दुष्कर्म

बेगूसराय में महिला से कथित सामूहिक दुष्कर्म और बर्बरता का मामला,चिकित्सकीय जाँच के बाद तेज हुई पुलिस कार्रवाई

बेगूसराय,19 जून (युआईटीवी)- बिहार के बेगूसराय जिले से सामने आए एक कथित सामूहिक दुष्कर्म और बर्बरता के मामले ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। एक महिला ने आरोप लगाया है कि उसके साथ पाँच लोगों ने न केवल सामूहिक दुष्कर्म किया,बल्कि उसके साथ अमानवीय व्यवहार भी किया। महिला के आरोपों और बाद में सामने आई चिकित्सकीय जाँच की रिपोर्ट के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जाँच शुरू कर दी गई है और पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की वैज्ञानिक तरीके से जाँच की जा रही है।

पीड़िता के अनुसार यह घटना 11 जून की रात की है। महिला का कहना है कि वह देर रात शौच के लिए घर से बाहर निकली थी। उसी दौरान कुछ लोगों ने उसे कथित तौर पर पकड़ लिया। महिला ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने पहले उसके पति को कमरे में बंद कर दिया और फिर उसे जबरन अपने कब्जे में ले लिया। पीड़िता का दावा है कि उसके हाथ-पैर बाँध दिए गए और उसे एक सुनसान स्थान की ओर ले जाया गया,जहाँ उसके साथ कथित रूप से सामूहिक दुष्कर्म किया गया।

महिला ने अपने बयान में कहा है कि घटना के दौरान उसके साथ मारपीट भी की गई। उसने आरोप लगाया कि आरोपियों ने उसके शरीर के विभिन्न हिस्सों पर धारदार वस्तु से चोट पहुँचाई। पीड़िता के अनुसार उसने लगातार विरोध किया और आरोपियों से उसे छोड़ देने की गुहार लगाती रही,लेकिन उसकी बात नहीं सुनी गई। महिला का कहना है कि घटना के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गई और बाद में बेहोशी जैसी स्थिति में पहुँच गई।

घटना के अगले दिन महिला को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। प्रारंभिक चिकित्सकीय जाँच के बाद उसका इलाज किया गया और बाद में उसे घर भेज दिया गया। हालाँकि,पीड़िता का कहना है कि अस्पताल से लौटने के बाद भी उसे लगातार असहनीय दर्द बना रहा। दर्द कम न होने के कारण वह कुछ दिनों बाद दोबारा अस्पताल पहुँची,जहाँ डॉक्टरों ने विस्तृत जाँच की।

अस्पताल सूत्रों के अनुसार दूसरी बार की गई जाँच के दौरान महिला के शरीर से कुछ बाहरी वस्तुएँ मिलने की बात सामने आई। चिकित्सकीय प्रक्रिया के बाद उन्हें निकाला गया। इस घटनाक्रम के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया और पुलिस ने जाँच की गति बढ़ा दी। अधिकारियों का कहना है कि चिकित्सकीय रिपोर्ट और फोरेंसिक साक्ष्यों का अध्ययन किया जा रहा है तथा किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले सभी तथ्यों का सावधानीपूर्वक परीक्षण किया जाएगा।

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद पुलिस की ओर से अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई। महिला का कहना है कि उसने घटना की जानकारी तुरंत दी थी,लेकिन शुरुआती स्तर पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं थी। उसके अनुसार प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी की दिशा में तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। महिला ने यह भी दावा किया है कि वह पहले भी कुछ आरोपियों की ओर से उत्पीड़न का शिकार हो चुकी है।

पीड़िता के अनुसार लगभग तीन महीने पहले भी कुछ लोगों ने उसके घर में घुसकर उसके साथ कथित दुष्कर्म का प्रयास किया था। महिला का कहना है कि उस दौरान उसके साथ मारपीट की गई थी और घर में रखे सामान तथा कीमती वस्तुओं के बारे में पूछताछ की गई थी। उसने आरोप लगाया कि उस मामले की सूचना भी पुलिस को दी गई थी,लेकिन उसे न्याय नहीं मिल पाया। महिला का दावा है कि पहले की घटना में शामिल कुछ लोग ही वर्तमान मामले में भी शामिल हैं।

