नई दिल्ली,20 जून (युआईटीवी)- भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए शुक्रवार का कारोबारी सत्र बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। वैश्विक तकनीकी और परामर्श सेवाएँ प्रदान करने वाली कंपनी एक्सेंचर द्वारा कारोबार को लेकर अपेक्षाकृत कमजोर आउटलुक जारी किए जाने के बाद भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। इस गिरावट ने एक बार फिर यह चिंता बढ़ा दी है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और ग्राहकों के खर्च में सुस्ती का असर आने वाले समय में भारतीय आईटी उद्योग की वृद्धि पर पड़ सकता है।
शेयर बाजार में आई इस कमजोरी का प्रभाव केवल कुछ चुनिंदा कंपनियों तक सीमित नहीं रहा,बल्कि बड़े और छोटे दोनों वर्गों की आईटी कंपनियों पर इसका असर दिखाई दिया। कई प्रमुख कंपनियों के शेयर अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से भारी गिरावट दर्ज कर चुके हैं। निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिन कंपनियों को लंबे समय तक स्थिर और मजबूत विकास का प्रतीक माना जाता था,वे भी अब दबाव में दिखाई दे रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार,देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनियों में शामिल टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज का शेयर अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से लगभग 55 प्रतिशत तक नीचे आ चुका है। इसी तरह विप्रो के शेयर में 52 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इन्फोसिस और एलटीआई माइंडट्री जैसी प्रमुख कंपनियाँ भी इस दबाव से बच नहीं सकीं और उनके शेयरों में क्रमशः 48 प्रतिशत और 50 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली है। यह स्थिति दर्शाती है कि निवेशक फिलहाल पूरे आईटी क्षेत्र को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि बड़े आईटी शेयरों में गिरावट चिंताजनक है,लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों की स्थिति उससे भी अधिक चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। हैप्पीएस्ट माइंड का शेयर अपने उच्चतम स्तर से करीब 78 प्रतिशत तक गिर चुका है। इसी तरह न्यूजेन सॉफ्टवेयर में 74 प्रतिशत और सोनाटा सॉफ्टवेयर में लगभग 66 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह आँकड़े इस बात का संकेत हैं कि छोटी और मध्यम आकार की आईटी कंपनियाँ निवेशकों के भरोसे में आई कमी का ज्यादा शिकार हुई हैं।
इसके अलावा बिड़लासॉफ्ट,टाटा एल्क्सी और केपीआईटी टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियों के शेयर भी अपने रिकॉर्ड स्तर से 60 प्रतिशत से अधिक फिसल चुके हैं। न्यूक्लियस सॉफ्टवेयर,मास्टेक और जेंसार टेक्नोलॉजीज के शेयरों का मूल्य भी लगभग आधा रह गया है। इन कंपनियों में आई गिरावट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बाजार फिलहाल आईटी क्षेत्र की निकट भविष्य की संभावनाओं को लेकर आश्वस्त नहीं है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत एक्सेंचर के कमजोर कारोबारी संकेतों से हुई। कंपनी ने मौजूदा तिमाही के लिए अपने राजस्व अनुमान में कटौती की है। हालाँकि,कंपनी ने लाभप्रदता बनाए रखी है,लेकिन भविष्य को लेकर दिए गए सतर्क संकेतों ने निवेशकों को निराश कर दिया। चूँकि,एक्सेंचर को वैश्विक आईटी सेवाओं की माँग का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है,इसलिए उसके अनुमान का असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी तुरंत दिखाई दिया।
भारतीय आईटी उद्योग की आय का बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों,विशेषकर अमेरिका से आता है। अनुमान के अनुसार,इस क्षेत्र की कुल आय का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा अमेरिकी बाजार से प्राप्त होता है। ऐसे में यदि अमेरिकी कंपनियाँ तकनीकी खर्च को सीमित करती हैं या नई परियोजनाओं को टालती हैं,तो इसका सीधा प्रभाव भारतीय कंपनियों की आय और विकास दर पर पड़ता है।
निवेश बैंक मॉर्गन स्टेनली ने भी इस स्थिति को लेकर चिंता जताई है। बैंक का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बनी हुई अनिश्चितता का असर आगामी तिमाहियों में भी देखने को मिल सकता है। इसके चलते भारतीय आईटी कंपनियों के वित्त वर्ष 2027 के विकास अनुमान और मार्गदर्शन पर दबाव बना रह सकता है। विश्लेषकों के अनुसार,यदि बड़े ग्राहक अपने खर्च में कटौती जारी रखते हैं,तो नई परियोजनाओं की संख्या में कमी आ सकती है और मौजूदा अनुबंधों के विस्तार की गति भी धीमी पड़ सकती है।
एचएसबीसी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा कमजोरी का प्रमुख कारण कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी उत्पादकता चिंताएँ नहीं हैं,बल्कि भू-राजनीतिक अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक माहौल है। हाल के वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते तनाव,व्यापारिक अनिश्चितता और आर्थिक सुस्ती ने कंपनियों को अपने खर्चों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। इसका असर तकनीकी सेवाओं पर होने वाले निवेश पर भी पड़ा है।
हालाँकि,कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि आईटी क्षेत्र के मूल्यांकन अब अपेक्षाकृत आकर्षक स्तरों पर पहुँचने लगे हैं। लगातार गिरावट के बाद कई कंपनियों के शेयर पहले की तुलना में काफी सस्ते दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद निवेशकों की चिंता यह है कि निकट भविष्य में ऐसा कोई बड़ा कारक दिखाई नहीं दे रहा जो इस क्षेत्र में तेजी से वृद्धि को प्रेरित कर सके। यही कारण है कि निवेशक फिलहाल सतर्कता बरत रहे हैं और बड़े निवेश निर्णय लेने से बच रहे हैं।
पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी भी आईटी क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। ऊँची ब्याज दरों से आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ता है और मंदी का खतरा पैदा होता है। ऐसी स्थिति में कंपनियाँ अपने गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करती हैं और नई तकनीकी परियोजनाओं को टालने लगती हैं। इससे भारतीय आईटी कंपनियों को मिलने वाले नए अनुबंधों की संख्या प्रभावित हो सकती है।
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि भारत की शीर्ष आईटी कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे और वित्त वर्ष 2027 के लिए दिए गए अनुमान भी बाजार की उम्मीदों से कमजोर रहे हैं। इससे निवेशकों का भरोसा और प्रभावित हुआ है। जब कंपनियाँ स्वयं भविष्य को लेकर सतर्क रुख अपनाती हैं,तो बाजार भी उसी के अनुसार प्रतिक्रिया देता है।
करीब 26 लाख करोड़ रुपये के मूल्यांकन वाला भारतीय आईटी क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है। यह क्षेत्र न केवल लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है,बल्कि भारत की सेवा निर्यात आय में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। ऐसे में इस क्षेत्र में जारी कमजोरी पर निवेशकों,नीति निर्माताओं और उद्योग जगत की नजर बनी हुई है।
फिलहाल बाजार का रुख यह संकेत देता है कि निवेशक वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और अमेरिकी बाजार से आने वाले संकेतों पर करीबी नजर रखेंगे। यदि आने वाले महीनों में माँग में सुधार और नई परियोजनाओं की घोषणा होती है,तो आईटी शेयरों में फिर से मजबूती लौट सकती है,लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता,तब तक इस क्षेत्र में उतार-चढ़ाव और दबाव बने रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
