तेल अवीव,6 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक बार फिर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। हाल ही में अमेरिकी पायलट के रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर जहाँ बेंजामिन नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप की खुलकर सराहना की है,वहीं ईरान ने इस पूरे अभियान की सफलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटनाक्रम ने न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की और उन्हें इस साहसिक मिशन के लिए बधाई दी। नेतन्याहू ने अपने संदेश में कहा कि यह ऑपरेशन न केवल सैन्य दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण था,बल्कि इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि अमेरिका और इजरायल के बीच सहयोग किस स्तर तक मजबूत हो चुका है। उन्होंने कहा कि दुश्मन के इलाके में जाकर एक पायलट को सुरक्षित वापस लाना किसी भी सेना के लिए बड़ी उपलब्धि होती है।
बताया जा रहा है कि यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब ईरान ने अमेरिका के दो लड़ाकू विमान—ए-10 थंडरबोल्ट II और एफ-15ई स्ट्राइक ईगल को मार गिराया। इस हमले के बाद एक अमेरिकी पायलट ईरानी क्षेत्र में लापता हो गया था,जिसे खोजने और सुरक्षित निकालने के लिए अमेरिका ने एक बड़ा सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। कई घंटों तक चले इस अभियान के बाद पायलट को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस पूरे ऑपरेशन की जानकारी खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ के माध्यम से साझा की थी।
नेतन्याहू ने अपने बयान में यह भी खुलासा किया कि इस मिशन में इजरायल ने अमेरिका का साथ दिया था। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान दोनों देशों के बीच तालमेल अभूतपूर्व था और यही कारण रहा कि यह मिशन सफल हो सका। उन्होंने यह भी बताया कि ट्रंप ने इजरायल की इस मदद के लिए व्यक्तिगत रूप से आभार व्यक्त किया और दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।
हालाँकि,जहाँ अमेरिका और इजरायल इस मिशन को बड़ी सफलता के रूप में पेश कर रहे हैं,वहीं ईरान ने इस पूरे ऑपरेशन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। फिनलैंड में स्थित ईरानी दूतावास ने एक बयान जारी कर अमेरिका के दावों पर संदेह जताया। दूतावास ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि यह वास्तव में एक सफल रेस्क्यू ऑपरेशन था या फिर किसी नाकामी को छिपाने की कोशिश।
ईरानी दूतावास ने अपने बयान में व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि यदि अमेरिका के दावे को सच भी मान लिया जाए,तो भी यह सवाल बना रहता है कि इतना बड़ा और जोखिम भरा अभियान आखिरकार केवल एक ही क्रू मेंबर को बचाने तक क्यों सीमित रहा। उन्होंने यह भी कहा कि जिस ऑपरेशन को अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसिक मिशन बताया जा रहा है,उसमें जितना समय और संसाधन लगाए गए,उतने में पहले अमेरिका कई बड़े सैन्य अभियान पूरे कर चुका है।
ईरान की इस प्रतिक्रिया ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। दूतावास ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका इस ऑपरेशन को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है,ताकि अपनी सैन्य छवि को मजबूत दिखा सके। उन्होंने कहा कि यह कोई ऐसा अवसर नहीं है जिस पर गर्व किया जाए,बल्कि यह उन असफलताओं की ओर इशारा करता है जिन्हें छिपाने की कोशिश की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल एक रेस्क्यू ऑपरेशन तक सीमित नहीं है,बल्कि इसके पीछे व्यापक रणनीतिक और राजनीतिक संदेश भी छिपा हुआ है। अमेरिका और इजरायल इस ऑपरेशन को अपनी सैन्य क्षमता और आपसी सहयोग के प्रतीक के रूप में पेश कर रहे हैं,जबकि ईरान इसे अपनी कूटनीतिक प्रतिक्रिया के जरिए चुनौती दे रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम का असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति में इस तरह की बयानबाजी से हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। खासतौर पर ऐसे समय में जब क्षेत्र में कई अन्य मुद्दों को लेकर भी तनाव बना हुआ है,यह विवाद नए टकराव को जन्म दे सकता है।
अमेरिकी पायलट के रेस्क्यू को लेकर उठे इस विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मध्य पूर्व में हालात अभी भी बेहद संवेदनशील हैं। एक तरफ जहाँ अमेरिका और इजरायल इसे अपनी सफलता के रूप में देख रहे हैं,वहीं ईरान इसे चुनौती देते हुए अपने रुख पर कायम है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या इससे क्षेत्र में शांति की संभावनाओं पर कोई असर पड़ता है।