मामले के सार्वजनिक होने के बाद पुलिस प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है। जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने अस्पताल पहुँचकर पीड़िता का बयान दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों ने महिला से दोबारा बातचीत कर घटनाक्रम की जानकारी ली और चिकित्सकीय रिपोर्ट से जुड़े तथ्यों की भी समीक्षा की। अधिकारियों का कहना है कि जाँच को किसी एक पहलू तक सीमित नहीं रखा जाएगा और प्रत्येक आरोप की अलग-अलग पुष्टि की जाएगी।

सदर अनुमंडल के पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि मामले की जाँच वैज्ञानिक दृष्टिकोण से की जा रही है। पुलिस के अनुसार पीड़िता के बयान,चिकित्सकीय रिपोर्ट,घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य,फोरेंसिक जाँच और अन्य उपलब्ध प्रमाणों को एक साथ जोड़कर पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि जाँच में किसी स्तर पर पुलिसकर्मियों की लापरवाही सामने आती है,तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस का कहना है कि पीड़िता ने न्यायालय के समक्ष दिए गए बयान में भी अपने साथ दुष्कर्म किए जाने की बात कही है। ऐसे में जाँच एजेंसियाँ इस मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि आरोप प्रमाणित होते हैं,तो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ त्वरित न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

इस मामले ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया भी पैदा की है। घटना की जानकारी सामने आने के बाद कई सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने अस्पताल पहुँचकर पीड़िता से मुलाकात की। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जाँच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की माँग की है। विभिन्न संगठनों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

महिला सुरक्षा को लेकर एक बार फिर कई सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पीड़िता के पहले के आरोपों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई होती,तो संभव है कि स्थिति यहाँ तक न पहुँचती। हालाँकि,इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जाँच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल पुलिस पुराने और नए दोनों मामलों के रिकॉर्ड खंगाल रही है,ताकि घटनाओं के बीच किसी संभावित संबंध का पता लगाया जा सके।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में चिकित्सकीय साक्ष्य,पीड़िता का बयान और फोरेंसिक रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए जाँच एजेंसियों के लिए जरूरी है कि वे प्रत्येक तथ्य की सावधानीपूर्वक पुष्टि करें। किसी भी आपराधिक मामले में आरोप और साक्ष्य के बीच संतुलन बनाए रखना न्यायिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा होता है। यही कारण है कि पुलिस अभी सभी तथ्यों को एकत्र करने में जुटी हुई है।

अस्पताल में उपचार के दौरान पीड़िता ने बताया कि उसे अब भी दर्द और मानसिक आघात का सामना करना पड़ रहा है। चिकित्सकों की एक टीम उसके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सहायता लेने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है,क्योंकि ऐसे मामलों में शारीरिक उपचार के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक सहयोग भी अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

इस पूरे मामले ने जिले में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर बहस को तेज कर दिया है। लोगों की माँग है कि जाँच जल्द-से-जल्द पूरी की जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं,तो दोषियों को कठोर सजा दिलाई जाए। वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि जाँच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी तथा किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

फिलहाल बेगूसराय का यह मामला राज्यभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस जाँच,चिकित्सकीय रिपोर्ट और फोरेंसिक विश्लेषण के नतीजों का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में जाँच की दिशा और उसमें सामने आने वाले तथ्यों से यह स्पष्ट होगा कि घटना की पूरी सच्चाई क्या है और आरोपों के समर्थन में कितने प्रमाण उपलब्ध हैं। तब तक प्रशासन,पुलिस और स्वास्थ्य विभाग सभी इस संवेदनशील मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।