130 दिन बाद सुपुर्द-ए-खाक होंगे अयातुल्लाह अली खामेनेई (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

130 दिन बाद सुपुर्द-ए-खाक होंगे अयातुल्लाह अली खामेनेई,अंतिम विदाई समारोह में बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और एमओएस पबित्रा करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व

नई दिल्ली,30 जून (युआईटीवी)- ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को उनकी मृत्यु के लगभग 130 दिन बाद अंतिम विदाई दी जाएगी। ईरान सरकार ने उनके अंतिम संस्कार और दफन से जुड़े विस्तृत कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार,अंतिम संस्कार की रस्में 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई तक विभिन्न शहरों में आयोजित की जाएँगी। इस दौरान राजधानी तेहरान,धार्मिक शहर कोम और पवित्र शहर मशहद में कई राजकीय और धार्मिक कार्यक्रम होंगे। भारत भी इन समारोहों में आधिकारिक रूप से हिस्सा लेगा। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा शामिल होंगे। यह जानकारी ईरानी सूत्रों के हवाले से सामने आई है।

सूत्रों के अनुसार,ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अंतिम संस्कार और दफन समारोह में शामिल होने के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजा था। हालाँकि,भारत की ओर से प्रधानमंत्री की यात्रा की पुष्टि नहीं हुई। इसके बजाय भारत ने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया है,जो अंतिम संस्कार में देश का प्रतिनिधित्व करेगा। इसे भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक संबंधों और पारस्परिक सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है।

ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार,अयातुल्लाह अली खामेनेई का पार्थिव शरीर 4 और 5 जुलाई को तेहरान मोसल्ला में आम लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद 7 जुलाई को कोम में विशेष धार्मिक समारोह आयोजित किया जाएगा। अंततः 9 जुलाई को उन्हें मशहद में आठवें शिया इमाम इमाम रज़ा की दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। दफन के बाद मशहद में भी कई श्रद्धांजलि सभाएँ और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे।

ईरान के अधिकारियों के अनुसार,इतनी लंबी अवधि के बाद अंतिम संस्कार आयोजित करने का निर्णय असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया। सामान्य इस्लामी परंपरा में किसी व्यक्ति को मृत्यु के बाद जल्द से जल्द दफनाया जाता है,लेकिन युद्ध जैसी परिस्थितियों में अपवाद संभव होते हैं। ईरान ने भी सुरक्षा और युद्धकालीन हालात को ध्यान में रखते हुए अंतिम संस्कार को स्थगित किया था।

रिपोर्टों के मुताबिक,28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए संयुक्त हवाई हमलों में अयातुल्लाह अली खामेनेई और उनके परिवार के कुछ सदस्यों की मृत्यु हो गई थी। इस घटना ने पूरे पश्चिम एशिया की राजनीति को प्रभावित किया और क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया। खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरान में लंबे समय तक राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया और सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ा दिया गया था।

अयातुल्लाह अली खामेनेई ने वर्ष 1989 में ईरान के संस्थापक नेता अयातुल्लाह रूहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद सुप्रीम लीडर का पद सँभाला था। लगभग 36 वर्षों तक इस पद पर रहते हुए उन्होंने ईरान की विदेश नीति,रक्षा नीति और धार्मिक-राजनीतिक व्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाला। उनके नेतृत्व में ईरान ने क्षेत्रीय राजनीति में अपनी मजबूत भूमिका बनाई और रिवोल्यूशनरी गार्ड सहित कई प्रमुख संस्थानों को और अधिक प्रभावशाली बनाया। इसी दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम,पश्चिमी देशों के साथ संबंधों और पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों में भी उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।

इससे पहले अयातुल्लाह रूहोल्लाह खुमैनी ने 1979 की इस्लामी क्रांति का नेतृत्व किया था। इस क्रांति के परिणामस्वरूप शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी की राजशाही समाप्त हुई और ईरान में इस्लामिक गणराज्य की स्थापना हुई। खुमैनी को इस क्रांति का वैचारिक और राजनीतिक मार्गदर्शक माना जाता है,जबकि उनके बाद अयातुल्लाह अली खामेनेई ने देश की राजनीतिक संरचना को मजबूत करने और सर्वोच्च नेतृत्व की संस्था को और अधिक प्रभावशाली बनाने का कार्य किया।

इस बीच अयातुल्लाह अली खामेनेई के पुत्र मोजतबा खामेनेई को लेकर भी पिछले कुछ महीनों में कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं। हालाँकि,उनकी सार्वजनिक गतिविधियों और राजनीतिक भूमिका को लेकर विभिन्न दावे सामने आए हैं,लेकिन कई विषयों पर आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन अटकलों पर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जा रहा।

विश्लेषकों का मानना है कि अयातुल्लाह अली खामेनेई का अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर होगा। दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधियों के इस कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है। ऐसे समय में भारत की ओर से उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा जाना यह दर्शाता है कि नई दिल्ली पश्चिम एशिया के प्रमुख देशों के साथ अपने संतुलित और व्यावहारिक संबंधों को बनाए रखना चाहती है।

ईरान में अंतिम संस्कार की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। तेहरान,कोम और मशहद में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने विशेष यातायात व्यवस्था,सुरक्षा घेरा और चिकित्सा सुविधाओं की भी व्यवस्था की है। आने वाले दिनों में दुनिया की नजरें ईरान पर रहेंगी,जहाँ छह दिनों तक चलने वाले इन समारोहों के साथ एक लंबे राजनीतिक और धार्मिक युग का औपचारिक समापन होगा।