वाशिंगटन,17 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिका में रूस से डीजल खरीदने और उसके आयात को अनुमति देने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले पर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। अमेरिकी कांग्रेस के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के कुछ सांसदों ने इस नीति को पलटने के उद्देश्य से एक नया विधेयक पेश किया है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य रूस के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कुछ अमेरिकी निवेशों पर रोक लगाना,रूसी ईंधन के कारोबार को अनुमति देने वाले लाइसेंस रद्द करना और भविष्य में ऐसी मंजूरियाँ जारी करने पर प्रतिबंध लगाना है। विधेयक के समर्थकों का तर्क है कि रूस से डीजल खरीदने की अनुमति देने से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है,जिसका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध में किया जा सकता है।
यह विधेयक ऐसे समय में पेश किया गया है,जब रूस के ऊर्जा कारोबार पर अमेरिकी प्रतिबंधों और रूसी तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ संभावित आर्थिक कार्रवाई को लेकर वाशिंगटन में बहस जारी है। एक तरफ ट्रंप प्रशासन के फैसले को ईंधन की आपूर्ति और कीमतों से जुड़े घरेलू दबाव के संदर्भ में देखा जा रहा है,वहीं दूसरी तरफ आलोचकों का कहना है कि रूस से संबंधित लेनदेन को छूट देना अमेरिका की घोषित प्रतिबंध नीति को कमजोर कर सकता है।
शुक्रवार को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति में शीर्ष डेमोक्रेट सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने यह विधेयक पेश किया। इसका नाम ‘प्रोहिबिट करप्ट रशिया ऑयल डील्स एक्ट’ रखा गया है। इस प्रस्ताव को डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों के साथ रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सदस्यों का भी समर्थन मिला है। हालाँकि,इसके अधिकांश समर्थक डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े हैं।
प्रस्तावित विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान रूस के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कुछ अमेरिकी सरकारी निवेशों को रोकना है। इसके तहत अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय विकास वित्त निगम को रूसी ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने से प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस कदम का उद्देश्य अमेरिकी सरकारी वित्तीय संसाधनों को रूस के ऊर्जा कारोबार से दूर रखना है।
इसके अतिरिक्त,विधेयक में अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी परिसंपत्ति नियंत्रण कार्यालय की ओर से जारी उन सामान्य लाइसेंसों को रद्द करने की बात कही गई है, जिनके माध्यम से रूसी ईंधन से जुड़े कुछ लेनदेन की अनुमति दी गई है। यह कार्यालय अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंधों को लागू करने और प्रतिबंधित व्यक्तियों,संस्थाओं तथा आर्थिक गतिविधियों से संबंधित नियमों की निगरानी करने वाली प्रमुख एजेंसी है।
प्रस्ताव में केवल मौजूदा लाइसेंसों को रद्द करने तक सीमित रहने के बजाय भविष्य में ऐसी नई मंजूरियाँ जारी करने पर भी रोक लगाने की बात कही गई है। इसके साथ ही अमेरिकी प्रशासन से रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया गया है।
इस तरह यह विधेयक ट्रंप प्रशासन की मौजूदा नीति के खिलाफ केवल राजनीतिक विरोध दर्ज कराने की कोशिश नहीं है,बल्कि संबंधित फैसलों को कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर बदलने का प्रयास भी है। हालाँकि,इसके प्रावधान अभी प्रस्ताव के स्तर पर हैं और इन्हें लागू करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी तथा आवश्यक विधायी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
विधेयक पेश करते हुए ग्रेगरी मीक्स ने रूसी डीजल से जुड़े लेनदेन को अनुमति देने के फैसले की आलोचना की। उनका कहना है कि रूस को आर्थिक दबाव में रखने की अमेरिकी रणनीति के साथ इस तरह की छूट मेल नहीं खाती। उनके अनुसार,यदि अमेरिका एक ओर रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध बनाए रखने की बात करता है और दूसरी ओर रूसी ईंधन के कारोबार को मंजूरी देता है,तो इससे उसकी नीति की प्रभावशीलता पर सवाल उठेंगे।
