर्जा सहयोग को इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है। रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से जुड़े समझौते से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यह साझेदारी भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति को ‘भाई’ कहकर संबोधित करते हुए एयरपोर्ट पर उनके विशेष स्वागत के लिए धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री ने लिखा कि वह भारत-यूएई संबंधों को ऊर्जा,निवेश,आपूर्ति शृंखला और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए उत्साहित हैं।
भारत और यूएई के बीच पिछले कुछ वर्षों में संबंधों में उल्लेखनीय तेजी आई है। व्यापार,निवेश,रक्षा,ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। यूएई भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार और प्रमुख व्यापारिक सहयोगी माना जाता है। बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय भी यूएई में रह रहा है,जो दोनों देशों के संबंधों को सामाजिक और आर्थिक स्तर पर और मजबूत बनाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है,जब पश्चिम एशिया क्षेत्र कई चुनौतियों से गुजर रहा है। ऐसे में भारत और यूएई के बीच बढ़ता सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिए बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक आर्थिक संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की इस यात्रा को भारत की सक्रिय विदेश नीति का हिस्सा माना जा रहा है। इस यात्रा के जरिए भारत विभिन्न देशों के साथ रणनीतिक,आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। अबू धाबी दौरे के बाद प्रधानमंत्री अन्य देशों की यात्रा भी करेंगे,जहाँ कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकों और समझौतों की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी और यूएई नेतृत्व के बीच हुई बातचीत को दोनों देशों के रिश्तों में एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। ऊर्जा सुरक्षा,क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर बढ़ता सहयोग आने वाले समय में भारत-यूएई संबंधों को और अधिक मजबूत बना सकता है।
