प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

प्रधानमंत्री मोदी ने गणेश चतुर्थी पर दी शुभकामनाएँ,साझा किया गणेश पंचरत्नम् का श्लोक

नई दिल्ली,14 सितंबर (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने भगवान गणेश की आराधना से जुड़े आदि शंकराचार्य द्वारा रचित ‘गणेश पंचरत्नम्’ स्तोत्र का पहला श्लोक भी साझा किया। प्रधानमंत्री ने कामना की कि विघ्नहर्ता भगवान गणेश का आशीर्वाद देशवासियों के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करे तथा सभी के प्रयास सफल हों। उन्होंने राष्ट्र की निरंतर प्रगति की भी कामना की।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर साझा किए अपने संदेश में कहा, “देशवासियों को गणेश चतुर्थी की अनंत शुभकामनाएँ । विघ्नहर्ता के दर्शन और पूजन का यह पावन पर्व सबके जीवन में नई ऊर्जा और नए उत्साह का संचार करे। उनके दिव्य आशीर्वाद से सभी के प्रयास सफल हों और राष्ट्र निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहे,यही कामना है। गणपति बाप्पा मोरया!”

प्रधानमंत्री की ओर से इस अवसर पर ‘गणेश पंचरत्नम्’ का पहला श्लोक भी साझा किया गया। इसमें भगवान गणेश की महिमा का वर्णन करते हुए उन्हें भक्तों के संकट दूर करने वाला, मुक्ति प्रदान करने वाला और संसार की रक्षा करने वाला बताया गया है। श्लोक में भगवान गणेश के स्वरूप, उनकी शक्तियों और उनके प्रति भक्तों की श्रद्धा को सुंदर तरीके से व्यक्त किया गया है।

‘गणेश पंचरत्नम्’ की रचना आदि शंकराचार्य ने की थी। इसे भगवान गणेश की स्तुति में रचित एक महत्वपूर्ण स्तोत्र माना जाता है। इसमें पांच श्लोक हैं और इसी वजह से इसे ‘पंचरत्न’ कहा गया है। परंपरा में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि के दाता और भक्तों को मुक्ति का मार्ग प्रदान करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर इस स्तोत्र का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

इस स्तोत्र के पहले श्लोक में भगवान गणेश को ऐसे स्वरूप में नमन किया गया है,जो अपने हाथों में आनंद का प्रतीक मोदक धारण करते हैं और भक्तों को मुक्ति प्रदान करते हैं। उनके मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित है और वह संपूर्ण संसार तथा अपने भक्तों की रक्षा करने वाले हैं। श्लोक में भगवान गणेश को सभी के एकमात्र स्वामी के रूप में संबोधित किया गया है।

श्लोक में भगवान गणेश की उस शक्ति का भी वर्णन मिलता है,जिसके माध्यम से उन्होंने गजासुर जैसे दैत्य का विनाश किया। साथ ही यह विश्वास व्यक्त किया गया है कि जो भक्त श्रद्धा और समर्पण के साथ भगवान गणेश की शरण में आते हैं,उनके अशुभ और संकट भगवान शीघ्र दूर करते हैं। इसी भाव के साथ भक्त श्री विनायक को नमन करता है।

गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है और उन्हें बुद्धि, समृद्धि, शुभता तथा विघ्नों को दूर करने वाले देवता के रूप में स्मरण किया जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। घरों के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों पर भी भगवान गणेश की प्रतिमाएँ स्थापित की जाती हैं और पूजा-अर्चना की जाती है।

गणेश चतुर्थी के अवसर पर प्रधानमंत्री का संदेश धार्मिक आस्था के साथ देश की प्रगति और सामूहिक कल्याण की भावना से भी जुड़ा रहा। उन्होंने भगवान गणेश के आशीर्वाद से देशवासियों के प्रयास सफल होने और राष्ट्र के निरंतर विकास की कामना की। उनके संदेश में पर्व की शुभकामनाओं के साथ सकारात्मक ऊर्जा, उत्साह और समृद्धि का भाव भी दिखाई दिया।

प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए ‘गणेश पंचरत्नम्’ के श्लोक में भगवान गणेश के विभिन्न गुणों और स्वरूपों का स्मरण किया गया है। यह श्लोक भक्त और भगवान के बीच श्रद्धा, विश्वास और समर्पण के भाव को व्यक्त करता है। गणेश चतुर्थी जैसे पावन अवसर पर इसके माध्यम से भगवान गणेश से जीवन के सभी विघ्न दूर करने और शुभता प्रदान करने की प्रार्थना की जाती है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश का समापन “गणपति बाप्पा मोरया” के जयघोष के साथ किया। उनके इस संदेश के जरिए देशवासियों को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएँ देने के साथ भगवान गणेश से सभी के जीवन में सुख, शांति,सफलता और नई ऊर्जा आने की कामना की गई। साथ ही राष्ट्र के निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ने की प्रार्थना भी की गई।