मीक्स ने यह भी तर्क दिया कि रूसी डीजल के आयात की अनुमति देने से अमेरिकी उपभोक्ताओं को ईंधन की कीमतों में राहत मिलने की गारंटी नहीं है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन की ईरान संबंधी युद्ध नीति की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिकी नागरिक पहले ही उस नीति की आर्थिक कीमत चुका रहे हैं। उनके मुताबिक,रूसी ईंधन से जुड़े इस फैसले से घरेलू स्तर पर लागत कम होने का स्पष्ट लाभ दिखाई नहीं देता,जबकि रूस को आर्थिक फायदा पहुँचने की आशंका बनी रहती है।
मीक्स का आरोप है कि यूक्रेन पर रूसी हमलों के जारी रहने के दौरान इस प्रकार की मंजूरी देना अमेरिका की ओर से रूस के खिलाफ अपनाए गए रुख को कमजोर कर सकता है। उनके अनुसार,रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बनाए रखना उस व्यापक रणनीति का हिस्सा होना चाहिए,जिसके माध्यम से मॉस्को की युद्ध संबंधी आर्थिक क्षमता को सीमित करने की कोशिश की जा रही है।
हालाँकि,इस मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन की नीति के पीछे ईंधन की आपूर्ति और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों से जुड़े तर्क भी महत्वपूर्ण हैं। डीजल की कीमतें बढ़ने से परिवहन, कृषि और माल ढुलाई जैसे क्षेत्रों की लागत प्रभावित होती है। इसलिए ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार पर दबाव बना रहता है। यही वजह है कि रूस से डीजल के लेनदेन का सवाल केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका संबंध अमेरिकी अर्थव्यवस्था और घरेलू ऊर्जा जरूरतों से भी है।
इस विधेयक को दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के कुछ सांसदों का समर्थन मिलना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन इसके सह-प्रायोजकों में शामिल हैं। उनके अलावा डेमोक्रेटिक पार्टी के अमी बेरा, जिम कोस्टा, स्टेनी होयर और बिल कीटिंग सहित कई अन्य सांसदों ने भी इस पहल का समर्थन किया है।
कैलिफोर्निया का प्रतिनिधित्व करने वाले भारतीय मूल के सांसद अमी बेरा की भागीदारी ने इस बहस में एक जाना-पहचाना नाम जोड़ दिया है। उनकी मौजूदगी यह भी दर्शाती है कि रूस के ऊर्जा कारोबार और उस पर लगाए गए प्रतिबंधों का मुद्दा अमेरिकी कांग्रेस में विभिन्न सांसदों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
हालाँकि,विधेयक को कुछ रिपब्लिकन सांसदों का समर्थन मिलने के बावजूद यह स्पष्ट नहीं है कि इसे कांग्रेस में पर्याप्त समर्थन मिल पाएगा या नहीं। किसी प्रस्ताव का पेश होना और उसका कानून बनना अलग-अलग चरण हैं। इसे संबंधित संसदीय प्रक्रियाओं से गुजरना होगा और आगे की प्रगति कांग्रेस में समर्थन तथा विधायी प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगी।
फिलहाल,इस विधेयक के जरिए इसके समर्थक ट्रंप प्रशासन को यह संदेश देना चाहते हैं कि रूस के ऊर्जा कारोबार को दी जाने वाली छूट अमेरिकी प्रतिबंध नीति के उद्देश्यों के अनुरूप होनी चाहिए। उनके मुताबिक,रूस की आय बढ़ाने वाले किसी भी कदम का मूल्यांकन यूक्रेन युद्ध और अमेरिका की व्यापक विदेश नीति के संदर्भ में किया जाना चाहिए।
रूसी डीजल को लेकर नया विधेयक ऐसे समय सामने आया है,जब अमेरिकी सांसद रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों के खिलाफ संभावित कार्रवाई पर भी चर्चा कर रहे हैं। इसी सप्ताह कई सांसदों ने सवाल उठाया था कि यदि अमेरिका स्वयं रूसी ऊर्जा के आयात या उससे जुड़े लेनदेन को अनुमति देता है,तो रूस की ऊर्जा आय को कम करने के लिए लगाए गए प्रतिबंधों की प्रभावशीलता किस तरह सुनिश्चित की जाएगी।
इससे पहले अमेरिकी सांसद माइकल मैककॉल और जिम कोस्टा के नेतृत्व में दोनों दलों के सदस्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक पत्र लिखकर रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े प्रस्तावित कानून को 18 अक्टूबर की निर्धारित समयसीमा तक पूरी तरह लागू करने की माँग की थी। इस पत्र में विशेष रूप से भारत और चीन का उल्लेख किया गया था। दोनों देशों को रूसी कच्चे तेल के बड़े खरीदारों के रूप में रेखांकित करते हुए सांसदों ने व्यापार और समुद्री परिवहन से जुड़े विश्वसनीय आँकड़ों के आधार पर द्वितीयक शुल्क लगाने की संभावना पर जोर दिया था।
