वाशिंगटन,15 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका उसके प्रमुख परमाणु ठिकानों पर होने वाली हर गतिविधि पर चौबीसों घंटे नजर रख रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी भी परमाणु केंद्र पर थोड़ी सी भी संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है,तो अमेरिका बिना किसी देरी के सैन्य कार्रवाई करेगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पहले से ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बनी हुई है और दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
फॉक्स न्यूज को दिए एक विस्तृत साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी अंतरिक्ष निगरानी प्रणाली और स्पेस फोर्स की अत्याधुनिक तकनीक ईरान के महत्वपूर्ण परमाणु स्थलों की लगातार निगरानी कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से ‘पिकएक्स माउंटेन’ परमाणु स्थल का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ हाल के दिनों में कुछ सीमित गतिविधियाँ देखी गई हैं,जिसके बाद अमेरिका ने अपनी निगरानी और अधिक सख्त कर दी है। ट्रंप के अनुसार,अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियाँ हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर नजर रखे हुए हैं और यदि किसी प्रकार का खतरा महसूस होता है,तो तत्काल जवाबी कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका के पास इतनी उन्नत निगरानी तकनीक उपलब्ध है कि अंतरिक्ष से किसी व्यक्ति के नाम वाला पहचान बैज तक पढ़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि यही तकनीकी क्षमता अमेरिका को संभावित खतरों का समय रहते पता लगाने में सक्षम बनाती है। ट्रंप ने यह भी कहा कि जिन अन्य ईरानी परमाणु ठिकानों को पहले अमेरिकी हमलों में निशाना बनाया गया था,वे भी अभी पूरी तरह निगरानी के दायरे में हैं और वहाँ होने वाली गतिविधियों का लगातार विश्लेषण किया जा रहा है।
साक्षात्कार के दौरान ट्रंप ने दोहराया कि यदि ईरान ने परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि को आगे बढ़ाने की कोशिश की,चाहे वह कितनी ही छोटी क्यों न हो,तो अमेरिका तुरंत आवश्यक सैन्य कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी संभावित खतरे को बढ़ने का अवसर नहीं देगा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
जब उनसे पूछा गया कि कुछ सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी बंकर-बस्टर बम गहराई में बने भूमिगत परमाणु केंद्रों को पूरी तरह नष्ट करने में सक्षम नहीं हो सकते,तो ट्रंप ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका के पास ऐसे अत्याधुनिक हथियार मौजूद हैं जो अत्यधिक गहराई तक प्रभावी हमला कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैन्य क्षमता को कम करके आंकना उचित नहीं होगा और यदि आवश्यकता पड़ी तो अमेरिका अपने सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करेगा।
हालाँकि,ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि फिलहाल यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि ‘पिकएक्स माउंटेन’ परमाणु स्थल पर वास्तव में कोई सक्रिय परमाणु कार्यक्रम चल रहा है या नहीं। उन्होंने कहा कि अभी वहां सीमित गतिविधि दिखाई दे रही है,लेकिन यदि भविष्य में हलचल बढ़ती है तो अमेरिका स्थिति का इंतजार नहीं करेगा और समय रहते कार्रवाई करेगा।
साक्षात्कार में ट्रंप ने तेहरान के बाहरी इलाके में स्थित तालेघान परमाणु केंद्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह वही केंद्र है,जिसे पहले अमेरिकी सैन्य अभियान के दौरान निशाना बनाया गया था। इस दौरान पत्रकार ने उन्हें हाल ही में ली गई उपग्रह तस्वीरें दिखाईं,जिनमें ट्रकों,भारी मशीनों,क्रेनों और ताजा डाले गए कंक्रीट जैसी गतिविधियाँ दिखाई दे रही थीं। इन तस्वीरों के आधार पर ट्रंप ने कहा कि उन्हें सुरक्षा एजेंसियों से जानकारी मिली है कि ईरान ने इस परमाणु केंद्र के प्रवेश द्वारों को कंक्रीट से बंद करने का प्रयास किया है,ताकि वहाँ पहुँचना कठिन बनाया जा सके।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी एजेंसियों को यह जानकारी दी गई है कि प्रवेश मार्गों को सील करने के लिए बड़े पैमाने पर कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया है। उनका कहना था कि यदि ऐसा किया गया है,तो यह अमेरिका की निगरानी और कार्रवाई से बचने की कोशिश हो सकती है। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में आवश्यकता महसूस हुई तो अमेरिका इस केंद्र पर दोबारा हमला करने में कोई हिचकिचाहट नहीं करेगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में यह भी दावा किया कि फरवरी के अंत में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ से पहले ईरान परमाणु हथियार बनाने के बेहद करीब पहुँच चुका था। उनके अनुसार, =यदि अमेरिका ने समय रहते बी-2 बॉम्बर विमानों की मदद से ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हमला नहीं किया होता,तो ईरान अगले दो सप्ताह के भीतर परमाणु हथियार हासिल करने की स्थिति में पहुँच सकता था। ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया।
दूसरी ओर,ईरान लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए संचालित किया जा रहा है। तेहरान का कहना है कि उसका लक्ष्य केवल ऊर्जा उत्पादन,वैज्ञानिक अनुसंधान और नागरिक उपयोग के लिए परमाणु तकनीक का विकास करना है। ईरान ने कई बार परमाणु हथियार विकसित करने के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि उसका कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय नियमों के अनुरूप है।
इसके बावजूद अमेरिका और पश्चिमी देशों की चिंताएँ लगातार बनी हुई हैं। विशेष रूप से यूरेनियम संवर्धन की बढ़ती क्षमता,अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षणों पर लगाई गई सीमाएँ और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ सहयोग को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं। पश्चिमी देशों का मानना है कि उच्च स्तर का यूरेनियम संवर्धन भविष्य में परमाणु हथियार कार्यक्रम का आधार बन सकता है,जबकि ईरान इन आरोपों को राजनीतिक बताता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान केवल सैन्य चेतावनी नहीं,बल्कि एक कूटनीतिक संदेश भी है। अमेरिका स्पष्ट संकेत देना चाहता है कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी किसी भी नई गतिविधि को बारीकी से देख रहा है और आवश्यक समझे जाने पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए तैयार है। वहीं दूसरी ओर,इस तरह के कड़े बयानों से क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
मध्य-पूर्व पहले ही कई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी का असर क्षेत्रीय स्थिरता,ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक कूटनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर क्या कदम उठाता है और अमेरिका अपनी निगरानी तथा सैन्य नीति को किस दिशा में आगे बढ़ाता है।
फिलहाल दोनों देशों के बीच विश्वास का संकट बरकरार है। अमेरिका अपनी उन्नत निगरानी तकनीक और सैन्य क्षमता का हवाला देते हुए ईरान को किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि से दूर रहने की चेतावनी दे रहा है,जबकि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताकर अंतर्राष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर होने वाली गतिविधियाँ न केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों,बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।
