युद्धविराम के 24 घंटे के भीतर फिर भड़की हिंसा,दक्षिण लेबनान में इजरायली हमले में पाँच की मौत (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

युद्धविराम के 24 घंटे के भीतर फिर भड़की हिंसा,दक्षिण लेबनान में इजरायली हमले में पाँच की मौत

बेरूत,20 जून (युआईटीवी)- लेबनान और इजरायल के बीच हाल ही में हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद क्षेत्र में तनाव कम होता नजर नहीं आ रहा है। युद्धविराम लागू होने के महज 24 घंटे के भीतर दक्षिण लेबनान में हुए इजरायली हवाई हमले ने एक बार फिर पूरे इलाके को अस्थिरता के दौर में धकेल दिया है। ताजा हमले में कम से कम पाँच लोगों की मौत हो गई,जबकि कई अन्य लोगों के घायल होने की खबर है। इस घटना ने युद्धविराम की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और क्षेत्र में एक बार फिर व्यापक संघर्ष की आशंकाओं को बढ़ा दिया है।

लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के अनुसार,दक्षिणी लेबनानी शहर सज्द के निकट स्थित जबल अल-रफी क्षेत्र को इजरायली लड़ाकू विमानों ने निशाना बनाया। यह हमला ऐसे समय में हुआ,जब एक दिन पहले ही दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम लागू हुआ था और उम्मीद की जा रही थी कि लंबे समय से जारी संघर्ष में कुछ राहत मिलेगी। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक हमले की तीव्रता काफी अधिक थी,जिसके कारण क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ और कई नागरिक प्रभावित हुए।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार,युद्धविराम शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार शाम चार बजे से प्रभावी हुआ था। हालाँकि,इसके लागू होने के कुछ ही घंटों बाद तनाव फिर बढ़ने लगा। दक्षिण लेबनान के कई इलाकों में सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आईं और फिर जबल अल-रफी क्षेत्र पर हुए हवाई हमले ने हालात को और गंभीर बना दिया।

इस घटनाक्रम के बीच हिज्बुल्लाह के महासचिव नईम कासिम ने एक तीखा बयान जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि संगठन या लेबनान पर हमला किया जाता है,तो हिज्बुल्लाह हथियारों के बल पर उसका जवाब देगा। उन्होंने कहा कि संगठन को डराने या कमजोर करने की कोशिशें पहले भी विफल रही हैं और भविष्य में भी सफल नहीं होंगी। कासिम ने अपने संबोधन में कहा कि मौत की धमकियाँ और सैन्य दबाव उनके कार्यकर्ताओं और समर्थकों का मनोबल नहीं तोड़ सकते।

अल-मनार टेलीविजन चैनल पर प्रसारित अपने भाषण में कासिम ने कहा कि हिज्बुल्लाह को समाप्त करने और क्षेत्र में स्थायी कब्जा स्थापित करने की जो योजना बनाई गई थी,वह असफल हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि इजरायल को अंततः लेबनान की भूमि के अंतिम हिस्से से भी पीछे हटना पड़ेगा। उनके इस बयान को संगठन के समर्थकों के बीच दृढ़ता और प्रतिरोध के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

हिज्बुल्लाह प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि लेबनान वर्तमान समय में अपने इतिहास के सबसे संवेदनशील और खतरनाक दौर से गुजर रहा है। उनके अनुसार देश एक व्यापक अमेरिकी-इजरायली अभियान का सामना कर रहा है,जिसका उद्देश्य केवल सैन्य दबाव बनाना नहीं,बल्कि लेबनान के भविष्य और उसकी राजनीतिक व्यवस्था को प्रभावित करना भी है। कासिम ने दावा किया कि बाहरी शक्तियाँ लेबनान की राजनीतिक संरचना को कमजोर करने और आंतरिक अस्थिरता पैदा करने का प्रयास कर रही हैं।

उन्होंने पुनर्निर्माण के मुद्दे को भी उठाया और कहा कि संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों में विकास और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को बाधित किया जा रहा है। उनके अनुसार युद्ध के कारण तबाह हुए क्षेत्रों को दोबारा खड़ा करने में कई तरह की राजनीतिक और आर्थिक रुकावटें डाली जा रही हैं,जिससे आम नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

अपने संबोधन में कासिम ने यह भी दोहराया कि हिज्बुल्लाह के हथियारों का उद्देश्य केवल इजरायल के खिलाफ प्रतिरोध है। उन्होंने कहा कि संगठन किसी आंतरिक संघर्ष में शामिल नहीं होना चाहता और उसकी सैन्य क्षमता केवल लेबनान की सुरक्षा और क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए है। उन्होंने इजरायल से अपील की कि वह लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करे तथा युद्धविराम की शर्तों का पालन करे।

उधर हिज्बुल्लाह के संसदीय गुट “लॉयल्टी टू द रेजिस्टेंस” के सदस्य इब्राहिम अल-मूसावी ने भी युद्धविराम को लेकर संगठन का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यदि इजरायल समझौते की शर्तों का सम्मान करता है,तो हिज्बुल्लाह भी युद्धविराम का पालन करता रहेगा। उनके बयान से संकेत मिलता है कि संगठन फिलहाल संघर्ष को और बढ़ाने के बजाय समझौते को बनाए रखने के पक्ष में है,लेकिन किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब देने के लिए तैयार भी है।

क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि युद्धविराम के तुरंत बाद हुआ यह हमला दोनों पक्षों के बीच अविश्वास को और गहरा कर सकता है। लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण पहले ही लेबनान के दक्षिणी इलाके गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं। लगातार हमलों, विस्थापन और बुनियादी ढाँचे के नुकसान ने लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है।

लेबनान के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकालीन संचालन केंद्र द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार,दो मार्च से अब तक इजरायली हमलों में कुल 3,980 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12,001 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इन आँकड़ों से संघर्ष की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि अस्पतालों और राहत एजेंसियों पर भारी दबाव है तथा प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की कमी लगातार चुनौती बनी हुई है।

दक्षिण लेबनान में ताजा हमले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में शांति अभी भी बेहद नाजुक स्थिति में है। दोनों पक्षों के बीच बढ़ता अविश्वास,लगातार जारी आरोप-प्रत्यारोप और सैन्य गतिविधियाँ इस बात का संकेत हैं कि किसी भी समय हालात फिर से बड़े संघर्ष में बदल सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि युद्धविराम को बचाने और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल दक्षिण लेबनान के लोगों के लिए शांति की उम्मीद एक बार फिर अनिश्चितता के साये में नजर आ रही है।