रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

पुतिन ने भारत-रूस संबंधों को बताया भरोसे और साझेदारी की मिसाल,रक्षा सहयोग और तकनीकी क्षमता की जमकर की सराहना

सेंट पीटर्सबर्ग,6 जून (युआईटीवी)- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर भारत और रूस के बीच दशकों पुराने रणनीतिक संबंधों की मजबूती को रेखांकित करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग केवल हथियारों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है,बल्कि यह आपसी विश्वास,तकनीकी साझेदारी और संयुक्त विकास परियोजनाओं पर आधारित है। सेंट पीटर्सबर्ग अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक मंच के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए पुतिन ने भारत को रूस का एक विश्वसनीय और महत्वपूर्ण साझेदार बताया तथा दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग की सराहना की।

अपने संबोधन में रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और रूस के बीच संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं और दोनों देशों ने हमेशा एक-दूसरे के हितों और संप्रभुता का सम्मान किया है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच लंबे समय से मजबूत सहयोग बना हुआ है और यह सहयोग आज भी लगातार आगे बढ़ रहा है। पुतिन के अनुसार भारत और रूस के बीच सैन्य साझेदारी केवल तैयार हथियारों के आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है,बल्कि इसमें अनुसंधान,तकनीकी विकास और संयुक्त उत्पादन जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियाँ भी शामिल हैं।

रूसी राष्ट्रपति ने इस दौरान भारत द्वारा रूस से खरीदे गए विभिन्न रक्षा उपकरणों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्षों से भारत ने रूस से कई प्रकार के लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और अन्य सैन्य प्रणालियाँ प्राप्त की हैं,जिन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पुतिन ने यह भी संकेत दिया कि रूस ने अपने सबसे आधुनिक और उन्नत लड़ाकू विमानों में शामिल सुखोई-57 को भी भारत के सामने पेश किया है।

उन्होंने कहा कि सुखोई-57 दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में से एक माना जाता है और इसकी तकनीकी क्षमताएँ इसे पाँचवीं पीढ़ी के अत्याधुनिक विमानों की श्रेणी में स्थापित करती हैं। पुतिन के इस बयान को रक्षा विशेषज्ञ महत्वपूर्ण मान रहे हैं,क्योंकि यह भारत और रूस के बीच भविष्य में संभावित रक्षा सहयोग के नए अवसरों की ओर संकेत करता है।

अपने भाषण में पुतिन ने भारत-रूस रक्षा सहयोग के सबसे सफल उदाहरणों में से एक ब्रह्मोस मिसाइल कार्यक्रम का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना दोनों देशों के वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच सफल सहयोग की एक उत्कृष्ट मिसाल है। उनके अनुसार ब्रह्मोस केवल एक मिसाइल प्रणाली नहीं है,बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि भारत और रूस जटिल रक्षा तकनीकों के क्षेत्र में मिलकर काम करने की क्षमता रखते हैं।

पुतिन ने कहा कि जब दो देशों के बीच विश्वास और दीर्घकालिक साझेदारी होती है,तब वे केवल व्यापारिक संबंधों तक सीमित नहीं रहते,बल्कि नई तकनीकों के विकास और साझा परियोजनाओं में भी सफलता प्राप्त करते हैं। उन्होंने ब्रह्मोस परियोजना को इसी सोच का परिणाम बताया और कहा कि भविष्य में भी दोनों देशों के बीच ऐसे कई सहयोगी कार्यक्रम विकसित हो सकते हैं।

रक्षा सहयोग के अलावा रूसी राष्ट्रपति ने भारत की विदेश नीति की भी खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है,जो अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और हितों के आधार पर स्वतंत्र निर्णय लेते हैं। पुतिन के अनुसार भारत ने हमेशा अपनी संप्रभुता और स्वतंत्र विदेश नीति को प्राथमिकता दी है और किसी बाहरी दबाव या प्रभाव के आधार पर फैसले नहीं किए हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का यह दृष्टिकोण अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उसकी मजबूत और सम्मानजनक पहचान बनाता है। पुतिन ने कहा कि किसी भी देश के लिए स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण होती है और भारत ने इस सिद्धांत को लगातार बनाए रखा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि संप्रभुता और स्वतंत्र निर्णय लेने के अधिकार को चुनौती नहीं दी जा सकती।

रूसी राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है,जब वैश्विक राजनीति में विभिन्न देशों पर दबाव डालने और उन्हें विशेष नीतिगत दिशाओं में ले जाने के प्रयासों को लेकर बहस जारी है। पुतिन ने एक दिन पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए कहा था कि भारत जैसे विशाल और प्रभावशाली देश के नेतृत्व पर किसी प्रकार का दबाव बनाने का प्रयास न केवल अनुचित है,बल्कि इससे अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

अपने संबोधन में पुतिन ने भारत की मानव संसाधन क्षमता और तकनीकी दक्षता की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक अपनी प्रतिभा,मेहनत और ज्ञान के कारण पूरी दुनिया में सम्मान प्राप्त कर रहे हैं। विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी और सॉफ्टवेयर विकास के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय विशेषज्ञों ने वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है।

पुतिन ने कहा कि भारतीय युवाओं की तकनीकी समझ और शिक्षा का स्तर अत्यंत प्रभावशाली है। उन्होंने बताया कि कोडिंग,डिजिटल तकनीक और नवाचार के क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों का योगदान दुनिया भर में देखा जा सकता है। उनके अनुसार भारत की यह क्षमता आने वाले वर्षों में उसे वैश्विक तकनीकी शक्ति के रूप में और अधिक मजबूत बनाएगी।

रूसी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि भारत और रूस के बीच केवल सरकारी स्तर पर ही नहीं,बल्कि लोगों के बीच भी गहरे और आत्मीय संबंध हैं। उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को भाईचारे और विश्वास पर आधारित बताया। पुतिन के अनुसार यही कारण है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों और अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों के बावजूद भारत और रूस के संबंध मजबूत बने हुए हैं।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच दशकों से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी लगातार नए क्षेत्रों में विस्तार कर रही है। ऊर्जा,विज्ञान,प्रौद्योगिकी,अंतरिक्ष,शिक्षा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है और भविष्य में इन संबंधों के और मजबूत होने की व्यापक संभावनाएँ मौजूद हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन के ये बयान ऐसे समय में आए हैं,जब वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है और विभिन्न देशों के बीच नए रणनीतिक समीकरण बन रहे हैं। ऐसे माहौल में भारत और रूस के संबंधों को लेकर उनकी सकारात्मक टिप्पणी दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी के महत्व को रेखांकित करती है।

कुल मिलाकर,सेंट पीटर्सबर्ग अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक मंच में दिए गए पुतिन के संबोधन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि रूस भारत को केवल एक व्यापारिक साझेदार के रूप में नहीं,बल्कि एक विश्वसनीय मित्र और रणनीतिक सहयोगी के रूप में देखता है। रक्षा सहयोग,तकनीकी विकास,स्वतंत्र विदेश नीति और मानव संसाधन क्षमता जैसे विभिन्न विषयों पर भारत की सराहना करते हुए पुतिन ने संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में भारत-रूस संबंध और अधिक गहरे तथा व्यापक हो सकते हैं।