अमेरिका ने ईरानी ड्रोन मार गिराने और रडार ठिकानों पर हमले का किया दावा (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव,अमेरिका ने ईरानी ड्रोन मार गिराने और रडार ठिकानों पर हमले का किया दावा

वाशिंगटन,6 जून (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुँचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे ईरान के चार हमलावर ड्रोन को मार गिराया है। इसके साथ ही अमेरिकी बलों ने ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित निगरानी और रडार ठिकानों पर भी जवाबी कार्रवाई करते हुए हमले किए हैं। इस ताजा घटनाक्रम ने पहले से ही तनावपूर्ण क्षेत्रीय माहौल को और अधिक गंभीर बना दिया है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंताएँ बढ़ा दी हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड,जिसे सेंटकॉम के नाम से जाना जाता है,ने एक संक्षिप्त बयान जारी कर इस कार्रवाई की जानकारी दी। सेंटकॉम के अनुसार अमेरिकी बलों ने तब हस्तक्षेप किया जब उन्हें लगा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे ड्रोन क्षेत्रीय समुद्री यातायात और वहाँ से गुजरने वाले जहाजों के लिए तत्काल खतरा पैदा कर रहे हैं। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन ड्रोन को एकतरफा हमले के उद्देश्य से भेजा गया था और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती,तो वे क्षेत्र में मौजूद जहाजों की सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम बन सकते थे।

सेंटकॉम ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी सेना ने चारों ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया। हालाँकि,सेना ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन ड्रोन का अंतिम लक्ष्य क्या था और क्या वे किसी विशेष वाणिज्यिक या सैन्य जहाज को निशाना बनाने की तैयारी में थे। अमेरिकी अधिकारियों ने केवल इतना कहा कि ड्रोन की गतिविधियाँ समुद्री सुरक्षा के लिए तत्काल खतरे के रूप में देखी गईं और इसी आधार पर कार्रवाई की गई।

ड्रोन को मार गिराने के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में स्थित कुछ सैन्य प्रतिष्ठानों पर भी हमले किए। सेंटकॉम के अनुसार ये हमले भविष्य में संभावित खतरों को रोकने और अमेरिकी तथा अंतर्राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किए गए। अमेरिकी सेना ने विशेष रूप से गोरुक और केशम द्वीप पर स्थित ईरानी तटीय निगरानी रडार ठिकानों को निशाना बनाया।

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि ये रडार स्टेशन समुद्री गतिविधियों की निगरानी और क्षेत्र में संचालित सैन्य अभियानों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सेना का दावा है कि इन ठिकानों पर कार्रवाई का उद्देश्य आगे होने वाले संभावित हमलों की क्षमता को सीमित करना और समुद्री मार्गों की सुरक्षा बनाए रखना था।

हालाँकि,अमेरिकी सेना ने अभी तक इस ऑपरेशन के दौरान हुए नुकसान,संभावित हताहतों या इस्तेमाल किए गए हथियारों और विमानों के बारे में कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि रडार ठिकानों पर किए गए हमलों से कितना नुकसान हुआ और ईरानी सैन्य संरचनाओं पर उसका क्या प्रभाव पड़ा।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। दुनिया में तेल और प्राकृतिक गैस के समुद्री व्यापार का बड़ा प्रतिशत इस जलमार्ग पर निर्भर करता है। यही वजह है कि यहाँ किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि या तनाव का असर केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहता,बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ता है।

अमेरिका लंबे समय से इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करता रहा है। अमेरिकी नौसेना और वायु सेना नियमित रूप से इस क्षेत्र में गश्त करती हैं,ताकि वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही सुरक्षित बनी रहे। वॉशिंगटन का मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा वैश्विक व्यापार और आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

सेंटकॉम ने अपने बयान में यह भी कहा कि अमेरिकी बल क्षेत्र में पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए तैयार हैं। सेना ने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिकी हितों,सहयोगी देशों या अंतर्राष्ट्रीय समुद्री यातायात के खिलाफ कोई खतरा उत्पन्न होता है,तो वह आत्मरक्षा के अधिकार के तहत आवश्यक कार्रवाई करेगी।

अमेरिका के इस दावे के बाद अब निगाहें ईरान की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। हालाँकि,इस रिपोर्ट के सामने आने तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी,लेकिन क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है। पिछले कई वर्षों से अमेरिका और ईरान के संबंध विभिन्न मुद्दों को लेकर तनावपूर्ण रहे हैं,जिनमें परमाणु कार्यक्रम,क्षेत्रीय प्रभाव और समुद्री सुरक्षा जैसे विषय प्रमुख रहे हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार का सैन्य टकराव व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है। विशेष रूप से ऐसे समय में जब मध्य पूर्व पहले से ही कई संघर्षों और राजनीतिक अस्थिरताओं का सामना कर रहा है,अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव पूरे क्षेत्र के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकता है।

ऊर्जा बाजार भी इस घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव लगातार बढ़ता है,तो तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ सकती है,जिससे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। अतीत में भी इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर ऊर्जा बाजारों में तेज प्रतिक्रिया देखने को मिली है।

फिलहाल अमेरिकी सेना का दावा और ईरानी ठिकानों पर की गई कार्रवाई इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में हालात अभी सामान्य नहीं हैं। आने वाले दिनों में दोनों देशों की ओर से उठाए जाने वाले कदम यह तय करेंगे कि यह तनाव सीमित स्तर पर रहता है या फिर किसी बड़े टकराव की दिशा में आगे बढ़ता है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंता इस बात को लेकर भी है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका प्रभाव केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ सकता है।

ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य में हुई यह ताजा घटना केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं,बल्कि वैश्विक रणनीतिक समीकरणों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गई है,जिसके दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं।