वाशिंगटन,9 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में हालिया संघर्ष और उसके बाद हुए युद्धविराम के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ चलाए गए अपने सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को पूरी तरह सफल करार दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पेंटागन में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि इस ऑपरेशन के तहत अमेरिका और इजरायल ने अपने सभी रणनीतिक उद्देश्यों को हासिल कर लिया है।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके साथ जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन भी मौजूद थे। दोनों अधिकारियों ने विस्तार से बताया कि किस तरह 40 दिनों से भी कम समय में सीमित सैन्य क्षमता का उपयोग करते हुए ईरान के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की गई और उसे गंभीर नुकसान पहुँचाया गया।
पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास इतनी शक्ति थी कि वह कुछ ही मिनटों में ईरान की पूरी अर्थव्यवस्था को ठप कर सकते थे,लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उनके अनुसार,ट्रंप ने जानबूझकर संयम दिखाया क्योंकि ईरान पहले ही दबाव में आकर युद्धविराम के लिए तैयार हो चुका था। उन्होंने इस निर्णय को एक रणनीतिक कदम बताया,जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर विनाश से बचना था।
हेगसेथ ने यह भी दावा किया कि ईरान की ‘नई सरकार’ के साथ अमेरिका की बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उनके अनुसार,ईरान को यह एहसास हो गया है कि लंबे संघर्ष से उसे कोई लाभ नहीं होगा और इसलिए उसने समझौते का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ईरान अब परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकेगा।
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत केवल 10 प्रतिशत सैन्य क्षमता का इस्तेमाल किया गया,लेकिन इसके बावजूद ईरान को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने दावा किया कि यह अभियान इतनी सटीकता और योजना के तहत चलाया गया कि हर लक्ष्य को निर्धारित समय के भीतर हासिल कर लिया गया।
हेगसेथ के अनुसार,इस अभियान के परिणामस्वरूप ईरान की नौसेना को लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है और उसका एयर डिफेंस सिस्टम भी खत्म हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह से निष्क्रिय कर दिया गया है,जिससे उसकी आक्रामक क्षमता पर बड़ा असर पड़ा है।
वहीं,जनरल डैन केन ने ऑपरेशन के आँकड़ों को साझा करते हुए बताया कि अमेरिकी और इजरायली सेनाओं ने ईरान के भीतर 13,000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया। उनके अनुसार,इस अभियान में ईरान के 80 प्रतिशत एयर डिफेंस सिस्टम,90 प्रतिशत से अधिक नौसैनिक बेड़े और लगभग इतनी ही संख्या में हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियों को नष्ट कर दिया गया।
केन ने यह भी कहा कि इस कार्रवाई के बाद ईरान के लिए किसी बड़े स्तर की जवाबी कार्रवाई करना फिलहाल संभव नहीं है। उनके मुताबिक,ईरान को अपनी सैन्य क्षमता को फिर से खड़ा करने में कई साल लग सकते हैं। हालाँकि,उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि वर्तमान युद्धविराम केवल एक अस्थायी ठहराव है और यदि स्थिति बिगड़ती है तो अमेरिकी सेना फिर से कार्रवाई के लिए तैयार है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान की ओर से इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के ये दावे काफी बड़े हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। कई विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस तरह के दावे रणनीतिक संदेश देने के लिए भी किए जाते हैं,ताकि विरोधी पक्ष पर दबाव बनाया जा सके।
मध्य पूर्व की जटिल स्थिति में यह घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। जहाँ एक ओर अमेरिका अपनी सैन्य सफलता का दावा कर रहा है,वहीं दूसरी ओर यह भी स्पष्ट है कि क्षेत्र में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। युद्धविराम के बावजूद स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है और किसी भी समय नए घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को लेकर अमेरिका के दावे इस बात का संकेत देते हैं कि वह इस संघर्ष को अपनी रणनीतिक जीत के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है। हालाँकि,आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जमीन पर वास्तविक स्थिति क्या है और क्या यह युद्धविराम स्थायी शांति का रास्ता तैयार कर पाता है या नहीं।
