नई दिल्ली,24 जून (युआईटीवी)- देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कारों का भव्य समारोह मंगलवार को राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित किया गया,जहाँ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वाली 65 हस्तियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर देश के राजनीतिक,सामाजिक,सांस्कृतिक,वैज्ञानिक और खेल जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियाँ मौजूद रहीं। समारोह न केवल पुरस्कार वितरण का आयोजन था,बल्कि उन व्यक्तित्वों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी था,जिन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से समाज और राष्ट्र के विकास में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला,केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई वरिष्ठ नेता और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एक-एक कर सभी पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया और उनके योगदान की सराहना की। पूरे समारोह के दौरान गरिमा,सम्मान और गौरव का वातावरण देखने को मिला।
इस वर्ष राष्ट्रपति द्वारा कुल 65 पद्म पुरस्कार प्रदान किए गए। इनमें दो पद्म विभूषण, सात पद्म भूषण और 56 पद्मश्री पुरस्कार शामिल रहे। ये सम्मान उन व्यक्तित्वों को दिए गए जिन्होंने खेल,साहित्य,शिक्षा,विज्ञान,चिकित्सा,कला,समाज सेवा,सार्वजनिक जीवन और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करते हुए देश और समाज को नई दिशा प्रदान की है।
समारोह में सबसे प्रतिष्ठित सम्मान पद्म विभूषण से सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश केटी थॉमस को सम्मानित किया गया। उन्हें जनसेवा और न्यायिक क्षेत्र में लंबे समय तक दिए गए योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया। न्यायपालिका में उनके योगदान को देशभर में सराहा जाता रहा है और उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में अपने निर्णयों से न्याय व्यवस्था को मजबूत करने में भूमिका निभाई है।
दूसरा पद्म विभूषण सम्मान वरिष्ठ मलयालम पत्रकार पी. नारायणन को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। पत्रकारिता और साहित्य के माध्यम से समाज को जागरूक बनाने तथा शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया।
पद्म भूषण सम्मान प्राप्त करने वालों में कई चर्चित और प्रतिष्ठित नाम शामिल रहे। प्रसिद्ध पार्श्व गायिका अलका याग्निक को भारतीय संगीत जगत में उनके दशकों लंबे योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उनकी आवाज ने भारतीय सिनेमा के अनेक यादगार गीतों को अमर बनाया है। मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ममूटी को भी पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। अपने चार दशक से अधिक लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने अनेक यादगार भूमिकाएँ निभाईं और भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया।
खेल जगत से पूर्व टेनिस खिलाड़ी विजय अमृतराज को पद्म भूषण प्रदान किया गया। उन्होंने न केवल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया,बल्कि खेल के विकास और सामाजिक कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सा क्षेत्र में अमेरिकी कैंसर विशेषज्ञ दत्तात्रेयुडु नोरी को भी इस सम्मान से नवाजा गया। कैंसर उपचार और अनुसंधान के क्षेत्र में उनके योगदान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है।
उद्योग जगत से एसकेएम मैइलानंदन तथा समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले वेल्लापल्ली नटेसन को भी पद्म भूषण प्रदान किया गया। इन दोनों व्यक्तित्वों ने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल करते हुए समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
समारोह का एक भावुक क्षण तब देखने को मिला,जब झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। उनकी ओर से उनकी पत्नी रूपी सोरेन ने यह सम्मान ग्रहण किया। व्हीलचेयर पर मंच तक पहुँचीं रूपी सोरेन को सम्मान प्रदान करने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु स्वयं मंच से नीचे उतरीं। राष्ट्रपति के इस मानवीय और संवेदनशील व्यवहार ने उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया और पूरे सभागार में तालियों की गूँज सुनाई दी। यह दृश्य समारोह के सबसे यादगार क्षणों में शामिल रहा।
पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त करने वालों में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा प्रमुख आकर्षण रहे। हाल के वर्षों में भारतीय क्रिकेट को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। विशेष रूप से उनकी कप्तानी में भारत ने 2024 का टी-20 विश्व कप जीतकर इतिहास रचा था। खेल के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें पद्मश्री सम्मान प्रदान किया गया।
