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नासिक उत्पीड़न मामले पर टीसीएस चेयरमैन का बड़ा बयान,दोषी पाए जाने पर होगी सख्त कार्रवाई

नई दिल्ली,10 जून (युआईटीवी)- देश की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की नासिक इकाई से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले को लेकर कंपनी के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में कोई भी कर्मचारी दोषी पाया जाता है,तो उसके खिलाफ कंपनी की ओर से सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह बयान ऐसे समय में आया है,जब मामले की जाँच पुलिस और कंपनी दोनों स्तरों पर जारी है और इस प्रकरण ने कॉरपोरेट जगत में कार्यस्थल की सुरक्षा तथा शिकायत निवारण व्यवस्था को लेकर व्यापक चर्चा छेड़ दी है।

टीसीएस की 31वीं वार्षिक आम बैठक के दौरान शेयरधारकों को संबोधित करते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है,इसलिए वह इस पर अधिक टिप्पणी नहीं करना चाहते। हालाँकि,उन्होंने यह जरूर कहा कि कंपनी को अब तक मिली प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार किसी भी आधिकारिक माध्यम,ईमेल या निर्धारित शिकायत चैनल के जरिए कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी। इसके बावजूद कंपनी पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है और तथ्यों की निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।

उन्होंने कहा कि कंपनी की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि नासिक कार्यालय में मौजूद प्रत्येक व्यक्ति जाँच एजेंसियों के समक्ष अपनी बात स्वतंत्र रूप से रख सके। उनके अनुसार यदि जाँच के दौरान कंपनी की किसी प्रक्रिया में कमी या कमजोरी सामने आती है,तो उसे दूर करने के लिए आवश्यक सुधार किए जाएँगे। उन्होंने यह भी दोहराया कि यदि किसी कर्मचारी की भूमिका गलत पाई जाती है,तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी।

टीसीएस प्रमुख का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब मामले ने कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर गंभीर रूप ले लिया है। बीते महीने नासिक पुलिस की विशेष जाँच टीम ने इस मामले में आरोपपत्र दाखिल कर दिया था। इसके साथ ही जाँच की दिशा और भी स्पष्ट हो गई है। पुलिस का कहना है कि उसने शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत जाँच की है और उसी के बाद आरोपपत्र तैयार किया गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए टीसीएस ने भी अपनी ओर से स्वतंत्र जाँच शुरू कराई है। कंपनी ने इस जाँच के लिए दो बाहरी और स्वतंत्र सलाहकार संस्थाओं की सेवाएँ ली हैं। इन संस्थाओं को मामले से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष समीक्षा करने और कंपनी की आंतरिक प्रक्रियाओं का मूल्यांकन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस जाँच की निगरानी कंपनी की अध्यक्ष एवं मुख्य परिचालन अधिकारी आरती सुब्रमण्यन कर रही हैं।

इसके अतिरिक्त कंपनी ने एक निगरानी समिति का भी गठन किया है,जिसका उद्देश्य जाँच की प्रगति पर नजर रखना और भविष्य की कार्रवाई के लिए सुझाव देना है। इस समिति की अध्यक्षता स्वतंत्र निदेशक केकी मिस्त्री कर रहे हैं। कंपनी का कहना है कि समिति जाँच रिपोर्टों का अध्ययन करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि मामले में पारदर्शिता बनी रहे तथा आवश्यक कदम समय पर उठाए जाएं।

यह पूरा विवाद पहली बार मार्च महीने में सामने आया था। उस समय नासिक स्थित टीसीएस बीपीओ इकाई में कार्यरत एक महिला कर्मचारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उसके एक सहकर्मी ने विवाह का वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में अपने वादे से पीछे हट गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू की थी।

जाँच आगे बढ़ने के साथ कई अन्य आरोप भी सामने आए। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जाँच के दौरान कुछ और कर्मचारियों ने भी मानसिक और यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतें दर्ज कराईं। इसके बाद वर्ष 2022 से 2026 के बीच कथित रूप से हुए उत्पीड़न और शिकायतों पर कार्रवाई न किए जाने के आरोपों को लेकर आठ अतिरिक्त प्राथमिकी दर्ज की गईं। इन शिकायतों में कुछ वरिष्ठ प्रबंधकों पर भी आरोप लगाए गए कि उन्होंने शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया और समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए।

मामले में एक और संवेदनशील पहलू तब जुड़ गया,जब कुछ शिकायतकर्ताओं ने धर्म परिवर्तन के प्रयासों से जुड़े आरोप भी लगाए। हालाँकि,इन आरोपों की सत्यता और उनके कानूनी पहलुओं की जाँच अभी जारी है। जाँच एजेंसियाँ सभी पक्षों के बयान दर्ज कर रही हैं और उपलब्ध दस्तावेजों तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी समीक्षा की जा रही है।

इस प्रकरण ने कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा और शिकायत निवारण तंत्र की प्रभावशीलता को लेकर एक बार फिर बहस शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी कंपनियों में आंतरिक शिकायत समितियों और कर्मचारी सुरक्षा नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है,ताकि किसी भी कर्मचारी को शिकायत दर्ज कराने में कठिनाई न हो और मामलों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

टीसीएस ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया है कि यदि जाँच में प्रक्रियागत खामियाँ सामने आती हैं,तो उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक बदलाव किए जाएँगे। कंपनी का कहना है कि वह कर्मचारियों के लिए सुरक्षित,सम्मानजनक और पारदर्शी कार्य वातावरण बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। यही कारण है कि उसने स्वतंत्र जाँच एजेंसियों को शामिल कर पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा कराने का निर्णय लिया है।

फिलहाल इस मामले की जाँच कई स्तरों पर जारी है और अंतिम निष्कर्ष आने में समय लग सकता है। कंपनी प्रबंधन,पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर तथ्यों की पड़ताल कर रही हैं। ऐसे में सभी की निगाहें जाँच के अंतिम परिणाम पर टिकी हैं। यदि आरोप साबित होते हैं,तो यह मामला कॉरपोरेट जगत में कार्यस्थल सुरक्षा से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक बन सकता है। वहीं यदि जाँच में किसी भी स्तर पर प्रक्रियागत कमियाँ सामने आती हैं,तो इससे भविष्य में कंपनियों की आंतरिक नीतियों और शिकायत निवारण व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा भी तय हो सकती है।

फिलहाल टीसीएस नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा और कंपनी जाँच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग जारी रखेगी। यही संदेश इस पूरे मामले में कंपनी के आधिकारिक रुख को भी स्पष्ट करता है।