एलपीजी से भरा जहाज ‘शिवालिक’ सुरक्षित पार कर गया होर्मुज जलडमरूमध्य (तस्वीर क्रेडिट@MuditJain_IN)

पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत पहुँचा एलपीजी जहाज ‘शिवालिक’, मुंद्रा पोर्ट पर उतरा 45 हजार मीट्रिक टन गैस

गांधीनगर,17 मार्च (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। कतर से एलपीजी लेकर आने वाला भारतीय जहाज शिवालिक एलपीजी कैरियर सोमवार शाम गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर सुरक्षित पहुँच गया। यह जहाज लगभग 45 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत आया है,जो देश की घरेलू गैस जरूरतों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

भारत सरकार के अनुसार इस जहाज में लाई गई गैस लगभग 32 लाख घरेलू गैस सिलेंडरों के बराबर है। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में संघर्ष और तनाव का माहौल बना हुआ है,इस जहाज का सुरक्षित भारत पहुँचना ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास बात यह है कि क्षेत्र में तनाव के बीच यह भारत पहुँचने वाला पहला एलपीजी जहाज है।

यह जहाज 14 मार्च को फारस की खाड़ी क्षेत्र से रवाना हुआ था और उसने वैश्विक समुद्री व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है,जहाँ से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुँचाई जाती है।

भारत सरकार के पत्तन,पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने पहले ही इस जहाज के आगमन की जानकारी मीडिया के साथ साझा कर दी थी। सोमवार को आयोजित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने इस बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शिवालिक एलपीजी कैरियर फारस की खाड़ी से रवाना होकर सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट पार करते हुए भारत पहुँचा है।

सिन्हा ने कहा कि मौजूदा समय में पश्चिम एशिया की स्थिति पर भारत सरकार लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज या नाविक के साथ किसी तरह की अप्रिय घटना की कोई सूचना नहीं मिली है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत सरकार का समुद्री संचालन तंत्र लगातार सभी जहाजों और उनके क्रू सदस्यों के संपर्क में बना हुआ है। अधिकारियों के अनुसार फारस की खाड़ी में होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में अभी भी भारत के झंडे वाले 22 जहाज मौजूद हैं। इन जहाजों पर कुल 611 भारतीय नाविक सवार हैं,जिनकी सुरक्षा को लेकर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से आने वाले दिनों में भारत को एक और बड़ी खेप मिलने वाली है। मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात से रवाना हुआ एक और भारतीय जहाज जल्द ही कच्चा तेल लेकर भारत पहुँचेगा।

सिन्हा ने बताया कि भारतीय झंडा वाले जहाज जग लाडकी ने 14 मार्च को संयुक्त अरब अमीरात से अपनी यात्रा शुरू की थी। यह जहाज करीब 81 हजार टन मुरबान कच्चा तेल लेकर भारत की ओर आ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक यह जहाज 17 मार्च तक मुंद्रा बंदरगाह पहुँच जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस जहाज और उस पर सवार सभी भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनकी यात्रा सामान्य रूप से जारी है। भारतीय समुद्री एजेंसियाँ लगातार जहाज की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था फिलहाल स्थिर बनी हुई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है,इसलिए इस क्षेत्र में होने वाली किसी भी हलचल का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत की आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है।

हालाँकि,सरकार का कहना है कि भारत के पास पर्याप्त ऊर्जा भंडार मौजूद हैं और आपूर्ति को बनाए रखने के लिए कई वैकल्पिक व्यवस्थाएँ भी की गई हैं। मुंद्रा पोर्ट जैसे बड़े बंदरगाह देश की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं,जहाँ से एलपीजी और कच्चे तेल की बड़ी खेपों को देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जाता है।

फिलहाल शिवालिक एलपीजी कैरियर के सुरक्षित आगमन से यह संकेत मिला है कि क्षेत्रीय तनाव के बावजूद भारत की समुद्री आपूर्ति श्रृंखला सुचारू रूप से काम कर रही है। आने वाले दिनों में अन्य जहाजों के आगमन के साथ ऊर्जा आपूर्ति को और मजबूत बनाए रखने की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।