द्वितीयक शुल्क का विचार उन देशों या संस्थाओं पर आर्थिक दबाव बनाने से संबंधित है, जो प्रतिबंधित देश के साथ कारोबार जारी रखते हैं। हालाँकि,ऐसे कदमों का वास्तविक प्रभाव व्यापारिक संबंधों,ऊर्जा बाजार और संबंधित देशों की नीतियों पर निर्भर करता है।
भारत और चीन का संदर्भ इसलिए भी महत्वपूर्ण है,क्योंकि रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिका की नीति का असर अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा व्यापार पर पड़ सकता है। यदि रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क या अन्य प्रतिबंध लगाए जाते हैं,तो इसका प्रभाव तेल की आपूर्ति,कीमतों और व्यापारिक संबंधों पर पड़ने की आशंका रहती है।
लेकिन नया विधेयक एक अलग मुद्दे पर केंद्रित है। इसमें सवाल उठाया गया है कि जब अमेरिकी प्रशासन रूस की ऊर्जा आय को सीमित करने की बात करता है,तो उसे स्वयं रूसी डीजल के लेनदेन को अनुमति देने की जरूरत क्यों पड़ रही है। इसके समर्थकों का मानना है कि प्रतिबंधों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अमेरिका को अपनी नीतियों में एकरूपता रखनी चाहिए।
रूस से डीजल खरीदने की अनुमति को लेकर जारी विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू अमेरिका के भीतर ईंधन की कीमतों से जुड़ा है। डीजल परिवहन व्यवस्था,कृषि गतिविधियों,औद्योगिक उत्पादन और माल की आपूर्ति में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कीमतों में वृद्धि होने पर ट्रक परिवहन, किसानों और विभिन्न कारोबारों की लागत बढ़ सकती है। अंततः इसका असर वस्तुओं की कीमतों और आम उपभोक्ताओं के खर्च पर भी पड़ सकता है।
ऐसी परिस्थितियों में सरकारों के सामने ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों को प्रभावी रखने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होती है। यदि ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए प्रतिबंधों में छूट दी जाती है,तो इससे तत्काल आपूर्ति संबंधी समस्याओं को कम करने की उम्मीद की जा सकती है। दूसरी ओर,ऐसी छूट से प्रतिबंधित देश को आर्थिक लाभ मिलने की आशंका भी बनी रहती है।
ट्रंप प्रशासन की रूसी डीजल नीति पर उठ रहे सवाल इसी चुनौती को सामने लाते हैं। विधेयक के समर्थकों का कहना है कि घरेलू ईंधन संबंधी जरूरतों का समाधान इस तरह किया जाना चाहिए,जिससे रूस को युद्ध के लिए अतिरिक्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराने का जोखिम न बढ़े। वहीं,इस मुद्दे पर अंतिम नीति तय करते समय ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों और अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभाव को भी ध्यान में रखना होगा।
‘प्रोहिबिट करप्ट रशिया ऑयल डील्स एक्ट’ अभी प्रस्तावित कानून है। इसे लागू करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस में आवश्यक मंजूरी हासिल करनी होगी और निर्धारित विधायी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। केवल विधेयक पेश होने से मौजूदा लाइसेंस अपने आप रद्द नहीं हो जाते और न ही ट्रंप प्रशासन की नीति तत्काल बदल जाती है।
यदि यह प्रस्ताव कानून बनता है,तो रूसी ऊर्जा क्षेत्र में कुछ अमेरिकी सरकारी निवेशों पर रोक लगाने,संबंधित सामान्य लाइसेंस रद्द करने और भविष्य में ऐसी मंजूरियों को सीमित करने के लिए कानूनी आधार तैयार हो सकता है। इसके साथ रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की माँग को भी संस्थागत समर्थन मिलेगा।
फिलहाल,यह विधेयक अमेरिका में रूस के खिलाफ प्रतिबंधों की रणनीति और घरेलू ऊर्जा जरूरतों के बीच चल रही बहस का नया अध्याय है। एक ओर इसके समर्थक रूस की युद्ध संबंधी आर्थिक क्षमता को सीमित रखने पर जोर दे रहे हैं,वहीं दूसरी ओर डीजल की कीमतों और आपूर्ति का सवाल अमेरिकी घरेलू राजनीति में महत्वपूर्ण बना हुआ है। आने वाले दिनों में कांग्रेस में इस प्रस्ताव को मिलने वाला समर्थन यह तय करने में अहम होगा कि ट्रंप प्रशासन की रूसी डीजल नीति को कानूनी चुनौती कितनी आगे तक ले जाया जा सकती है।
