तेहरान,4 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। ईरान ने अमेरिका के 48 घंटे के सीजफायर प्रस्ताव को साफ तौर पर खारिज कर दिया है,जिससे क्षेत्र में हालात और अधिक गंभीर हो गए हैं। ईरान की सेमी-ऑफिशियल फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक,यह प्रस्ताव एक मित्र देश के जरिए तेहरान तक पहुँचाया गया था,लेकिन ईरान ने इसे स्वीकार करने के बजाय अपने सैन्य अभियान को जारी रखते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि वह दबाव में आने वाला नहीं है।
रिपोर्ट्स के अनुसार,यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया जब हाल ही में ईरान ने कुवैत के बुबियान आइलैंड पर स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया था। इस हमले के बाद अमेरिका ने क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए कूटनीतिक प्रयासों को तेज किया और युद्धविराम का प्रस्ताव आगे बढ़ाया। हालाँकि,फार्स न्यूज एजेंसी के हवाले से यह भी कहा गया है कि अमेरिका को यह कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि ईरान की सैन्य ताकत और जवाबी कार्रवाई ने अमेरिकी बलों के लिए “गंभीर चुनौतियाँ” पैदा कर दी हैं।
ईरान की प्रतिक्रिया बेहद सख्त रही। रिपोर्ट के मुताबिक,उसने इस प्रस्ताव का कोई औपचारिक या लिखित जवाब नहीं दिया,बल्कि मैदान में हमलों की गति बढ़ाकर अपनी नीति स्पष्ट कर दी। इससे यह संकेत मिलता है कि तेहरान फिलहाल किसी भी प्रकार के समझौते या युद्धविराम के मूड में नहीं है और वह अपनी रणनीति के तहत जवाबी कार्रवाई जारी रखना चाहता है।
इस बीच,सैन्य घटनाओं ने स्थिति को और विस्फोटक बना दिया है। ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अपने एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए एक अमेरिकी ए-10 “वॉर्थोग” अटैक एयरक्राफ्ट को मार गिराया है। बताया जा रहा है कि यह विमान फारस की खाड़ी में गिर गया। यह इलाका वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है और यहाँ किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
इसके अलावा,इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया है कि उसने ईरान के मध्य हवाई क्षेत्र में एक अमेरिकी एफ-35 फाइटर जेट को भी मार गिराया था। हालाँकि,इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है,लेकिन अगर ये सही साबित होते हैं,तो यह अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका माना जाएगा।
घटनाओं की श्रृंखला यहीं नहीं रुकी। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार,एक अमेरिकी ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर भी ईरानी हवाई क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। बताया जा रहा है कि यह हेलीकॉप्टर उस पायलट की तलाश में निकला था,जिसका फाइटर जेट पहले मार गिराया गया था। इसी दौरान यह किसी प्रोजेक्टाइल से टकरा गया और दुर्घटना का शिकार हो गया। इस घटना ने क्षेत्र में चल रही सैन्य गतिविधियों की तीव्रता को और स्पष्ट कर दिया है।
स्थानीय प्रशासन ने भी इस स्थिति को गंभीरता से लिया है। कोगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के गवर्नर यादोल्लाह रहमानी ने स्थानीय कबायली और ग्रामीण समुदायों से अपील की है कि वे “दुश्मन पायलटों” का पता लगाने में सुरक्षा बलों की मदद करें। इससे साफ है कि ईरान अब इस संघर्ष को केवल सीमित सैन्य कार्रवाई तक नहीं,बल्कि व्यापक जनसहभागिता के साथ आगे बढ़ा रहा है।
इस पूरे संकट की जड़ 28 फरवरी को हुए उस बड़े हमले में देखी जा रही है,जब इजरायल और अमेरिका ने मिलकर तेहरान सहित ईरान के कई शहरों पर हमला किया था। इस हमले में उस समय के ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई,कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और आम नागरिक मारे गए थे। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया और इसके बाद से ही ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है।
ईरान ने इस हमले के बाद मिडिल ईस्ट में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए थे। इन हमलों ने न केवल सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुँचाया,बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है। अब जब ईरान ने सीजफायर प्रस्ताव को ठुकरा दिया है,तो यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में संघर्ष और तेज हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया,तो यह टकराव एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है,जिसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल बाजार,अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
ईरान द्वारा अमेरिकी सीजफायर प्रस्ताव को ठुकराना इस बात का संकेत है कि हालात अभी शांत होने वाले नहीं हैं। क्षेत्र में लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ और कूटनीतिक विफलता इस संकट को और गहरा कर रही हैं। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में कोई समाधान निकल पाता है या यह टकराव और व्यापक रूप ले लेता है।
