वॉशिंगटन,14 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच बड़ा बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए हरसंभव कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को और तेज करेगा,ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले जारी रखेगा और साथ ही कूटनीतिक समाधान की संभावना को भी पूरी तरह बंद नहीं करेगा। ट्रंप का कहना है कि यदि तेहरान समझौते के लिए गंभीरता दिखाता है तो बातचीत का रास्ता अब भी खुला है,लेकिन यदि वह अपने रवैये में बदलाव नहीं लाता तो अमेरिका कठोर सैन्य और आर्थिक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
एक साक्षात्कार के दौरान ट्रंप ने कहा कि हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते की दिशा में प्रगति हुई थी। उनके अनुसार दोनों पक्षों के बीच लगभग सभी प्रमुख मुद्दों पर सहमति बन गई थी,लेकिन अंतिम समय में ईरान पीछे हट गया। ट्रंप ने दावा किया कि समझौते को तोड़ने का फैसला तेहरान ने इसलिए लिया क्योंकि उसे कुछ शर्तें स्वीकार्य नहीं थीं। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका के पास सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान की उन सभी क्षमताओं को समाप्त करने के लिए अभियान चला रहा है,जिनका संबंध होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों से है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना लगातार अभियान चला रही है और उसका उद्देश्य केवल जवाबी कार्रवाई करना नहीं,बल्कि पूरे क्षेत्र में दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ट्रंप ने विश्वास जताया कि अंततः अमेरिका इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में सफल होगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक लाइनों में गिना जाता है। यह मार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचती है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। ट्रंप के बयान को इसी कारण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी घोषणा की कि उनकी सरकार ईरान के खिलाफ फिर से कड़ी आर्थिक नाकेबंदी लागू कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध केवल ईरान को लक्ष्य बनाकर लगाया जाएगा और इसका उद्देश्य तेहरान की आर्थिक गतिविधियों को सीमित करना है। ट्रंप ने कहा कि जो भी देश या कंपनी ईरान के साथ व्यापार करेगी, उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि इस नाकेबंदी का प्रभाव सैन्य कार्रवाई से भी अधिक हो सकता है।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान के साथ व्यापार करने वालों के लिए आर्थिक और रणनीतिक दबाव बढ़ाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य देशों के लिए समुद्री मार्ग खुले रहेंगे,लेकिन ईरान के साथ जुड़े व्यापारिक हितों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। उनके अनुसार आर्थिक प्रतिबंध और सैन्य कार्रवाई का संयुक्त प्रभाव ईरान को अपने रुख पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में एक बार फिर दोहराया कि अमेरिका का सबसे बड़ा उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। उन्होंने कहा कि यह केवल अमेरिका की सुरक्षा का प्रश्न नहीं है,बल्कि पूरे पश्चिमी विश्व और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने या उन्हें तैनात करने की अनुमति नहीं देगा।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियाँ और अंतरिक्ष निगरानी प्रणाली ईरान की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। ट्रंप ने कहा कि आधुनिक निगरानी तकनीकों की मदद से अमेरिका ईरान की परमाणु गतिविधियों से जुड़े हर संभावित ठिकाने की जानकारी रखता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि एक अन्य परमाणु-संबंधी प्रतिष्ठान अमेरिकी निगरानी में है और आवश्यकता पड़ने पर उस पर भी सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना को फिलहाल उस स्थान पर किसी बड़ी गतिविधि के संकेत नहीं मिले हैं,लेकिन यदि भविष्य में वहाँ परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी कोई गतिविधि दिखाई देती है,तो अमेरिका तत्काल कार्रवाई करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि संभावित सैन्य लक्ष्यों की सूची तैयार है और अमेरिका परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ईरान के नेतृत्व पर निशाना साधते हुए ट्रंप ने कहा कि तेहरान के नेता समझौतों का सम्मान नहीं करते। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान बार-बार वार्ता की मेज पर सहमत होता है, लेकिन बाद में अपने वादों से पीछे हट जाता है। ट्रंप ने कहा कि ऐसे व्यवहार के कारण अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का विश्वास कमजोर होता है और क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा पैदा होता है। उन्होंने ईरानी नेतृत्व को कठोर और अविश्वसनीय बताते हुए कहा कि समझौतों का पालन करना किसी भी सफल कूटनीतिक प्रक्रिया की मूल शर्त है।
