लखनऊ के कोचिंग सेंटर में भीषण आग (तस्वीर क्रेडिट@Arabian__KGB)

लखनऊ के कोचिंग सेंटर में भीषण आग,14 छात्रों की मौत; बचाव अभियान जारी,प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जताया शोक

लखनऊ,23 जून (युआईटीवी)- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सोमवार को एक दर्दनाक हादसे का गवाह बनी,जब अलीगंज क्षेत्र के पुरानिया इलाके में स्थित एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने से कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में अधिकांश छात्र बताए जा रहे हैं,जिनकी उम्र 20 से 24 वर्ष के बीच थी। इस हादसे में कई अन्य छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं,जबकि कुछ समय तक कई लोग इमारत के भीतर फँसे रहे। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बचाव एजेंसियों को बड़े पैमाने पर राहत अभियान चलाना पड़ा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार,सोमवार दोपहर को कोचिंग सेंटर में सामान्य रूप से कक्षाएँ चल रही थीं। इसी दौरान अचानक इमारत से धुआँ निकलता दिखाई दिया। शुरुआती क्षणों में लोगों को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा नहीं था,लेकिन कुछ ही मिनटों में आग तेजी से फैलने लगी। देखते ही देखते पूरा परिसर घने धुएँ और लपटों से घिर गया। आग के कारण इमारत के अंदर मौजूद छात्रों और कर्मचारियों में भगदड़ मच गई। कई लोग बाहर निकलने का रास्ता तलाशने लगे,लेकिन धुएँ और आग ने निकास मार्गों को अवरुद्ध कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार,आग इतनी तेजी से फैली कि छात्रों को सँभलने का मौका तक नहीं मिला। जैसे-जैसे धुआँ बढ़ता गया,सांस लेना मुश्किल हो गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए इमारत की ऊपरी मंजिलों तथा छत की ओर भागने लगे। कई छात्रों ने मदद के लिए खिड़कियों से आवाज लगाई। कुछ ने भय और घबराहट में ऊँचाई से नीचे छलांग लगा दी,जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।

स्थानीय लोगों ने सबसे पहले घटना की सूचना पुलिस और दमकल विभाग को दी। सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियाँ मौके पर पहुँचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। पुलिस,आपदा प्रबंधन दल और चिकित्सा टीमों को भी तुरंत घटनास्थल पर भेजा गया। बचावकर्मियों ने इमारत के भीतर फँसे लोगों को बाहर निकालने के लिए सीढ़ियों और विशेष उपकरणों का उपयोग किया। कई घंटों तक चले अभियान के बाद आग पर काबू पाया जा सका।

घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को घटनास्थल पर पहुँचने और राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सरकार पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और घायलों के उपचार के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अधिकारियों को घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

इस दर्दनाक हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि लखनऊ में हुई इस भीषण अग्निकांड की घटना से वह अत्यंत व्यथित हैं। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि बचाव अभियान जारी है और प्रशासन प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध करा रहा है।

प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा भी की। इसके अलावा घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से यह सहायता पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत देने के उद्देश्य से घोषित की गई है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी हादसे पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में कोचिंग सेंटर में लगी आग की घटना अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन समय में उनकी भावनाएँ शोकाकुल परिवारों के साथ हैं। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी इस घटना को अत्यंत दुखद बताया। उन्होंने कहा कि इस हादसे में हुई जानमाल की क्षति बेहद पीड़ादायक है और उनकी संवेदनाएँ सभी प्रभावित परिवारों के साथ हैं। उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की और राहत कार्यों में जुटी टीमों के प्रयासों की सराहना की।

घटना के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया। जिला मजिस्ट्रेट,पुलिस आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुँचे और राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी की। आसपास के अस्पतालों में आपातकालीन व्यवस्था लागू कर दी गई,ताकि घायलों को तत्काल उपचार मिल सके। कई एंबुलेंस लगातार घायलों को अस्पताल पहुँचाने में लगी रहीं।

स्थानीय लोगों के अनुसार,आग लगने के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया था। इमारत से उठता धुएँ का गुबार कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दे रहा था। आसपास के दुकानदार और निवासी भी मौके पर एकत्र हो गए। कई लोगों ने अपने स्तर पर बचाव कार्य में सहयोग करने का प्रयास किया और फँसे हुए छात्रों को बाहर निकालने में मदद की।

फिलहाल आग लगने के कारणों की जाँच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक आशंका है कि किसी तकनीकी खराबी या विद्युत शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी हो सकती है,हालाँकि ,अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जाँच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। विशेषज्ञों की टीम इमारत की संरचना,विद्युत व्यवस्था और सुरक्षा मानकों की जाँच कर रही है।

इस हादसे ने एक बार फिर सार्वजनिक इमारतों और शैक्षणिक संस्थानों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं से बचने के लिए नियमित सुरक्षा ऑडिट,पर्याप्त निकास मार्ग,अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और आपातकालीन प्रशिक्षण अनिवार्य होना चाहिए। यदि सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए,तो इस प्रकार की त्रासदियों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

लखनऊ में हुए इस हृदयविदारक हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है। जिन परिवारों ने अपने बच्चों को बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ कोचिंग सेंटर भेजा था,उनके लिए यह घटना जीवनभर का दुख बन गई है। राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी हैं और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। वहीं,पूरे देश की निगाहें अब जाँच रिपोर्ट पर टिकी हैं,जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर इतनी बड़ी त्रासदी के पीछे क्या कारण थे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएँगे।