ऑपरेशन सिंदूर

पहलगाम हमले की बरसी पर सेना का सख्त संदेश,ऑपरेशन सिंदूर और महादेव की याद दिलाकर आतंक के खिलाफ एकजुट भारत का संकल्प

नई दिल्ली,21 अप्रैल (युआईटीवी)- जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की पहली बरसी पर भारतीय सेना ने एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ अपने सख्त रुख को दोहराया है। सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावनात्मक और दृढ़ संदेश साझा करते हुए कहा कि जब मानवता की सीमाएँ पार की जाती हैं,तो प्रतिक्रिया भी निर्णायक होती है और न्याय अवश्य मिलता है। सेना के इस बयान ने पूरे देश को उस दर्दनाक घटना की याद दिला दी,जिसने न केवल कश्मीर बल्कि पूरे भारत को झकझोर कर रख दिया था।

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की बैसरन घाटी में हुआ यह आतंकी हमला बेहद भयावह था। उस दिन सैलानियों से भरी इस खूबसूरत घाटी में आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की थी। हमलावरों ने निर्दोष लोगों से उनका नाम और धर्म पूछकर उन्हें निशाना बनाया,जो इस घटना को और भी अमानवीय बना देता है। महिलाओं और बच्चों के सामने हुई इस बर्बरता ने पूरे देश में आक्रोश की लहर दौड़ा दी थी। इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी,जिनमें कई पर्यटक भी शामिल थे,जो सिर्फ प्रकृति का आनंद लेने आए थे।

इस हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को स्पष्ट करते हुए कड़ा जवाब देने का फैसला किया। इसी क्रम में 6 और 7 मई 2025 की रात भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया। इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया। सेना की सटीक और योजनाबद्ध कार्रवाई में कुल नौ ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया गया,जिससे आतंकियों के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा।

इस सैन्य कार्रवाई में भारत ने कई बड़े आतंकवादियों को भी ढेर किया,जिन्हें लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियां तलाश रही थीं। इन आतंकियों के मारे जाने से आतंकी संगठनों की कमर टूट गई और उनके संचालन तंत्र को गहरा नुकसान पहुँचा। सेना की इस कार्रवाई को देशभर में व्यापक समर्थन मिला और इसे न्याय की दिशा में एक निर्णायक कदम माना गया।

हालाँकि,भारत की कार्रवाई यहीं नहीं रुकी। पहलगाम हमले में शामिल आतंकियों को सजा दिलाने के लिए आगे भी प्रयास जारी रहे। 28 जुलाई 2025 को भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन महादेव’ के तहत उन आतंकवादियों को भी मार गिराया,जिन्होंने बैसरन घाटी में निर्दोष लोगों की हत्या की थी। यह ऑपरेशन सेना के लिए एक बड़ी सफलता साबित हुआ और इससे यह संदेश गया कि भारत अपने नागरिकों के खिलाफ हुए अपराधों को कभी नहीं भूलता और दोषियों को किसी भी हाल में सजा दिलाता है।

पहलगाम हमले की बरसी पर सेना का संदेश केवल अतीत की घटनाओं की याद दिलाने के लिए नहीं था,बल्कि यह भविष्य के लिए एक स्पष्ट चेतावनी भी है। सेना ने अपने बयान में कहा कि कुछ सीमाएँ ऐसी होती हैं,जिन्हें कभी पार नहीं करना चाहिए और भारत ऐसी हरकतों को न तो भूलता है और न ही माफ करता है। यह संदेश आतंकवादियों और उनके समर्थकों के लिए साफ संकेत है कि भारत अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।

इस मौके पर देशभर में शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई और लोगों ने उन निर्दोष नागरिकों को याद किया,जिन्होंने इस हमले में अपनी जान गंवाई थी। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने एकजुटता दिखाते हुए आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग दोहराई। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं,बल्कि पूरे देश की साझा लड़ाई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पहलगाम हमले के बाद भारत की प्रतिक्रिया ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी एक मजबूत संदेश दिया है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रहा है और किसी भी उकसावे का जवाब देने में पीछे नहीं हटेगा। साथ ही,यह भी संकेत मिला कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

पहलगाम हमले की पहली बरसी पर भारतीय सेना का संदेश देश की एकजुटता,संकल्प और दृढ़ता का प्रतीक है। यह दिन केवल शोक और स्मरण का नहीं,बल्कि यह संकल्प लेने का भी है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी और निर्दोषों के खून का हिसाब जरूर लिया जाएगा।