डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

ट्रंप का दावा- ईरान की सैन्य ताकत बुरी तरह कमजोर,परमाणु हथियार बनाने नहीं देंगे अमेरिका

वॉशिंगटन,27 जून (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ अपने सख्त रुख को दोहराते हुए कहा है कि हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुँचा है और अब तेहरान पहले जैसी स्थिति में नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की नौसेना,वायु सेना, वायु रक्षा प्रणाली,रडार नेटवर्क और हथियार निर्माण क्षमता को भारी नुकसान पहुँचा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अब अमेरिका के साथ समझौता करने के लिए उत्सुक है और बातचीत के लिए लगातार संकेत दे रहा है।

ट्रंप ने यह बयान ‘फेथ एंड फ्रीडम कोएलिशन’ के ‘रोड टू मेजॉरिटी’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए दिया। अपने भाषण में उन्होंने ईरान के खिलाफ अपनाई गई अमेरिकी नीति का जोरदार बचाव किया और कहा कि पिछले सप्ताह उठाए गए कदम अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता के लिए बेहद आवश्यक थे। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ऐसा काम किया है,जिसे पहले कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति पूरा नहीं कर पाया था।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि अमेरिका ने एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं,जिसका सबसे बड़ा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित न कर सके। उन्होंने कहा कि यह केवल अमेरिका की सुरक्षा का सवाल नहीं है,बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा से जुड़ा हुआ मुद्दा है। उनके अनुसार यदि ईरान जैसे देश के हाथों में परमाणु हथियार पहुँचते हैं,तो वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

अपने दावों को और मजबूत करते हुए ट्रंप ने कहा कि हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की सैन्य संरचना को व्यापक नुकसान पहुँचा है। उन्होंने कहा कि आज ईरान के पास प्रभावी नौसेना नहीं बची है,उसकी वायु सेना भी पहले जैसी क्षमता में नहीं रही। इसके अलावा उसकी वायु रक्षा प्रणाली, रडार नेटवर्क और हथियार निर्माण क्षमता भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका की कार्रवाई ने ईरान की सैन्य ताकत को इस हद तक कमजोर कर दिया है कि वह पहले की तरह सैन्य चुनौती पेश करने की स्थिति में नहीं है।

ट्रंप ने अपने भाषण में ईरान की ड्रोन और मिसाइल क्षमता को लेकर भी कई बड़े दावे किए। उन्होंने कहा कि ईरान की ड्रोन क्षमता में लगभग 82 प्रतिशत की कमी आई है। इसी तरह उसकी मिसाइल क्षमता में लगभग 80 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है,जबकि रॉकेट लॉन्चिंग प्रणाली को लगभग 90 प्रतिशत तक नुकसान पहुँचाया गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना था,ताकि भविष्य में ईरान की आक्रामक क्षमता को सीमित किया जा सके।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि ईरान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को भी गंभीर नुकसान पहुँचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व को लगातार झटके लगे हैं और अब वहाँ नेतृत्व सँभालने को लेकर भी अनिश्चितता का माहौल है। ट्रंप ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कोई भी व्यक्ति ईरान का नेतृत्व सँभालने के लिए आगे नहीं आना चाहता। हालाँकि,उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में कोई अतिरिक्त जानकारी या आधिकारिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।

अपने संबोधन में ट्रंप ने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में ईरान अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है। उनके अनुसार तेहरान लगातार बातचीत के संकेत दे रहा है और कई प्रस्ताव भी सामने रख रहा है। ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौते के लिए बेहद उत्सुक दिखाई दे रहा है और अमेरिका को कई तरह की पेशकश कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि ईरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं का समाधान करता है,तो भविष्य में बातचीत के रास्ते खुले रह सकते हैं।

ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया कि अमेरिका की सबसे बड़ी प्राथमिकता ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। उन्होंने कहा कि यदि किसी अस्थिर या आक्रामक देश के पास परमाणु हथियार पहुँच जाते हैं,तो उसके परिणाम पूरी दुनिया के लिए बेहद खतरनाक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर संकट आ सकता है और इसलिए अमेरिका इस मुद्दे पर किसी भी तरह का जोखिम लेने के लिए तैयार नहीं है।

अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने ईरानी सैन्य अधिकारी कासिम सुलेमानी के खिलाफ की गई कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि वह अमेरिकी सैनिकों पर हुए कई हमलों के लिए जिम्मेदार थे। ट्रंप ने आरोप लगाया कि सड़क किनारे लगाए जाने वाले विस्फोटक उपकरणों के जरिए अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाया गया था,जिससे कई सैनिक मारे गए और बड़ी संख्या में घायल होकर स्थायी रूप से विकलांग हो गए। उन्होंने कहा कि उसी पृष्ठभूमि में अमेरिका ने उस समय निर्णायक कार्रवाई की थी।

हालाँकि,ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि ईरान की सैन्य क्षमता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि तेहरान अब भी सीमित स्तर पर हमले करने की क्षमता रखता है। इसी संदर्भ में उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास हुई एक हालिया घटना का उल्लेख किया। ट्रंप ने दावा किया कि एक बड़े जहाज पर ईरान की ओर से ड्रोन हमला किया गया था। उनके अनुसार इस हमले में चार ड्रोन का इस्तेमाल किया गया,जिनमें से तीन को अमेरिकी बलों ने मार गिराया,जबकि एक ड्रोन जहाज से टकरा गया,जिससे उसे नुकसान पहुँचा।

राष्ट्रपति ने कहा कि इस तरह की घटनाएँ यह दिखाती हैं कि ईरान अभी भी क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसी किसी भी कार्रवाई को स्वीकार नहीं करेगा और अपने सहयोगियों तथा अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है और वहाँ किसी भी तरह की अस्थिरता का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

अपने संबोधन के अंत में ट्रंप ने अमेरिका की सैन्य शक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका के पास दुनिया की सबसे मजबूत और आधुनिक सेना है। उन्होंने कहा कि जब भी अमेरिकी हितों,नागरिकों या सहयोगी देशों की सुरक्षा पर खतरा पैदा होगा, तब अमेरिका अपनी सैन्य शक्ति का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य केवल संघर्ष करना नहीं है,बल्कि शांति बनाए रखना और उन ताकतों को रोकना है जो वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं।

ट्रंप के इन बयानों ने एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को अंतर्राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। जहाँ अमेरिका ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर होने और परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण का दावा कर रहा है,वहीं क्षेत्रीय हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयास,सुरक्षा संबंधी घटनाक्रम और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की भूमिका पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।