भारतीय महिला हॉकी टीम की अनुभवी खिलाड़ी सविता पूनिया को भी पद्मश्री से सम्मानित किया गया। लंबे समय से भारतीय महिला हॉकी की मजबूत स्तंभ रही सविता ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन किया है। उनकी उपलब्धियाँ युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत मानी जाती हैं।
पहलवानी के क्षेत्र में कई भारतीय खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय सफलता दिलाने वाले जॉर्जियाई प्रशिक्षक व्लादिमीर मेस्तविरीश्विली को मरणोपरांत पद्मश्री प्रदान किया गया। उनकी पत्नी ने राष्ट्रपति के हाथों यह सम्मान ग्रहण किया। भारतीय कुश्ती को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
फिल्म जगत से अभिनेता आर. माधवन को भी पद्मश्री सम्मान प्रदान किया गया। अभिनय के साथ-साथ निर्देशन और निर्माण के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। भारतीय सिनेमा में उनके बहुआयामी योगदान को देखते हुए उन्हें इस सम्मान से नवाजा गया।
विज्ञान और रक्षा अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला के एयरोस्पेस वैज्ञानिक चंद्रमौली गड्डमानुनु को भी पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उन्होंने देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आकाश मिसाइल प्रणाली की तैनाती और तकनीकी संचालन में उनका योगदान उल्लेखनीय माना गया।
साहित्य के क्षेत्र में दलित साहित्यकार अशोक कुमार हलधर को पद्मश्री प्रदान किया गया। उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों की आवाज को प्रमुखता से उठाया और साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया। उनके कार्यों को साहित्यिक जगत में व्यापक सम्मान प्राप्त है।
समारोह में अभिनेता सतीश शाह को मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान दिया गया। उनकी ओर से उनके भाई ने पुरस्कार ग्रहण किया। भारतीय सिनेमा और टेलीविजन में उनके योगदान को दर्शकों ने हमेशा सराहा है। हास्य अभिनय के क्षेत्र में उनकी पहचान विशेष रही है और उन्होंने अपने अभिनय से लाखों लोगों का मनोरंजन किया।
प्रसार भारती के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा वर्तमान में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष शशि शेखर वेम्पति को भी पद्मश्री से सम्मानित किया गया। मीडिया,संचार और सार्वजनिक प्रसारण के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।
समारोह में भारत की सांस्कृतिक विविधता भी देखने को मिली। नगालैंड के 83 वर्षीय लोक कलाकार गुरु सांग्युसांग पोंगेनर पारंपरिक पोशाक में जब सम्मान ग्रहण करने पहुँचे,तो पूरे सभागार ने तालियों से उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित उपस्थित सभी लोगों ने खड़े होकर उनका अभिनंदन किया। यह दृश्य देश की लोक कलाओं और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान को दर्शाने वाला था।
इसी तरह छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की समाजसेवी बुधरी ताती भी अपनी पारंपरिक वेशभूषा में सम्मान ग्रहण करने पहुँचीं। उन्होंने ऐसे क्षेत्र में शिक्षा और महिला सशक्तीकरण के लिए कार्य किया,जो कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। उनके प्रयासों ने अनेक महिलाओं और बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है। उनका सम्मान इस बात का प्रतीक बना कि समाज के दूरस्थ क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोग भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्राप्त कर सकते हैं।
समारोह समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई पुरस्कार विजेताओं से मुलाकात की। उन्होंने अभिनेता ममूटी और उनके परिवार के साथ भी बातचीत की। बाद में सोशल मीडिया मंच एक्स पर उन्होंने लिखा कि सभी पद्म पुरस्कार विजेता समाज के प्रति समर्पण, सेवा और उत्कृष्टता की भावना के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि इन हस्तियों की जीवन यात्रा लाखों लोगों को प्रेरित करती है और यह साबित करती है कि कठिन परिश्रम,समर्पण और निरंतर प्रयासों के बल पर असाधारण उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सभी सम्मानित व्यक्तित्वों को बधाई दी और कहा कि देश उनके योगदान के लिए सदैव कृतज्ञ रहेगा। उन्होंने कहा कि पद्म पुरस्कार केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का सम्मान नहीं हैं,बल्कि उन मूल्यों और आदर्शों का भी सम्मान हैं,जो राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित यह भव्य समारोह देश की विविध प्रतिभाओं,असाधारण उपलब्धियों और समर्पित सेवाओं को सम्मान देने का एक प्रेरणादायक अवसर बनकर सामने आया। यह आयोजन इस बात का प्रतीक रहा कि भारत अपने उन नागरिकों को कभी नहीं भूलता,जिन्होंने अपने कार्यों से समाज,संस्कृति,विज्ञान,खेल और राष्ट्र के विकास में अमिट योगदान दिया है। पद्म पुरस्कारों से सम्मानित ये सभी हस्तियाँ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी और उनके कार्य देश के विकास की यात्रा में मार्गदर्शक का कार्य करते रहेंगे।