राष्ट्रपति ने दावा किया कि पिछले एक महीने के दौरान अमेरिकी सैन्य अभियानों ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुँचाया है। उनके अनुसार अमेरिका ने ईरान की नौसैनिक क्षमता को काफी हद तक समाप्त कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी वायुसेना अब पहले जैसी प्रभावी नहीं रह गई है और उसकी अधिकांश क्षमता नष्ट हो चुकी है। ट्रंप ने दावा किया कि बड़ी संख्या में मिसाइल प्रणालियां और ड्रोन भी अमेरिकी हमलों में नष्ट किए जा चुके हैं।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ट्रंप ने इन्हें अमेरिका की सैन्य सफलता का प्रमाण बताते हुए कहा कि इन अभियानों का उद्देश्य युद्ध को लंबा खींचना नहीं,बल्कि संभावित खतरों को पहले ही समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान अपने रवैये में बदलाव नहीं लाता,तो अमेरिका आगे भी इसी प्रकार की कार्रवाई जारी रखेगा।
सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि वह कूटनीति को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि ईरान गंभीरता के साथ बातचीत करना चाहता है और अपने परमाणु कार्यक्रम पर ठोस प्रतिबद्धता दिखाता है,तो अमेरिका समझौते के लिए तैयार रहेगा। ट्रंप ने कहा कि उन्हें अब भी विश्वास है कि एक प्रभावी और व्यापक समझौता संभव है,लेकिन इसके लिए ईरान को अपने वादों का पालन करना होगा।
अपने संबोधन में ट्रंप ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य उपस्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका लंबे समय से इस क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने में बड़ी भूमिका निभाता रहा है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब,संयुक्त अरब अमीरात,कतर,बहरीन और कुवैत जैसे देशों की सुरक्षा में अमेरिकी सेना का महत्वपूर्ण योगदान है। हालाँकि,उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि इन देशों को इस सुरक्षा व्यवस्था की आर्थिक जिम्मेदारी में अधिक योगदान देना चाहिए।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए पहले की तरह मध्य पूर्व के तेल पर निर्भर नहीं है,लेकिन इसके बावजूद वह क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए भारी सैन्य संसाधन खर्च कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका इस सुरक्षा व्यवस्था का नेतृत्व कर रहा है,तो उसके सहयोगी देशों को भी इसका वित्तीय भार साझा करना चाहिए। उनके अनुसार यह व्यवस्था सभी पक्षों के लिए अधिक संतुलित और न्यायसंगत होगी।
अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि ट्रंप के ताजा बयान ऐसे समय में आए हैं,जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि का असर केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति,तेल की कीमतों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ेगा। यही कारण है कि दुनिया की निगाहें अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर टिकी हुई हैं।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि सैन्य कार्रवाई और आर्थिक प्रतिबंधों के साथ कूटनीतिक वार्ता भी जारी रहती है,तो भविष्य में किसी नए समझौते की संभावना बनी रह सकती है। हालाँकि,इसके लिए दोनों पक्षों को अपने रुख में लचीलापन दिखाना होगा। फिलहाल अमेरिका ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह एक ओर सैन्य और आर्थिक दबाव बनाए रखेगा,जबकि दूसरी ओर बातचीत का विकल्प भी खुला रखेगा।
डोनाल्ड ट्रंप के इन बयानों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका की मौजूदा रणनीति दोहरे दृष्टिकोण पर आधारित है। एक ओर वह ईरान पर अधिकतम दबाव बनाकर उसकी सैन्य और परमाणु क्षमताओं को सीमित करना चाहता है,वहीं दूसरी ओर यदि परिस्थितियाँ अनुकूल बनती हैं तो वह वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने के लिए भी तैयार है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान इस रणनीति पर कैसी प्रतिक्रिया देता है और क्या दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक समाधान की कोई नई संभावना उभरती है।
