नई दिल्ली,23 मार्च (युआईटीवी)- पाकिस्तान क्रिकेट में एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के चेयरमैन मोहसिन नकवी ने उन विदेशी खिलाड़ियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का संकेत दिया है,जिन्होंने आखिरी समय में पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) से नाम वापस लेकर इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में खेलने का फैसला किया है। लगातार दूसरे साल दोनों लीग एक ही समय पर आयोजित हो रही हैं,जिससे खिलाड़ियों के चयन और उपलब्धता को लेकर विवाद की स्थिति पैदा हो गई है।
मोहसिन नकवी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जो खिलाड़ी पीएसएल के साथ अनुबंध करने के बाद अंतिम समय में हटते हैं,उनके खिलाफ नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पिछले साल का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में पीसीबी पहले भी सख्त कदम उठा चुका है और इस बार भी वही नीति अपनाई जाएगी। यह बयान ऐसे समय आया है,जब कई अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी पीएसएल से हटने के बाद आईपीएल का रुख कर चुके हैं,जिससे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की छवि और लीग की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
पिछले सीजन में कॉर्बिन बॉश का मामला काफी चर्चा में रहा था। उन्हें पेशावर ज़ल्मी की ओर से चुना गया था,लेकिन उन्होंने अंतिम समय में पीएसएल से अपना नाम वापस लेकर मुंबई इंडियंस के साथ खेलने का निर्णय लिया। इस कदम के बाद पीसीबी ने उन पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया था। नकवी ने संकेत दिया है कि इस तरह की घटनाओं को दोहराने वाले खिलाड़ियों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
इस बार भी कुछ बड़े नामों ने पीएसएल से दूरी बनाई है। इनमें गुडाकेश मोती,जेक फ़्रेज़र-मैकगर्क,ओटनील बार्टमैन और स्पेंसर जॉनसन शामिल हैं। हालाँकि,इन खिलाड़ियों ने आधिकारिक तौर पर निजी कारणों का हवाला दिया है,लेकिन क्रिकेट जगत में इसे आईपीएल की बढ़ती लोकप्रियता और आर्थिक आकर्षण से जोड़कर देखा जा रहा है। आईपीएल की ऊंची सैलरी और वैश्विक पहचान के चलते कई खिलाड़ी पीएसएल की तुलना में उसे प्राथमिकता दे रहे हैं।
पाकिस्तान सुपर लीग का यह सीजन 26 मार्च से शुरू होने वाला है,लेकिन इस बार टूर्नामेंट कई चुनौतियों के बीच आयोजित किया जा रहा है। एक ओर खिलाड़ियों की अनुपलब्धता ने आयोजकों की चिंता बढ़ा दी है,वहीं दूसरी ओर अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों का भी इस पर असर पड़ा है। पीसीबी ने पहले इस सीजन के मुकाबले छह अलग-अलग शहरों में कराने की योजना बनाई थी,लेकिन पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और उससे उत्पन्न तेल संकट के कारण अब टूर्नामेंट को सीमित कर दिया गया है।
अब पीएसएल के सभी मैच सिर्फ लाहौर और कराची में ही खेले जाएँगे। इसके साथ ही सुरक्षा और आर्थिक कारणों को देखते हुए इस बार मुकाबले बंद दरवाजों के पीछे आयोजित किए जाने का फैसला भी लिया गया है। इससे लीग के माहौल और दर्शकों के उत्साह पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि आईपीएल और पीएसएल के बीच टकराव भविष्य में और बढ़ सकता है,खासकर तब जब दोनों लीग एक ही समय पर आयोजित होती रहेंगी। ऐसे में खिलाड़ियों के सामने चयन को लेकर दुविधा बनी रहेगी। जहाँ एक ओर आईपीएल उन्हें अधिक आर्थिक लाभ और वैश्विक मंच प्रदान करता है,वहीं पीएसएल भी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
मोहसिन नकवी का यह कड़ा रुख यह संकेत देता है कि पीसीबी अब अपनी लीग की प्रतिष्ठा को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बोर्ड की सख्ती का खिलाड़ियों पर कितना असर पड़ता है और क्या इससे पीएसएल की विश्वसनीयता को मजबूती मिलती है या नहीं। फिलहाल,क्रिकेट जगत की नजरें इस पूरे विवाद और उसके संभावित परिणामों पर टिकी हुई हैं।
