ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (तस्वीर क्रेडिट@SavalRohit)

अमेरिकी तेल प्रतिबंधों पर भड़का ईरान,समझौते के उल्लंघन का लगाया आरोप,होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ा तनाव

तेहरान,8 जुलाई (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। ईरान ने बुधवार को संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरानी तेल की बिक्री पर दी गई अस्थायी राहत वापस लेने के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे दोनों देशों के बीच हुए समझौते का गंभीर उल्लंघन बताया है। तेहरान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह कदम 18 जून को हस्ताक्षरित इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के अनुच्छेद 10 के विपरीत है और इसके परिणामों के लिए पूरी तरह अमेरिका जिम्मेदार होगा। इस घटनाक्रम ने पहले से ही तनावपूर्ण अमेरिका-ईरान संबंधों को और अधिक जटिल बना दिया है। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ती गतिविधियों ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताओं को भी बढ़ा दिया है।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए अमेरिकी वित्त विभाग के उस फैसले की कड़ी निंदा की,जिसके तहत ईरानी तेल की बिक्री पर लागू प्रतिबंधों में दी गई अस्थायी छूट समाप्त कर दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि यह निर्णय न केवल दोनों देशों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन है,बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि अमेरिका अपने वादों पर कायम रहने के बजाय लगातार समझौतों से पीछे हटने की नीति अपना रहा है।

ईरानी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान अमेरिका द्वारा उठाए गए इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा करता है। मंत्रालय के अनुसार, युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से किए गए समझौता ज्ञापन में स्पष्ट प्रावधान थे,जिनके तहत दोनों पक्षों को अपने-अपने दायित्वों का पालन करना था। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने समझौते के अनुच्छेद 10 का उल्लंघन करते हुए प्रतिबंधों में दी गई राहत वापस ले ली और इससे पूरे समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

तेहरान ने यह भी कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर होने के केवल 20 दिनों के भीतर ऐसा निर्णय लिया जाना इस बात का प्रमाण है कि वाशिंगटन की नीतियों में स्थिरता का अभाव है। ईरान के अनुसार,यह फैसला अमेरिका की दुर्भावनापूर्ण मंशा,अविश्वसनीयता और अस्थिर नीति को दर्शाता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस प्रकार के कदम अंतर्राष्ट्रीय समझौतों में विश्वास को कमजोर करते हैं और भविष्य में किसी भी कूटनीतिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

अपने बयान में ईरान ने अमेरिका पर केवल तेल प्रतिबंधों के मामले में ही नहीं,बल्कि समझौते के अन्य प्रावधानों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया। मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरीकों से समझौते की भावना के विरुद्ध कार्य किया है। ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि लेबनान के खिलाफ जियोनिस्ट शासन की कार्रवाइयों को समर्थन देकर भी अमेरिका ने क्षेत्रीय तनाव को बढ़ावा दिया है और समझौते के उद्देश्य को कमजोर किया है।

ईरानी विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के बाद से उसने पूरी ईमानदारी और सद्भावना के साथ अपनी सभी जिम्मेदारियों का पालन किया। मंत्रालय ने कहा कि ईरान ने अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए उपलब्ध सभी संसाधनों और क्षमताओं का उपयोग किया तथा हर स्तर पर समझौते की भावना का सम्मान किया। इसके विपरीत अमेरिका ने बार-बार अपने दायित्वों का उल्लंघन किया और विभिन्न बहानों के माध्यम से उन्हें उचित ठहराने की कोशिश की।

ईरान ने अपने बयान में अमेरिका को कड़ी चेतावनी भी दी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यदि अमेरिका इसी प्रकार समझौते का उल्लंघन करता रहा,तो ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि देश अपनी संप्रभुता और आर्थिक हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा और आवश्यक होने पर उचित जवाबी कदम उठाएगा।

दूसरी ओर अमेरिका ने अपनी कार्रवाई को उचित ठहराते हुए कहा है कि उसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया मंच पर जारी एक बयान में कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की गई है। कमांड का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में नागरिक जहाजों को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है और इसके लिए जिम्मेदार पक्ष को इसकी कीमत चुकानी होगी।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार हाल के दिनों में होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हमले किए गए थे। अमेरिका का आरोप है कि इन घटनाओं के पीछे ईरान की भूमिका रही है। इसी आधार पर अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया। कमांड ने कहा कि यह कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की बड़ी मात्रा इसी मार्ग से होकर गुजरती है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता,बल्कि इसका असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर पड़ता है। यही कारण है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर वैश्विक समुदाय की लगातार नजर बनी हुई है।

इस बीच चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने ईरानी सरकारी मीडिया के हवाले से बताया कि ईरान के किश्म द्वीप तथा बंदर अब्बास और सिरिक के आसपास विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। हालाँकि,इन विस्फोटों के कारणों और नुकसान के संबंध में तत्काल कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियाँ पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और संबंधित क्षेत्रों में स्थिति का आकलन किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों की बहाली और सैन्य कार्रवाई का संयुक्त प्रभाव आने वाले दिनों में क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है। आर्थिक प्रतिबंधों के कारण ईरान के तेल निर्यात पर दबाव बढ़ेगा,जबकि सैन्य गतिविधियों के चलते समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएँ पैदा हो सकती हैं। अंतर्राष्ट्रीय बाजार पहले से ही इस घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

कूटनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद की प्रक्रिया फिर से शुरू नहीं होती है,तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। पिछले महीने हुए युद्धविराम और समझौता ज्ञापन से यह उम्मीद जगी थी कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा,लेकिन हाल की घटनाओं ने उन उम्मीदों को कमजोर कर दिया है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने समझौते की भावना के विपरीत कदम उठाया है,जबकि अमेरिका अपनी कार्रवाई को अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बता रहा है।

मध्य पूर्व पहले से ही कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में दोनों देश कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ते हैं या फिर तनाव और अधिक गहराता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि तेल प्रतिबंधों की बहाली,सैन्य कार्रवाई और दोनों देशों के तीखे बयानों ने इस विवाद को एक नए और अधिक संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है।