कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (तस्वीर क्रेडिट@Anand_thunder)

खड़गे के बयान पर महाराष्ट्र में सियासी घमासान,भाजपा ने बोला तीखा हमला

मुंबई,22 अप्रैल (युआईटीवी)- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए विवादित बयान ने देश की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र में आक्रामक रुख अपनाते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। मुंबई में आयोजित महिला सम्मेलन यात्रा के दौरान भाजपा नेताओं ने खड़गे के बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे न केवल आपत्तिजनक बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।

मंगलवार को मुंबई में आयोजित इस कार्यक्रम में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए, जिन्होंने एक सुर में कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना की। भाजपा नेताओं का कहना था कि जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया गया है,वह राजनीतिक संवाद की मर्यादा को तोड़ने वाला है और इससे लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचती है। नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार अपनी भाषा और व्यवहार से सार्वजनिक जीवन के स्तर को गिरा रही है।

मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित सातम ने अपने संबोधन में कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जिन लोगों ने महिलाओं के अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों का विरोध किया,उन्हें देश के प्रधानमंत्री के बारे में बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर महिला आरक्षण जैसे अहम विषय पर राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि इससे उसकी सोच का पता चलता है। उनके अनुसार,भाजपा सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं,जबकि कांग्रेस केवल विरोध की राजनीति में लगी हुई है।

कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय मंत्री आशीष शेलार ने भी खड़गे के बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करके एक गंभीर गलती की है,जिसे देश की जनता कभी नहीं भूलेगी। शेलार ने दावा किया कि जब यह विधेयक पारित नहीं हो पाया,तब कांग्रेस के कुछ नेताओं ने खुशी जाहिर की थी,जो उनके असली इरादों को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि अब पूरा समाज इस मुद्दे पर जागरूक हो चुका है और महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में एकजुट हो रहा है।

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री गिरीश महाजन ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए खड़गे के बयान को बचकाना और गैरजिम्मेदाराना बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के अलग-अलग नेताओं के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते,जिससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी के भीतर कोई स्पष्ट दिशा नहीं है। महाजन ने यह भी कहा कि इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना किसी भी वरिष्ठ नेता के लिए उचित नहीं है और इससे जनता के बीच गलत संदेश जाता है।

वहीं,मंत्री पंकजा मुंडे ने भी इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि देश में महिलाओं को अधिकार दिलाने के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं,उन्हें कांग्रेस द्वारा लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। मुंडे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर राजनीति करके महिलाओं के साथ अन्याय किया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करना पूरी तरह गलत है और इससे जनता में आक्रोश पैदा हुआ है।

इस दौरान भाजपा नेता अतुल सावे ने भी कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी केवल नकारात्मक राजनीति में विश्वास करती है और उसके पास कोई ठोस एजेंडा नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस परिवारवाद और व्यक्तिगत हमलों की राजनीति से बाहर नहीं निकल पा रही है,जिससे उसका जनाधार लगातार कमजोर होता जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में और गहरा सकता है,खासकर जब देश में विभिन्न राज्यों में चुनावी माहौल बन रहा है। इस तरह के बयान न केवल राजनीतिक बहस को प्रभावित करते हैं,बल्कि आम जनता के बीच भी व्यापक चर्चा का विषय बन जाते हैं। भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाकर कांग्रेस पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रही है,जबकि कांग्रेस की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारतीय राजनीति में संवाद का स्तर गिरता जा रहा है। जहां एक ओर सत्तारूढ़ दल विपक्ष पर तीखे हमले कर रहा है,वहीं विपक्ष भी सरकार की आलोचना में आक्रामक भाषा का इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि सभी राजनीतिक दल अपनी भाषा और आचरण में संयम बरतें,ताकि लोकतंत्र की गरिमा बनी रहे।

फिलहाल,खड़गे के बयान को लेकर सियासी माहौल गरमाया हुआ है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बयानबाजी देखने को मिल सकती है। भाजपा जहाँ इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है,वहीं कांग्रेस के सामने चुनौती है कि वह इस विवाद से कैसे निपटती है और अपनी स्थिति स्पष्ट करती है।