चेन्नई,23 मार्च (युआईटीवी)- तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज हो गई हैं और इसी कड़ी में पीयूष गोयल का चेन्नई दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के तमिलनाडु चुनाव प्रभारी के रूप में गोयल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर लंबे समय से लंबित सीट बँटवारे के मुद्दे को अंतिम रूप देने के लिए अहम बैठकों में शामिल हो रहे हैं। यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है,जब चुनाव कार्यक्रम नजदीक है और गठबंधन के लिए जल्द-से-जल्द स्पष्ट रणनीति तय करना जरूरी हो गया है।
यह घटनाक्रम हाल ही में नई दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद सामने आया है, जिसमें एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ विस्तृत चर्चा की थी। उस बैठक में कई ऐसे विवादित मुद्दों पर सहमति बनी,जिनकी वजह से पिछले कुछ समय से गठबंधन की बातचीत में गतिरोध बना हुआ था। सूत्रों के अनुसार,उस स्तर पर अधिकांश बड़े मतभेद दूर कर लिए गए थे,जिससे अब अंतिम सहमति की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
चेन्नई में हो रही ताजा बैठकों का मुख्य उद्देश्य शेष बचे मतभेदों को सुलझाना है,खासकर उन संवेदनशील सीटों पर जहाँ गठबंधन के विभिन्न सहयोगी दलों ने अपने-अपने दावे पेश किए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीट बँटवारे का यह अंतिम चरण गठबंधन की मजबूती और चुनावी संभावनाओं को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। इसलिए सभी दल एक संतुलित और स्वीकार्य फॉर्मूला निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
एनडीए के प्रमुख घटकों में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम की भूमिका अहम है,जो इस गठबंधन का प्रमुख क्षेत्रीय चेहरा है। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी, पट्टाली मक्कल काची और अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम जैसे दल भी इस गठबंधन का हिस्सा हैं। इन सभी दलों के बीच सीटों के बँटवारे को लेकर पिछले कुछ हफ्तों से गहन बातचीत चल रही थी।
भाजपा के तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने पुष्टि की है कि पीयूष गोयल इस प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए सभी प्रमुख सहयोगियों के साथ बैठक करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि गोयल का यह दौरा बेहद संक्षिप्त लेकिन निर्णायक होगा और इसी दिन सीट बंटवारे के समझौते को औपचारिक रूप देने की दिशा में ठोस प्रगति की उम्मीद है।
सूत्रों के मुताबिक,सीटों के वितरण को लेकर अधिकांश कठिन वार्ताएँ पहले ही पूरी हो चुकी हैं और अब केवल कुछ सीटों पर अंतिम सहमति बननी बाकी है। संभावित फार्मूले के अनुसार भाजपा लगभग 28 से 29 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। वहीं पीएमके को 16 से 18 सीटें और एएमएमके को लगभग 10 सीटें मिलने की संभावना है। इसके अलावा छोटे सहयोगी दलों को उनके क्षेत्रीय प्रभाव और संगठनात्मक क्षमता के आधार पर एक से तीन सीटें दी जा सकती हैं।
रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्रों पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। चेन्नई जैसे शहरी केंद्रों में भाजपा अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी टी नगर और वेलाचेरी के बीच विकल्पों पर विचार कर रही है,जबकि मायलापुर में भी उसकी रुचि बनी हुई है। ये सभी क्षेत्र राजनीतिक रूप से संवेदनशील और प्रभावशाली माने जाते हैं,जहाँ जीत का असर पूरे राज्य की राजनीति पर पड़ सकता है।
इसी तरह,कोयंबटूर में भाजपा पिछले चुनाव की तुलना में अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रही है। वहीं कन्याकुमारी में गठबंधन एक महत्वपूर्ण सीट को बरकरार रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। इन क्षेत्रों में सीट बँटवारे का फैसला चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है,इसलिए इन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि तमिलनाडु जैसे राज्य में,जहाँ क्षेत्रीय दलों का वर्चस्व रहा है,वहाँ एनडीए के लिए मजबूत और एकजुट रणनीति बनाना बेहद जरूरी है। सीट बँटवारे में संतुलन बनाकर ही गठबंधन अपनी चुनावी संभावनाओं को बेहतर बना सकता है। यदि सभी सहयोगी दल संतुष्ट रहते हैं,तो इसका सीधा फायदा चुनावी प्रदर्शन में देखने को मिल सकता है।
अब जबकि अधिकांश मतभेद सुलझ चुके हैं,सोमवार की यह बैठक एनडीए के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। माना जा रहा है कि इसी बैठक के बाद सीट बँटवारे की औपचारिक घोषणा की जा सकती है,जिससे चुनावी अभियान को नई गति मिलेगी। सभी दल अपने-अपने उम्मीदवारों के चयन और प्रचार रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए तैयार हैं।
पीयूष गोयल का यह दौरा केवल एक औपचारिक बैठक नहीं,बल्कि तमिलनाडु में एनडीए की चुनावी रणनीति का अंतिम खाका तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि गठबंधन किस तरह की रणनीति के साथ चुनावी मैदान में उतरता है और इसका राज्य की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
