नई दिल्ली,9 जून (युआईटीवी)- देशभर में जनजातीय समाज के महानायक और स्वतंत्रता संग्राम के अमर योद्धा भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष,बलिदान और जनजातीय समाज के उत्थान के लिए किए गए उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया। नेताओं ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन साहस,स्वाभिमान,सामाजिक न्याय और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है,जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने जल,जंगल और जमीन की रक्षा के लिए विदेशी शासन के खिलाफ अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का पूरा जीवन जनजातीय समाज के स्वाभिमान,संस्कृति और अधिकारों की रक्षा को समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि मातृभूमि के लिए उनके द्वारा किया गया सर्वोच्च त्याग और संघर्ष देश की हर पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति का संचार करता रहेगा।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में भगवान बिरसा मुंडा को “धरती आबा” के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि उनका योगदान केवल जनजातीय समाज तक सीमित नहीं है,बल्कि उन्होंने पूरे देश को अन्याय और शोषण के खिलाफ संघर्ष करने की प्रेरणा दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जीवनगाथा भारतीय इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय है,जिसे हमेशा स्मरण किया जाएगा।
भगवान बिरसा मुंडा को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन महान नायकों में गिना जाता है,जिन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ आदिवासी समाज को संगठित कर एक बड़े जनआंदोलन का नेतृत्व किया। उन्होंने सामाजिक,सांस्कृतिक और आर्थिक शोषण के खिलाफ आवाज उठाई और अपने समुदाय को आत्मसम्मान और अधिकारों के लिए संघर्ष करने का संदेश दिया। उनके नेतृत्व में चला आंदोलन केवल राजनीतिक विद्रोह नहीं था,बल्कि वह सामाजिक चेतना और जनजागरण का भी प्रतीक था।
धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए विदेशी हुकूमत के विरुद्ध अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया। उनका पूरा जीवन जनजातीय समाज के स्वाभिमान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा को समर्पित रहा। मातृभूमि के लिए सर्वस्व… pic.twitter.com/C4y15CKfjM
— Narendra Modi (@narendramodi) June 9, 2026
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन साहस,आत्म-सम्मान और न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने अपने ऐतिहासिक “उलगुलान” आंदोलन के माध्यम से दमन और अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध की ऐसी भावना जगाई,जिसने हजारों लोगों को अपने अधिकारों और सम्मान के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी।
उपराष्ट्रपति ने अपने संदेश में यह भी कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की स्मृतियों से उनका व्यक्तिगत जुड़ाव रहा है। उन्होंने बताया कि झारखंड के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल के पहले दिन और बाद में उपराष्ट्रपति बनने के पश्चात उन्हें भगवान बिरसा मुंडा के पवित्र जन्मस्थान उलिहातू जाकर श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने इसे अपने जीवन का गौरवपूर्ण क्षण बताया।
सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा के आदर्श आज भी सामाजिक न्याय,सशक्तिकरण और समावेशी विकास की दिशा में देश का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनकी विरासत आने वाले समय में भी देश के युवाओं और समाज को प्रेरित करती रहेगी।
इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय अस्मिता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के अमर प्रतीक हैं। नितिन नवीन ने कहा कि अंग्रेजी शासन के खिलाफ उनका संघर्ष और आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए चलाया गया आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।
उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने अपने साहस और नेतृत्व के बल पर समाज में जनजागरण का ऐसा अभियान चलाया,जिसने लोगों को अन्याय के खिलाफ खड़े होने की शक्ति प्रदान की। उनके संघर्ष ने यह संदेश दिया कि किसी भी समाज की पहचान उसकी संस्कृति,परंपराओं और अधिकारों की रक्षा में निहित होती है।
नितिन नवीन ने आगे कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन आज भी देशवासियों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने अपने अल्प जीवन में जो आदर्श स्थापित किए,वे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे।
भगवान बिरसा मुंडा का जन्म झारखंड के उलिहातू गाँव में हुआ था। बहुत कम उम्र में उन्होंने समाज में व्याप्त शोषण और अन्याय को देखा और उसके खिलाफ संघर्ष का रास्ता चुना। उन्होंने आदिवासी समाज को संगठित किया और अंग्रेजी शासन तथा शोषणकारी व्यवस्थाओं के खिलाफ एक व्यापक आंदोलन का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व में चला “उलगुलान” आंदोलन भारतीय इतिहास में जनजातीय प्रतिरोध के सबसे महत्वपूर्ण आंदोलनों में से एक माना जाता है।
इतिहासकारों के अनुसार,भगवान बिरसा मुंडा ने न केवल राजनीतिक स्वतंत्रता की बात की,बल्कि सामाजिक सुधार, सांस्कृतिक संरक्षण और आर्थिक अधिकारों पर भी जोर दिया। उन्होंने अपने समुदाय को आत्मनिर्भर बनने और अपनी पहचान बनाए रखने का संदेश दिया। यही कारण है कि आज भी उन्हें जनजातीय समाज में अत्यंत सम्मान और श्रद्धा के साथ याद किया जाता है।
देश में हर वर्ष उनका बलिदान दिवस और जयंती बड़े सम्मान के साथ मनाई जाती है। विभिन्न सरकारी और सामाजिक संस्थाएँ उनके योगदान को याद करते हुए कार्यक्रम आयोजित करती हैं। जनजातीय समाज के लोगों के लिए भगवान बिरसा मुंडा केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं,बल्कि स्वाभिमान,संघर्ष और आत्मगौरव के प्रतीक हैं।
भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान दिवस पर देशभर से आए श्रद्धांजलि संदेश इस बात का प्रमाण हैं कि उनका योगदान आज भी लोगों के हृदय में जीवित है। जल,जंगल और जमीन की रक्षा से लेकर सामाजिक न्याय और अधिकारों की लड़ाई तक,उनके आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं। राष्ट्र उन्हें एक ऐसे महान योद्धा के रूप में याद करता है,जिन्होंने अपने संघर्ष और बलिदान से इतिहास में अमिट छाप छोड़ी और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का एक उज्ज्वल स्रोत बन गए।
