नई दिल्ली,19 जून (युआईटीवी)- राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के पुनर्परीक्षण से ठीक पहले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को बड़ा कानूनी झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को सही ठहराते हुए टेलीग्राम की याचिका खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले के बाद सरकार को बड़ी राहत मिली है,जबकि टेलीग्राम को अपने संचालन पर लगी अस्थायी रोक के खिलाफ कोई तत्काल राहत नहीं मिल सकी।
दिल्ली हाईकोर्ट की एकल पीठ ने शुक्रवार को इस मामले में अपना फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत केंद्र सरकार को ऐसे मामलों में कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है और उपलब्ध परिस्थितियों को देखते हुए सरकार का आदेश कानून के अनुरूप है। अदालत ने माना कि यदि राष्ट्रीय हित,सार्वजनिक व्यवस्था या किसी गंभीर अनियमितता को रोकने के लिए आवश्यक हो,तो सरकार किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अस्थायी प्रतिबंध लगा सकती है।
यह मामला उस समय सामने आया,जब केंद्र सरकार ने नीट पुनर्परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया था। सरकार का तर्क था कि परीक्षा से जुड़े पेपर लीक,संगठित नकल गिरोहों और अवैध नेटवर्कों द्वारा इस प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग की आशंका गंभीर रूप से बढ़ गई थी। अधिकारियों को यह चिंता थी कि पिछले नीट विवाद में शामिल कई समूह और नेटवर्क टेलीग्राम का उपयोग करके परीक्षा संबंधी गोपनीय सामग्री का आदान-प्रदान कर सकते हैं,जिससे परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
पिछले कुछ समय से नीट परीक्षा को लेकर देशभर में विवाद बना हुआ है। पेपर लीक, परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और संगठित नकल के आरोपों के बाद मूल परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया था। इसके बाद पुनर्परीक्षा की तैयारियों के बीच केंद्र सरकार ने सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने का निर्णय लिया। इसी क्रम में टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया और कुछ अतिरिक्त नियंत्रणात्मक कदम भी उठाए गए।
सरकार ने केवल प्लेटफॉर्म के संचालन पर सीमित अवधि का प्रतिबंध ही नहीं लगाया, बल्कि 30 जून तक पहले से भेजे गए संदेशों को संपादित करने की सुविधा भी बंद करने का निर्देश दिया। अधिकारियों का मानना था कि संदेश संपादन की सुविधा का उपयोग साक्ष्यों को बदलने,गलत जानकारी फैलाने या जाँच को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है। इसलिए परीक्षा अवधि के दौरान इस सुविधा को सीमित करना आवश्यक समझा गया।
यह कार्रवाई राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी की सिफारिशों के आधार पर की गई थी। एजेंसी ने परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई सुझाव दिए थे। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत निर्देश जारी करते हुए टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लागू किया।
हालाँकि,टेलीग्राम ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया और इसे अदालत में चुनौती दी। कंपनी की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि सरकार का आदेश कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण है और कानून इस प्रकार के भेदभावपूर्ण प्रतिबंध की अनुमति नहीं देता। टेलीग्राम ने अदालत को बताया कि उसके खिलाफ की गई कार्रवाई उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई है और यह डिजिटल प्लेटफॉर्मों के संचालन से जुड़े स्थापित सिद्धांतों के विपरीत है।
कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि समीक्षा समिति ने अंतरिम निर्देश की पुष्टि करने की सिफारिश की थी,लेकिन उस प्रक्रिया में कई कानूनी कमियाँ मौजूद थीं। टेलीग्राम का कहना था कि किसी संपूर्ण प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने के बजाय सरकार को केवल आपत्तिजनक या गैर-कानूनी सामग्री को हटाने जैसे सीमित उपाय अपनाने चाहिए थे। कंपनी ने अदालत से प्रतिबंध को रद्द करने और सेवाओं को बहाल करने की माँग की थी।
दूसरी ओर केंद्र सरकार ने अदालत के समक्ष अपने फैसले का जोरदार बचाव किया। सरकार ने कहा कि यह कदम अचानक नहीं उठाया गया था,बल्कि सभी उपलब्ध विकल्पों को आजमाने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया गया। सरकार के अनुसार,कई बार गैर-कानूनी सामग्री को हटाने के अनुरोध किए गए,लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। ऐसे में परीक्षा सुरक्षा और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करना आवश्यक हो गया।
केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि टेलीग्राम की तकनीकी संरचना और उसके माध्यम से परीक्षा धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में बार-बार हुए दुरुपयोग ने स्थिति को गंभीर बना दिया था। सरकार का कहना था कि जब अन्य उपाय प्रभावी साबित नहीं हुए,तब अस्थायी प्रतिबंध ही सबसे उपयुक्त विकल्प बचा था। अधिकारियों ने अदालत को बताया कि यह फैसला केवल परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी संभावित अनियमितता को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।
दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। मामले की संवेदनशीलता और परीक्षा से जुड़े व्यापक प्रभावों को देखते हुए अदालत ने सभी पहलुओं पर विचार किया। शुक्रवार को सुनाए गए फैसले में अदालत ने केंद्र सरकार के आदेश को बरकरार रखा और टेलीग्राम की याचिका को खारिज कर दिया।
अदालत के इस फैसले को नीट पुनर्परीक्षा की तैयारियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों का मानना है कि इस कदम से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। वहीं डिजिटल अधिकारों और इंटरनेट स्वतंत्रता से जुड़े कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।
फिलहाल अदालत के फैसले के बाद टेलीग्राम पर लगा अस्थायी प्रतिबंध प्रभावी रहेगा और केंद्र सरकार को अपनी परीक्षा सुरक्षा रणनीति लागू करने में कानूनी समर्थन मिल गया है। अब सभी की निगाहें आगामी नीट पुनर्परीक्षा पर टिकी हैं,जिसे निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक एजेंसियां व्यापक तैयारियों में जुटी हुई हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के इस निर्णय ने स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षा की शुचिता और सार्वजनिक हित से जुड़े मामलों में सरकार को कानून के तहत आवश्यक कदम उठाने का अधिकार प्राप्त है, बशर्ते वे निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप हों।
