महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए तमिलनाडु में शुरू हुई ‘सिंगप्पेन’ स्पेशल टास्क फोर्स (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए तमिलनाडु में शुरू हुई ‘सिंगप्पेन’ स्पेशल टास्क फोर्स,पूरे राज्य में चरणबद्ध विस्तार की तैयारी

चेन्नई,10 जून (युआईटीवी)- महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में तमिलनाडु सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार ने बुधवार से नई ‘सिंगप्पेन’ स्पेशल टास्क फोर्स के पहले चरण की शुरुआत कर दी है। यह विशेष पुलिस बल पूरी तरह महिलाओं और बच्चों से जुड़े सुरक्षा मामलों पर केंद्रित होगा और इसका उद्देश्य त्वरित प्रतिक्रिया,बेहतर निगरानी तथा निवारक पुलिसिंग के जरिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना है। मुख्यमंत्री सी. जोसफ विजय की पहल पर शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना को राज्य की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

सरकार की योजना के अनुसार इस विशेष टास्क फोर्स का विस्तार चरणबद्ध तरीके से पूरे तमिलनाडु में किया जाएगा। शुरुआत में राज्यभर में 70 ‘सिंगप्पेन’ इकाइयों को सक्रिय किया जा रहा है,जबकि आने वाले समय में इनकी संख्या बढ़ाकर 270 तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से महिलाओं और बच्चों से संबंधित अपराधों की रोकथाम में मदद मिलेगी और जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।

पहले चरण के तहत तमिलनाडु के प्रत्येक जिले में कम से कम एक ‘सिंगप्पेन’ इकाई तैनात की गई है। हालाँकि,राजधानी चेन्नई की बड़ी आबादी और विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र को देखते हुए वहाँ विशेष व्यवस्था की गई है। चेन्नई में 12 अलग-अलग स्थानों पर ‘सिंगप्पेन’ इकाइयाँ तैनात की जाएँगी,ताकि शहर के विभिन्न हिस्सों में महिलाओं और बच्चों को तेजी से सहायता प्रदान की जा सके। ग्रेटर चेन्नई पुलिस क्षेत्र में इस विशेष बल की सबसे अधिक इकाइयाँ तैनात की गई हैं।

इसके अलावा तांबरम और अवाड़ी पुलिस आयुक्तालय क्षेत्रों में भी चार-चार इकाइयाँ स्थापित की गई हैं। राज्य के अन्य पुलिस आयुक्तालय क्षेत्रों में दो-दो इकाइयों की तैनाती की गई है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी महिला या बच्चे को संकट की स्थिति में पुलिस सहायता के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े और शिकायत मिलने के तुरंत बाद कार्रवाई शुरू हो सके।

‘सिंगप्पेन’ स्पेशल टास्क फोर्स की सबसे खास बात यह है कि यह मुख्य रूप से महिला पुलिसकर्मियों से संचालित होगी। प्रत्येक इकाई में प्रारंभिक तौर पर दो महिला उपनिरीक्षक और एक महिला पुलिस कांस्टेबल को शामिल किया गया है। ये अधिकारी और कर्मचारी नियमित गश्त,निगरानी और शिकायतों पर कार्रवाई का कार्य सँभालेंगी। राज्य पुलिस विभाग ने इस विशेष बल के संचालन के लिए तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों से 140 महिला उपनिरीक्षकों और 420 महिला पुलिसकर्मियों का चयन किया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार इन इकाइयों को चौबीसों घंटे सक्रिय रखने की योजना बनाई गई है। इसके लिए रोटेशन प्रणाली के आधार पर ड्यूटी का प्रबंधन किया जाएगा,ताकि दिन और रात दोनों समय लगातार पुलिस मौजूदगी बनी रहे। इस व्यवस्था का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को हर समय सुरक्षा का भरोसा देना और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।

हालाँकि,यह बल मुख्य रूप से महिला पुलिसकर्मियों पर आधारित होगा,लेकिन जरूरत पड़ने पर पुरुष पुलिसकर्मियों की भी सहायता ली जाएगी। विशेष रूप से वाहन संचालन और अन्य तकनीकी या सहायक कार्यों के लिए पुरुष कर्मियों की सेवाएँ ली जा सकती हैं। हालाँकि,फोर्स का नेतृत्व और मुख्य जिम्मेदारी महिला अधिकारियों के हाथों में ही रहेगी।

राज्य सरकार महिलाओं के लिए एक विशेष संपर्क प्रणाली विकसित करने की भी तैयारी कर रही है। इसके तहत महिलाओं को सीधे पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्हाट्सएप समूह और मोबाइल संपर्क नंबर शुरू किए जाएँगे। इस व्यवस्था के माध्यम से महिलाएँ किसी भी समस्या,उत्पीड़न या आपात स्थिति की सूचना सीधे संबंधित इकाई तक पहुंचा सकेंगी। सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक का उपयोग पुलिस और आम नागरिकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने में मदद करेगा।

जब तक यह नई संपर्क प्रणाली पूरी तरह लागू नहीं हो जाती,तब तक महिलाओं को किसी भी आपात स्थिति में पुलिस नियंत्रण कक्ष के हेल्पलाइन नंबर 100 पर संपर्क करने की सलाह दी गई है। पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी ‘सिंगप्पेन’ इकाइयों को नियंत्रण कक्ष से जोड़ा जाएगा,ताकि शिकायत मिलने के तुरंत बाद संबंधित टीम को मौके पर भेजा जा सके।

इस नई पहल को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार ने आवश्यक संसाधनों की भी व्यवस्था की है। सरकार ने ‘सिंगप्पेन’ स्पेशल टास्क फोर्स के लिए 319 चार पहिया वाहनों और 101 दो पहिया वाहनों की खरीद को मंजूरी दी है। इन वाहनों का उपयोग गश्त,त्वरित प्रतिक्रिया और विभिन्न क्षेत्रों में नियमित निगरानी के लिए किया जाएगा। आधुनिक संचार उपकरणों और अन्य आवश्यक संसाधनों से लैस ये वाहन फोर्स की कार्यक्षमता को और मजबूत बनाएंगे।

पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि यह पहल केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी,बल्कि अपराधों की रोकथाम में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। नियमित गश्त और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की बढ़ी हुई मौजूदगी से अपराधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनेगा और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कमी आने की उम्मीद है।

महिला सुरक्षा को लेकर समाज में बढ़ती चिंताओं के बीच राज्य सरकार की यह पहल काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है,बल्कि ऐसी विशेष व्यवस्थाएं भी आवश्यक हैं,जो लोगों में विश्वास पैदा करें और उन्हें तत्काल सहायता उपलब्ध कराएं। ‘सिंगप्पेन’ स्पेशल टास्क फोर्स इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई है।

तमिलनाडु सरकार का मानना है कि इस विशेष बल के जरिए महिलाओं और बच्चों को अधिक सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा। साथ ही पुलिस और समाज के बीच भरोसे का रिश्ता भी मजबूत होगा। आने वाले समय में जब इस योजना का विस्तार राज्यभर में 270 इकाइयों तक हो जाएगा,तब इसके प्रभाव और भी व्यापक रूप से देखने को मिल सकते हैं।

फिलहाल पहले चरण की शुरुआत के साथ तमिलनाडु ने महिला और बाल सुरक्षा के क्षेत्र में एक नई पहल का आगाज कर दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विशेष टास्क फोर्स जमीनी स्तर पर किस प्रकार काम करती है और महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा को लेकर लोगों की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरती है।