भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लस्कन (तस्वीर क्रेडिट@bulbulroymishra)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह करेंगे न्यूजीलैंड की पहली आधिकारिक यात्रा,व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई गति

वेलिंग्टन/नई दिल्ली,3 जुलाई (युआईटीवी)- भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह न्यूजीलैंड की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर जाएँगे। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच तेजी से मजबूत होते आर्थिक,व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा ऐसे समय में हो रही है,जब हाल ही में भारत और न्यूजीलैंड के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं। इस समझौते को दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है और अब प्रधानमंत्री स्तर की यह मुलाकात भविष्य के सहयोग को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।

न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा की आधिकारिक पुष्टि करते हुए इसे दोनों देशों के रिश्तों के लिए बेहद अहम अवसर बताया है। उन्होंने शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि उन्हें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह न्यूजीलैंड की पहली आधिकारिक यात्रा पर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

क्रिस्टोफर लक्सन ने भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेज़ी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उनके अनुसार न्यूजीलैंड की आर्थिक समृद्धि के लिए भारत अत्यंत महत्वपूर्ण साझेदार है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ मजबूत संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं,बल्कि भविष्य की आर्थिक वृद्धि, निवेश और नए अवसरों से भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में हाल ही में हुए न्यूजीलैंड-भारत मुक्त व्यापार समझौते का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अप्रैल में हुए इस समझौते के माध्यम से दोनों देशों के रिश्तों को एक नए स्तर पर ले जाया जा रहा है। उनके अनुसार इस समझौते से न्यूजीलैंड में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे,निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और देश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल बाजार तक बेहतर पहुँच मिलने से न्यूजीलैंड के उत्पादों और सेवाओं के लिए नए अवसर खुलेंगे, जिससे स्थानीय समुदायों की आय बढ़ेगी और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।

क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा कि भारत की 1.4 अरब से अधिक आबादी वाला विशाल उपभोक्ता बाजार न्यूजीलैंड के निर्यातकों के लिए अत्यंत आकर्षक है। उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते के माध्यम से न्यूजीलैंड की कंपनियों को भारतीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी अवसर मिलेंगे। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार का दायरा बढ़ेगा और दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा 10 जुलाई से शुरू होगी। वह 10 जुलाई को ऑकलैंड पहुँचेंगे और 11 जुलाई को वहाँ से रवाना होंगे। हालाँकि,यात्रा की अवधि अपेक्षाकृत छोटी होगी,लेकिन इसे दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान व्यापार,निवेश,शिक्षा,कृषि,प्रौद्योगिकी,रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हो सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा ऐसे समय में हो रही है,जब भारत और न्यूजीलैंड ने रिकॉर्ड समय में मुक्त व्यापार समझौता पूरा कर दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। दोनों देशों ने 16 मार्च 2025 को इस समझौते के लिए औपचारिक बातचीत शुरू करने की घोषणा की थी। केवल नौ महीनों के भीतर वार्ता पूरी कर समझौते पर हस्ताक्षर किए गए,जिसे दोनों देशों के इतिहास का सबसे तेज़ी से पूरा होने वाला मुक्त व्यापार समझौता माना जा रहा है। इस उपलब्धि को दोनों सरकारों की राजनीतिक इच्छाशक्ति और मजबूत आर्थिक सहयोग का परिणाम माना जा रहा है।

इस मुक्त व्यापार समझौते से भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार और निवेश संबंधों में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद की जा रही है। समझौते के तहत भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में अधिक पहुँच मिलेगी और शुल्क संबंधी बाधाओं को काफी हद तक समाप्त किया जाएगा। जानकारी के अनुसार भारतीय निर्यात पर लगने वाला 100 प्रतिशत शुल्क समाप्त कर दिया गया है,जिससे भारतीय उत्पाद न्यूजीलैंड में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।

समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू न्यूजीलैंड द्वारा भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता भी है। माना जा रहा है कि यह निवेश बुनियादी ढाँचे,प्रौद्योगिकी, कृषि,खाद्य प्रसंस्करण,शिक्षा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में किया जाएगा। इससे दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे तथा निवेश आधारित सहयोग को नई गति मिलेगी।

कृषि क्षेत्र में भी दोनों देशों ने व्यापक सहयोग पर सहमति जताई है। न्यूजीलैंड ने भारत में कीवी फल,सेब और शहद उत्पादकों की उत्पादकता,गुणवत्ता और क्षेत्रीय क्षमताओं में सुधार के लिए विशेष कार्य योजनाओं पर सहमति व्यक्त की है। इसके अलावा भारत में न्यूजीलैंड से आने वाले चयनित कृषि उत्पादों जैसे सेब,कीवी,मनुका शहद और एल्ब्यूमिन के लिए बेहतर बाजार पहुँच सुनिश्चित की जाएगी। दोनों देशों के बीच बागवानी, मधुमक्खी पालन,वानिकी,पशुपालन,मत्स्य पालन और शराब उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की योजना बनाई गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि क्षेत्र में यह सहयोग दोनों देशों के किसानों और कृषि उद्योग के लिए लाभकारी साबित होगा। आधुनिक तकनीक,अनुसंधान,उत्पादकता और गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में न्यूजीलैंड का अनुभव भारत के लिए उपयोगी हो सकता है, जबकि भारत का विशाल बाजार न्यूजीलैंड के कृषि उत्पादों के लिए नए अवसर उपलब्ध कराएगा।

भारत और न्यूजीलैंड के बीच संबंध केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से मजबूत जन-संपर्क,शिक्षा,संस्कृति और प्रवासी भारतीय समुदाय के माध्यम से भी गहरे संबंध बने हुए हैं। न्यूजीलैंड में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जिन्होंने वहाँ के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यही कारण है कि दोनों देशों के संबंधों को केवल सरकारी स्तर की साझेदारी नहीं,बल्कि लोगों के बीच मजबूत जुड़ाव के रूप में भी देखा जाता है।

व्यापारिक दृष्टि से भी न्यूजीलैंड भारत के लिए महत्वपूर्ण साझेदार बनता जा रहा है। वर्तमान में न्यूजीलैंड ओशिनिया क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वर्ष 2024 के दौरान न्यूजीलैंड का कुल आयात लगभग 47 अरब अमेरिकी डॉलर और निर्यात लगभग 42 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इसके अलावा न्यूजीलैंड अपनी सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 8 प्रतिशत हर वर्ष विदेशी निवेश के रूप में विभिन्न देशों में लगाता है। ऐसे में भारत जैसे तेजी से विकसित हो रहे बाजार में न्यूजीलैंड की बढ़ती दिलचस्पी भविष्य के आर्थिक संबंधों को और मजबूत बना सकती है।

विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा दोनों देशों के लिए केवल एक राजनयिक कार्यक्रम नहीं होगी,बल्कि भविष्य की व्यापक आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकती है। मुक्त व्यापार समझौते के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की यह मुलाकात व्यापार,निवेश,नवाचार,कृषि,शिक्षा,प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय सहयोग को नई गति दे सकती है। साथ ही यह यात्रा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका और न्यूजीलैंड के साथ उसके मजबूत होते संबंधों का भी स्पष्ट संकेत मानी जा रही है। आने वाले वर्षों में इस साझेदारी के और अधिक व्यापक तथा बहुआयामी रूप लेने की उम्मीद जताई जा रही है।