मुंबई,28 मई (युआईटीवी)- देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल एचडीएफसी बैंक ने 45 करोड़ रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है। बैंक ने बुधवार को जारी अपने बयान में कहा कि गड़बड़ी को लेकर लगाए जा रहे आरोप और कयास केवल चुनिंदा तथ्यों पर आधारित हैं तथा उन्हें गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि वह मजबूत आंतरिक निरीक्षण,लेखापरीक्षा और नियंत्रण प्रक्रियाओं का पालन करता है और सभी मामलों को तय मानकों और प्रक्रियाओं के अनुसार ही सँभाला जाता है।
एचडीएफसी बैंक की ओर से जारी स्पष्टीकरण उस मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आया,जिसमें दावा किया गया था कि बैंक की ऑडिट कमेटी ऑफ द बोर्ड ने महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को किए गए 45 करोड़ रुपए के भुगतान को लेकर औपचारिक आंतरिक सतर्कता जाँच का आदेश दिया है। रिपोर्ट में कहा गया था कि यह जाँच वित्त वर्ष 2024 और 2025 के दौरान हुए कुछ लेनदेन से संबंधित है और भुगतान कथित तौर पर अलग-अलग ब्याज दरों के माध्यम से किए गए थे।
बैंक के प्रवक्ता ने बयान जारी करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी के दावे को पूरी तरह खारिज किया जाता है। उन्होंने कहा कि एचडीएफसी बैंक में सभी मामलों को स्थापित प्रक्रियाओं और मानदंडों के अनुसार ही निपटाया जाता है। प्रवक्ता के अनुसार,किसी भी आंतरिक समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय लेने से पहले पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाता है और सभी आवश्यक जाँच एवं सत्यापन किए जाते हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया था कि महाराष्ट्र सरकार की एजेंसी महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को ब्याज भुगतान के रूप में सीधे राशि जमा करने के बजाय धनराशि को कथित तौर पर बैंक के मार्केटिंग विभाग के माध्यम से भेजा गया। इसके बाद इसे चार स्थानीय विक्रेताओं के जरिए सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान में योगदान के रूप में दर्शाया गया। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि इस व्यवस्था पर बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन स्तर पर चर्चा हुई थी और इन बैठकों में बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशिधर जगदीश की मौजूदगी भी थी।
हालाँकि,बैंक ने इन आरोपों को भ्रामक बताते हुए कहा कि रिपोर्ट में केवल कुछ चुनिंदा तथ्यों को आधार बनाकर निष्कर्ष निकाले गए हैं,जबकि वास्तविक स्थिति अलग है। बैंक का कहना है कि वह अपने सभी वित्तीय और प्रशासनिक मामलों में नियामकीय मानकों और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली का सख्ती से पालन करता है।
इस घटनाक्रम का असर शेयर बाजार में भी दिखाई दिया। रिपोर्ट सामने आने के बाद एचडीएफसी बैंक के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। दोपहर के कारोबार के दौरान बैंक का शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर लगभग 2.69 प्रतिशत गिरकर 757.90 रुपए तक पहुँच गया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों के बीच अचानक बढ़ी चिंता और अनिश्चितता के कारण शेयर पर दबाव देखने को मिला।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि देश के बड़े बैंकों से जुड़ी किसी भी तरह की अनियमितता की खबर बाजार की धारणा को प्रभावित करती है। एचडीएफसी बैंक लंबे समय से मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस,स्थिर प्रदर्शन और विश्वसनीय बैंकिंग संचालन के लिए जाना जाता रहा है। ऐसे में किसी भी तरह की जाँच या आरोप की खबर निवेशकों और बाजार प्रतिभागियों का ध्यान तुरंत आकर्षित करती है।
हालाँकि,बैंकिंग क्षेत्र के जानकार यह भी मानते हैं कि किसी भी बड़ी संस्था में आंतरिक समीक्षा और ऑडिट प्रक्रियाएँ नियमित तौर पर चलती रहती हैं। कई बार इन प्रक्रियाओं को लेकर सामने आने वाली खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है,जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक किसी जाँच में ठोस निष्कर्ष सामने न आ जाएँ,तब तक किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता को अंतिम रूप से मान लेना उचित नहीं होगा।
महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन राज्य सरकार की एक प्रमुख एजेंसी है,जो सड़क और बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के विकास से जुड़ी हुई है। रिपोर्ट में जिस कथित व्यवस्था का जिक्र किया गया,उसमें ब्याज भुगतान और मार्केटिंग गतिविधियों के बीच संबंध होने का दावा किया गया था। हालाँकि,बैंक की ओर से इस पर स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सभी कार्य और भुगतान तय प्रक्रियाओं और अनुमोदनों के तहत ही किए जाते हैं।
बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और नियामकीय अनुपालन को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक और अन्य नियामक संस्थाएँ लगातार सख्त रुख अपनाए हुए हैं। ऐसे में किसी भी संभावित अनियमितता की जानकारी सामने आने पर आंतरिक जाँच या समीक्षा होना सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है,लेकिन एचडीएफसी बैंक का कहना है कि रिपोर्ट में लगाए गए आरोप तथ्यों की पूरी तस्वीर पेश नहीं करते और इससे बैंक की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की जा रही है।
इस बीच निवेशकों और बाजार विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर टिकी हुई है कि क्या इस मामले में आगे कोई औपचारिक जाँच या अतिरिक्त जानकारी सामने आती है। फिलहाल बैंक ने अपने बयान में स्पष्ट कर दिया है कि वह सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करता है और उसके पास मजबूत आंतरिक नियंत्रण तंत्र मौजूद है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में यदि बैंक या नियामकीय संस्थाओं की ओर से इस मामले में और स्पष्टीकरण आता है,तो उससे स्थिति और साफ हो सकेगी। फिलहाल बैंक ने आरोपों को खारिज करते हुए यह संदेश देने की कोशिश की है कि उसकी प्रक्रियाएँ पारदर्शी और नियामकीय मानकों के अनुरूप हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखाया है कि वित्तीय संस्थानों से जुड़ी किसी भी खबर का असर न केवल शेयर बाजार पर पड़ता है,बल्कि निवेशकों के भरोसे और बैंकिंग क्षेत्र की साख पर भी पड़ सकता है। ऐसे में बाजार और निवेशक अब इस मामले से जुड़े आगे के घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
