कोलकाता,12 जून (युआईटीवी)- पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चित हस्ताक्षर विसंगति मामले की जांच तेज हो गई है। राज्य की अपराध जाँच विभाग (सीआईडी) ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को एक बार फिर पूछताछ के लिए 14 जून को तलब किया है। इससे पहले गुरुवार को उन्हें सीआईडी मुख्यालय में लंबी पूछताछ का सामना करना पड़ा,जहाँ जाँच अधिकारियों ने उनसे करीब छह घंटे तक सवाल-जवाब किए। देर रात पूछताछ समाप्त होने के बाद उन्हें जाने की अनुमति दे दी गई, लेकिन जाँच एजेंसी ने मामले में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर और स्पष्टीकरण की आवश्यकता जताते हुए दोबारा उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
सूत्रों के अनुसार,गुरुवार को हुई पूछताछ का मुख्य केंद्र उन दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स पर रहा, जिनसे कथित हस्ताक्षर अंतर का मामला जुड़ा हुआ है। जाँच अधिकारी विशेष रूप से मूल प्रस्ताव पुस्तिका और बैठकों के कार्यवृत्त से संबंधित जानकारी प्राप्त करना चाहते थे। माना जा रहा है कि जाँच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संबंधित दस्तावेजों में दर्ज हस्ताक्षरों और रिकॉर्ड्स के बीच पाए गए अंतर की वास्तविक स्थिति क्या है तथा इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
पुलिस सूत्रों का दावा है कि पूछताछ के दौरान अभिषेक बनर्जी कई महत्वपूर्ण सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। विशेष रूप से मूल प्रस्ताव पुस्तिका के संबंध में पूछे गए प्रश्नों पर वह संतोषजनक जानकारी उपलब्ध नहीं करा पाए। जाँच अधिकारियों ने उनसे यह जानने का प्रयास किया कि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव होने के नाते क्या उन्हें उन दस्तावेजों की जानकारी थी,जिनका अब जाँच में उल्लेख किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक,जब उनसे यह सवाल पूछा गया कि क्या पार्टी के इतने महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए वह प्रस्ताव पुस्तिका की जानकारी होने से इनकार कर सकते हैं,तो माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया। बताया जा रहा है कि इस दौरान वह कुछ मिनटों के लिए नाराज भी हो गए थे। हालाँकि,पूछताछ आगे जारी रही और अधिकारियों ने मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर उनसे विस्तृत जानकारी लेने का प्रयास किया।
जाँच एजेंसी का मानना है कि केवल प्रस्ताव पुस्तिका ही नहीं,बल्कि बैठकों के कार्यवृत्त और उनसे जुड़े प्रशासनिक रिकॉर्ड भी इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसी कारण अधिकारियों ने दस्तावेजों के रखरखाव,निर्णय प्रक्रिया और हस्ताक्षरों की प्रमाणिकता को लेकर कई प्रश्न पूछे। सूत्रों का कहना है कि इन सवालों में से कई के जवाब जाँच टीम को अभी भी स्पष्ट रूप से नहीं मिल पाए हैं,जिसके चलते अभिषेक बनर्जी को दोबारा तलब किया गया है।
पूछताछ समाप्त होने के बाद अभिषेक बनर्जी सीधे कोलकाता स्थित हरीश चटर्जी स्ट्रीट पहुँचे,जहाँ मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी का आवास है। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएँ शुरू हो गईं। हालाँकि,इस मुलाकात को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी सामने नहीं आई है कि दोनों नेताओं के बीच क्या बातचीत हुई।
गौरतलब है कि अभिषेक बनर्जी इससे पहले सीआईडी द्वारा जारी किए गए तीन नोटिसों की अनदेखी कर चुके थे। लगातार तीन बार उपस्थित न होने के बाद जाँच एजेंसी ने उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की संभावना पर भी विचार किया था। इसके बाद मामला कलकत्ता उच्च न्यायालय पहुँचा,जहाँ से उन्हें अस्थायी राहत मिली।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अभिषेक बनर्जी को 21 दिनों के लिए गिरफ्तारी सहित किसी भी कठोर पुलिस कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि जाँच एजेंसियाँ निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनसे पूछताछ कर सकती हैं,लेकिन इस अवधि के दौरान उनके खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया जाएगा। साथ ही न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि अभिषेक बनर्जी जाँच में पूरा सहयोग करें और अधिकारियों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब दें।
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में सीआईडी को भी महत्वपूर्ण अधिकार दिए हैं। अदालत ने कहा है कि यदि निष्पक्ष जाँच के लिए आवश्यक हो,तो एजेंसी छापेमारी और तलाशी अभियान चला सकती है। इससे जाँच अधिकारियों को मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों को एकत्र करने में मदद मिलेगी। न्यायालय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जाँच बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके और सभी तथ्यों की निष्पक्ष तरीके से जाँच हो।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव होने के कारण अभिषेक बनर्जी पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। ऐसे में उनके खिलाफ चल रही जाँच पर राजनीतिक दलों और आम जनता की नजर बनी हुई है।
विपक्षी दल इस मामले को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं और जाँच को तेज करने की माँग कर रहे हैं। वहीं तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और पार्टी न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करती है। पार्टी के नेताओं का दावा है कि जाँच के दौरान सभी आवश्यक तथ्यों को सामने रखा जाएगा और सच्चाई अंततः स्पष्ट हो जाएगी।
फिलहाल जाँच एजेंसी की नजर उन दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स पर है,जिनमें कथित तौर पर हस्ताक्षरों में अंतर पाया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इन दस्तावेजों की गहन जाँच से मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है। इसी उद्देश्य से अभिषेक बनर्जी को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
अब 14 जून को होने वाली अगली पूछताछ पर सबकी नजरें टिकी हैं। माना जा रहा है कि जाँच अधिकारी उन सवालों पर फिर से जवाब माँग सकते हैं,जिनका संतोषजनक स्पष्टीकरण उन्हें पहली पूछताछ में नहीं मिला। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अगली पूछताछ के दौरान क्या नए तथ्य सामने आते हैं और जाँच किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल मामला न्यायिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
