सुप्रीम कोर्ट में कथित हंगामे के मामले में लखनऊ विश्वविद्यालय के दो विधि छात्र गिरफ्तार (तस्वीर क्रेडिट@DeccanHerald)

सुप्रीम कोर्ट में कथित हंगामे के मामले में लखनऊ विश्वविद्यालय के दो विधि छात्र गिरफ्तार,अदालत की गरिमा भंग करने के आरोपों की जाँच तेज

नई दिल्ली,15 जुलाई (युआईटीवी)- सुप्रीम कोर्ट में 10 जुलाई को कथित रूप से हुई अव्यवस्था और हंगामे के मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय के विधि संकाय के दो छात्रों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई अदालत परिसर में हुई उस घटना के बाद की गई,जिसमें सुनवाई के दौरान कथित तौर पर न्यायिक प्रक्रिया में व्यवधान डालने,अभद्र व्यवहार करने और सुरक्षा कर्मियों के साथ धक्का-मुक्की करने के आरोप लगाए गए हैं। मामले ने देश की सर्वोच्च अदालत की सुरक्षा व्यवस्था,न्यायालय की गरिमा और अदालत परिसर में अनुशासन बनाए रखने के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

दिल्ली पुलिस के अनुसार,इस मामले में तिलक मार्ग थाना में सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा स्टाफ की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 10 जुलाई को कोर्ट नंबर-13 में चल रही एक महत्वपूर्ण याचिका की सुनवाई के दौरान दो व्यक्तियों ने ऐसा व्यवहार किया,जिससे अदालत की कार्यवाही बाधित हुई और न्यायालय का सामान्य माहौल प्रभावित हुआ। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर जाँच शुरू की और आवश्यक साक्ष्य जुटाने के बाद दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक,घटना उस समय हुई जब एक विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई चल रही थी। आरोप है कि याचिकाकर्ता के रूप में स्वयं पेश हुए प्रबल प्रताप सिंह ने अदालत की कार्यवाही के दौरान जानबूझकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं, उन्होंने कोर्ट रूम के भीतर कागज फेंककर कथित रूप से अव्यवस्था फैलाने का प्रयास किया। अदालत में मौजूद लोगों के अनुसार,इस घटना से कुछ समय के लिए न्यायिक कार्यवाही का वातावरण प्रभावित हुआ।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि जब सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा कर्मियों और अन्य कर्मचारियों ने उन्हें शांत रहने तथा अदालत की गरिमा बनाए रखने के लिए समझाने की कोशिश की,तब उन्होंने निर्देशों का पालन नहीं किया। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा कर्मी के साथ कथित तौर पर जबरदस्ती की,जिससे सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न हुई। सुरक्षा कर्मचारियों ने तत्काल स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया और घटना की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी।

घटना के बाद अदालत परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। न्यायालय परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम होने के बावजूद इस प्रकार की घटना सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने भी मामले को गंभीरता से लिया। पुलिस ने कहा कि अदालत की कार्यवाही के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करती है,इसलिए पूरे मामले की विस्तृत जाँच की जा रही है।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद दोनों आरोपियों का इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज में चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। मेडिकल जाँच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि आरोपियों की मानसिक स्थिति सामान्य है या नहीं। मेडिकल रिपोर्ट में चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि दोनों को तत्काल किसी मनोचिकित्सकीय उपचार की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद पुलिस ने आगे की कानूनी प्रक्रिया को जारी रखा।

जाँच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से कुछ ऐसे पर्चे भी बरामद किए हैं,जिनमें कथित रूप से आपत्तिजनक शब्द लिखे हुए थे। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन पर्चों का उद्देश्य क्या था और क्या इन्हें अदालत परिसर में वितरित करने या किसी विशेष विरोध प्रदर्शन के लिए तैयार किया गया था। बरामद सामग्री को जाँच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है और उसकी फोरेंसिक तथा अन्य कानूनी जाँच भी कराई जा रही है।

पुलिस के अनुसार,गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान 24 वर्षीय प्रबल प्रताप सिंह और 23 वर्षीय चंद्र भान के रूप में हुई है। दोनों लखनऊ विश्वविद्यालय में विधि की पढ़ाई कर रहे हैं। प्रबल प्रताप सिंह तीसरे वर्ष के छात्र हैं,जबकि चंद्र भान दूसरे वर्ष में अध्ययनरत हैं। पुलिस अब यह भी जाँच कर रही है कि दोनों ने इस घटना की पूर्व योजना बनाई थी या नहीं तथा क्या किसी अन्य व्यक्ति की भी इसमें भूमिका रही है।

गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने उन्हें दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया,ताकि जाँच एजेंसियाँ उनसे विस्तृत पूछताछ कर सकें। पुलिस का कहना है कि रिमांड के दौरान घटना के पीछे की मंशा,संभावित योजना,बरामद दस्तावेजों तथा अन्य संबंधित पहलुओं की गहराई से जांच की जाएगी।

जाँच अधिकारी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या अदालत में हुई कथित अव्यवस्था किसी व्यापक रणनीति का हिस्सा थी या यह केवल तत्काल की गई व्यक्तिगत कार्रवाई थी। इसके अलावा पुलिस दोनों आरोपियों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जाँच कर रही है,ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्यों को स्पष्ट किया जा सके।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि देश की सर्वोच्च अदालत की गरिमा और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है। अदालत परिसर में अनुशासन भंग करने या न्यायिक कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न करने जैसी घटनाओं को गंभीरता से देखा जाता है और ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाती है।

दिल्ली पुलिस ने कहा है कि जाँच पूरी तरह निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अब तक उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है और यदि जाँच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है,तो उसके खिलाफ भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। जाँच एजेंसियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाने के लिए हर पहलू की गहन जाँच की जाएगी। साथ ही,अदालत की सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी आवश्यक कदमों पर विचार किया जा रहा है। पूरे मामले पर न्यायिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है तथा जाँच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।