संयुक्त राष्ट्र,24 जून (युआईटीवी)- संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एचआईवी/एड्स के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को नई दिशा देते हुए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घोषणा को अपनाया है। इस घोषणा के माध्यम से दुनिया भर के देशों ने वर्ष 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है,जब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस बात को लेकर चिंतित है कि दुनिया वर्ष 2025 के लिए निर्धारित वैश्विक एचआईवी लक्ष्यों को हासिल करने में पीछे रह गई है और वर्तमान गति के साथ वर्ष 2030 तक एड्स उन्मूलन का लक्ष्य हासिल करना चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रहा है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस राजनीतिक घोषणा को व्यापक समर्थन मिला। कुल 149 देशों ने इसके पक्ष में मतदान किया,जबकि 8 देशों ने इसका विरोध किया और 14 देश मतदान प्रक्रिया से अनुपस्थित रहे। इस समर्थन को वैश्विक स्वास्थ्य और मानव कल्याण के प्रति अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की साझा प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है। घोषणा में यह स्वीकार किया गया है कि पिछले वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद अभी भी कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं,जिनसे निपटने के लिए तेज,समन्वित और प्रभावी प्रयासों की आवश्यकता है।
घोषणा में एचआईवी/एड्स के खिलाफ पिछले ढाई दशकों से जारी वैश्विक प्रयासों को भी रेखांकित किया गया है। इसमें वर्ष 2001 में अपनाई गई एचआईवी/एड्स पर प्रतिबद्धता घोषणा तथा वर्ष 2006, 2011, 2016 और 2021 में पारित राजनीतिक घोषणाओं की पुनर्पुष्टि की गई है। साथ ही,सतत विकास लक्ष्यों के अंतर्गत निर्धारित उस लक्ष्य को भी दोहराया गया है,जिसके तहत वर्ष 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में समाप्त करना शामिल है।
नई राजनीतिक घोषणा में अगले पाँच वर्षों के लिए एक व्यापक कार्ययोजना का संकेत दिया गया है। इसके तहत देशों ने साक्ष्य-आधारित,लोगों पर केंद्रित और समन्वित वैश्विक एचआईवी प्रतिक्रिया को मजबूत करने का संकल्प लिया है। घोषणा में यह भी कहा गया है कि एचआईवी से प्रभावित लोगों की जरूरतों को केंद्र में रखकर नीतियाँ बनाई जाएँगी और स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुँच को और बेहतर बनाया जाएगा। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है,जो बहुक्षेत्रीय दृष्टिकोण अपनाते हों और जिनका नेतृत्व स्वयं देश करें।
विशेष रूप से इस बात पर बल दिया गया है कि एचआईवी से निपटने के लिए केवल स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। शिक्षा,सामाजिक सुरक्षा,लैंगिक समानता, मानवाधिकार संरक्षण और आर्थिक विकास जैसे क्षेत्रों को भी इस लड़ाई का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा। घोषणा में कहा गया है कि यदि देशों के नेतृत्व और स्वामित्व को मजबूत किया जाता है तथा समुदायों को निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी दी जाती है,तो एचआईवी संक्रमण और एड्स से होने वाली मौतों को और तेजी से कम किया जा सकता है।
इस राजनीतिक घोषणा के तहत संयुक्त राष्ट्र महासभा वर्ष 2031 में एचआईवी/एड्स पर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करेगी। इस बैठक का उद्देश्य वर्ष 2026 में किए गए वादों और प्रतिबद्धताओं की समीक्षा करना होगा। साथ ही यह आकलन किया जाएगा कि दुनिया वर्ष 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में समाप्त करने के लक्ष्य की दिशा में कितनी सफल रही है और भविष्य में इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए किन कदमों की आवश्यकता होगी।
संयुक्त राष्ट्र एचआईवी/एड्स संयुक्त कार्यक्रम की कार्यकारी निदेशक विनी ब्यान्यिमा ने इस अवसर पर कहा कि यह राजनीतिक घोषणा पिछले 25 वर्षों की वैश्विक प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक दुनिया यह साबित कर सकती है कि बहुपक्षीय सहयोग और साझा प्रयास वास्तव में परिणाम देने में सक्षम हैं। उनके अनुसार,एचआईवी/एड्स के खिलाफ लड़ाई में सफलता के लिए देशों को बहुपक्षवाद के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखनी होगी और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सहायता को भी जारी रखना होगा।
विनी ब्यान्यिमा ने यह भी कहा कि एचआईवी से प्रभावित लोगों के अधिकारों की रक्षा करना और समुदायों को नेतृत्व की भूमिका देना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विज्ञान और नवाचार की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों को तेजी से जरूरतमंद लोगों तक पहुँचाना होगा। उनका मानना है कि यदि वैश्विक समुदाय इन प्राथमिकताओं पर मिलकर काम करता है,तो एड्स का अंत एक वास्तविक उपलब्धि बन सकता है।
हालाँकि,घोषणा में व्यक्त चिंता यह भी दर्शाती है कि अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। कई देशों में स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुँच,सामाजिक भेदभाव,आर्थिक असमानता और पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की कमी जैसी समस्याएँ एचआईवी नियंत्रण के प्रयासों में बाधा बन रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन चुनौतियों का समय रहते समाधान नहीं किया गया,तो वर्ष 2030 का लक्ष्य हासिल करना कठिन हो सकता है।
इसके बावजूद वैश्विक स्तर पर हुई प्रगति उम्मीद जगाने वाली है। संयुक्त राष्ट्र एचआईवी/एड्स संयुक्त कार्यक्रम द्वारा वर्ष 2025 में जारी आँकड़ों के अनुसार,लगातार निवेश, वैज्ञानिक प्रगति और समुदाय आधारित पहलों के कारण एड्स के खिलाफ लड़ाई में उल्लेखनीय सफलता मिली है। वर्ष 2010 के बाद से एड्स से संबंधित मौतों में 56 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसी अवधि में नए एचआईवी संक्रमणों में 43 प्रतिशत की गिरावट आई है,जो इस क्षेत्र में किए गए प्रयासों की प्रभावशीलता को दर्शाती है।
आँकड़ों के अनुसार,वर्तमान में दुनिया भर में लगभग 4 करोड़ 9 लाख लोग एचआईवी के साथ जीवन जी रहे हैं। इनमें से 3 करोड़ 21 लाख लोग उपचार प्राप्त कर रहे हैं,जो कुल संक्रमित आबादी का लगभग 78 प्रतिशत है। विशेषज्ञों का कहना है कि उपचार की उपलब्धता में यह वृद्धि संक्रमण को नियंत्रित करने और रोगियों के जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाई गई यह नई राजनीतिक घोषणा वैश्विक स्वास्थ्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यह केवल एक नीति दस्तावेज नहीं, बल्कि दुनिया भर के देशों के लिए एक साझा रोडमैप है,जिसका उद्देश्य लाखों लोगों के जीवन को सुरक्षित बनाना और आने वाली पीढ़ियों को एड्स जैसी गंभीर चुनौती से मुक्त करना है। अब पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले वर्षों में देश अपनी प्रतिबद्धताओं को किस हद तक व्यवहार में बदल पाते हैं और क्या वास्तव में वर्ष 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में समाप्त करने का ऐतिहासिक लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।
