वाशिंगटन,23 मार्च (युआईटीवी)- अमेरिकी राजनीति एक बार फिर तीखे टकराव के दौर में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ किसी भी तरह के समझौते को सिरे से खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि जब तक उनकी प्रस्तावित व्यापक विधायी योजना ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को समर्थन नहीं मिलता,तब तक कोई सहमति संभव नहीं है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब वॉशिंगटन में कई महत्वपूर्ण विधायी मुद्दों पर बातचीत जारी है और दोनों दल किसी साझा समाधान की तलाश में हैं।
सोशल मीडिया पर किए गए अपने हालिया पोस्ट में ट्रम्प ने डेमोक्रेट्स पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “कट्टरपंथी वामपंथी” करार दिया और कहा कि उनके साथ किसी भी प्रकार का समझौता देश के हित में नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि रिपब्लिकन सांसदों को एकजुट होकर ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को पारित कराने के लिए काम करना चाहिए। उनके अनुसार यह विधेयक देश के भविष्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे अन्य सभी विधायी प्राथमिकताओं से ऊपर रखा जाना चाहिए।
ट्रंप ने खासतौर पर इमिग्रेशन नीति से जुड़े मुद्दों पर अपनी सख्त नाराजगी जाहिर की। उन्होंने अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट यानी आईसीई के बजट में संभावित पॉंच अरब डॉलर की कटौती को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। उनके मुताबिक,यह कदम देश की सुरक्षा को कमजोर कर सकता है और अवैध आव्रजन पर नियंत्रण की क्षमता को प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते में इस तरह की कटौती को स्वीकार नहीं किया जा सकता,चाहे उसे किसी भी नाम से पेश किया जाए।
‘सेव अमेरिका एक्ट’ के तहत ट्रंप ने जिन नीतिगत शर्तों की माँग की है,वे काफी व्यापक और विवादास्पद मानी जा रही हैं। इनमें चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई अहम बदलाव शामिल हैं,जैसे कि मतदाता पहचान पत्र को अनिवार्य करना,मतदान के लिए नागरिकता का प्रमाण जरूरी करना और डाक द्वारा मतदान पर सख्त प्रतिबंध लगाना। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि चुनावी प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए इन उपायों को लागू करना जरूरी है। हालाँकि,उन्होंने कुछ विशेष परिस्थितियों में डाक मतपत्रों के इस्तेमाल की सीमित अनुमति का संकेत भी दिया है।
इसके अलावा,इस प्रस्तावित विधेयक में सामाजिक नीतियों से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। ट्रंप ने खेल गतिविधियों में भागीदारी और लिंग-संबंधी चिकित्सा प्रक्रियाओं को लेकर भी सख्त नियम लागू करने की वकालत की है। यह मुद्दे पहले से ही अमेरिकी समाज और राजनीति में गहन बहस का विषय रहे हैं और ट्रंप के इस रुख ने इन विवादों को और अधिक तीखा कर दिया है।
ट्रंप ने रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी एकजुटता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सीनेट में पार्टी नेतृत्व का जिक्र करते हुए कहा कि सभी प्रस्तावों को एक ही विधायी पैकेज में समाहित कर दिया जाए और उस पर एक साथ मतदान कराया जाए। इस संदर्भ में उन्होंने जॉन थून का नाम लेते हुए संकेत दिया कि पार्टी को उन सदस्यों की पहचान करनी चाहिए जो इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं कर रहे हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी कि जो नेता इस कानून के खिलाफ जाएँगे,उन्हें भविष्य में चुनावी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने अमेरिकी सीनेट की प्रक्रियाओं में भी बदलाव की माँग की,खासकर फिलिबस्टर को समाप्त करने की बात कही। फिलिबस्टर एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत सीनेट में किसी विधेयक को पारित करने के लिए 60 वोटों की आवश्यकता होती है और इसका उपयोग अक्सर विपक्षी दल विधेयकों को रोकने के लिए करते हैं। ट्रंप का मानना है कि इस नियम के कारण महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों में देरी होती है और इसे हटाकर साधारण बहुमत से कानून पारित करने का रास्ता साफ किया जाना चाहिए। उन्होंने यहाँ तक कहा कि यदि जरूरत पड़े तो सांसदों को ईस्टर के दौरान भी वॉशिंगटन डीसी में रहकर इस विधेयक को पारित करना चाहिए।
ट्रंप के इस बयान से न केवल डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ टकराव बढ़ा है,बल्कि रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी मतभेद उजागर हुए हैं। कुछ रिपब्लिकन नेता ट्रम्प के कठोर रुख से सहमत हैं,जबकि अन्य मानते हैं कि इतनी व्यापक और विवादास्पद शर्तों को एक ही विधेयक में शामिल करना व्यावहारिक नहीं है और इससे विधायी प्रक्रिया और अधिक जटिल हो सकती है।
वहीं,डेमोक्रेट्स ने ट्रंप के प्रस्तावों का कड़ा विरोध किया है। उनका तर्क है कि मतदाता पहचान कानूनों और डाक मतदान पर प्रतिबंध जैसे कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी को सीमित कर सकते हैं,खासकर उन वर्गों के लिए जो पहले से ही हाशिए पर हैं। उनका कहना है कि चुनावी सुधारों के नाम पर ऐसे नियम लागू करना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। चुनावी सुधार,आव्रजन नियंत्रण और सामाजिक नीतियां लंबे समय से रिपब्लिकन एजेंडे के प्रमुख मुद्दे रहे हैं और इन पर सख्त रुख अपनाकर ट्रंप अपने समर्थक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही,यह कदम पार्टी के भीतर अपनी पकड़ को बनाए रखने और विरोधी नेताओं पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
‘सेव अमेरिका एक्ट’ को लेकर उठे इस विवाद ने अमेरिकी राजनीति में ध्रुवीकरण को और गहरा कर दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या रिपब्लिकन पार्टी इस मुद्दे पर एकजुट हो पाती है और क्या डेमोक्रेट्स के साथ किसी प्रकार का समझौता संभव हो पाता है। फिलहाल,ट्रंप के सख्त रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वॉशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध जल्द खत्म होता नहीं दिख रहा है।
