नई दिल्ली,15 जुलाई (युआईटीवी)- फीफा वर्ल्ड कप 2026 के पहले सेमीफाइनल में स्पेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फ्रांस को 2-0 से हराकर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। पूरे मुकाबले में स्पेन ने अनुशासित फुटबॉल,मजबूत रक्षापंक्ति और प्रभावशाली आक्रमण का बेहतरीन प्रदर्शन किया,जबकि फ्रांस जैसी मजबूत टीम स्पेन के सामने अपनी लय हासिल नहीं कर सकी। इस जीत के साथ स्पेन ने विश्व कप इतिहास में दूसरी बार फाइनल में प्रवेश किया है। इससे पहले टीम ने वर्ष 2010 में फाइनल में पहुँचकर पहली बार विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। अब स्पेन की नजर दूसरी बार विश्व विजेता बनने पर होगी।
मैच की शुरुआत बेहद तेज गति के साथ हुई। फ्रांस ने शुरुआती मिनटों से ही आक्रामक रणनीति अपनाई और उसके स्टार खिलाड़ी किलियन एम्बाप्पे ने स्पेन के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाने की कोशिश की। फ्रांसीसी टीम गेंद पर नियंत्रण बनाए रखते हुए शुरुआती बढ़त हासिल करना चाहती थी,लेकिन स्पेन की रक्षापंक्ति पूरी तरह सतर्क दिखाई दी। गोलकीपर उनाई सिमोन ने शुरुआती हमलों को शानदार ढंग से विफल किया और फ्रांस को बढ़त लेने का कोई मौका नहीं दिया।
दूसरी ओर,स्पेन ने शुरुआत में धैर्य बनाए रखा और अवसर की तलाश करता रहा। युवा खिलाड़ियों और अनुभवी फुटबॉलरों के संतुलन से सजी स्पेनिश टीम ने धीरे-धीरे मैच पर अपना नियंत्रण मजबूत करना शुरू कर दिया। मिडफील्ड में गेंद पर बेहतरीन पकड़ के कारण स्पेन ने फ्रांस के खिलाड़ियों को खुलकर खेलने का अवसर नहीं दिया।
मुकाबले का पहला बड़ा मोड़ 22वें मिनट में आया। स्पेन के युवा स्टार लामिन यमाल तेज रफ्तार के साथ फ्रांस के पेनल्टी बॉक्स की ओर बढ़ रहे थे। उन्हें रोकने के प्रयास में फ्रांस के डिफेंडर लुकास डिग्ने ने फाउल कर दिया। रेफरी ने बिना किसी हिचकिचाहट के स्पेन को पेनल्टी दे दी। इस मौके पर मिकेल ओयरजाबल ने पूरी शांति और आत्मविश्वास के साथ गेंद को गोलपोस्ट के भीतर पहुँचाकर स्पेन को 1-0 की बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद स्पेन का आत्मविश्वास और बढ़ गया,जबकि फ्रांस पर दबाव साफ दिखाई देने लगा।
गोल खाने के बाद फ्रांस ने बराबरी के लिए लगातार प्रयास किए। एम्बाप्पे ने अपनी गति और तकनीक के दम पर कई बार स्पेन के डिफेंस को भेदने की कोशिश की,लेकिन हर बार स्पेन की रक्षापंक्ति और गोलकीपर उनाई सिमोन उनके सामने दीवार बनकर खड़े रहे। पहले हाफ के अंतिम मिनटों तक फ्रांस ने लगातार हमले किए,लेकिन कोई भी प्रयास सफल नहीं हो सका। परिणामस्वरूप पहला हाफ स्पेन की 1-0 की बढ़त के साथ समाप्त हुआ।
दूसरे हाफ में फ्रांस ने वापसी की उम्मीद के साथ खेल शुरू किया,लेकिन स्पेन ने मैच पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली। स्पेनिश खिलाड़ियों ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार आक्रामक फुटबॉल खेलते रहे। इसी का परिणाम 58वें मिनट में देखने को मिला, जब पेड्रो पोरो ने शानदार मूव के बाद बेहतरीन गोल दागकर स्पेन की बढ़त 2-0 कर दी। इस गोल ने मुकाबले की दिशा लगभग तय कर दी।
दो गोल से पिछड़ने के बाद फ्रांस ने अपने आक्रमण को और तेज किया। टीम के कोच ने मैच का रुख बदलने के उद्देश्य से डेजिरे डुए और रयान चेर्की को मैदान पर उतारा। इन बदलावों से फ्रांस को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद थी,लेकिन स्पेन की संगठित टीम के सामने उनकी कोशिशें सफल नहीं हो सकीं।
फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे ने कई बार व्यक्तिगत प्रयासों से गोल करने की कोशिश की। उन्होंने स्पेन के डिफेंडरों को छकाने का प्रयास किया,लेकिन हर बार उनाई सिमोन ने शानदार बचाव करते हुए फ्रांस की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। स्पेन की रक्षापंक्ति ने पूरे मैच में अनुशासन बनाए रखा और फ्रांस के किसी भी हमले को प्रभावी नहीं होने दिया।
मैच के अंतिम मिनटों में फ्रांस ने पूरी ताकत झोंक दी,लेकिन स्पेन ने बेहद संयम के साथ खेलते हुए अपनी बढ़त बरकरार रखी। निर्धारित 90 मिनट समाप्त होने तक फ्रांस एक भी गोल नहीं कर सका और स्पेन ने 2-0 से मुकाबला जीतकर फाइनल में प्रवेश कर लिया।
इस जीत के साथ स्पेन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह इस विश्व कप की सबसे संतुलित और मजबूत टीमों में से एक है। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में आक्रामक और आकर्षक फुटबॉल खेली है। युवा खिलाड़ियों के साथ अनुभवी फुटबॉलरों का शानदार तालमेल उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आया है। लामिन यमाल,मिकेल ओयरजाबल, पेड्रो पोरो और उनाई सिमोन जैसे खिलाड़ियों ने लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए टीम को फाइनल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
दूसरी ओर,फ्रांस के लिए यह हार निराशाजनक रही। विश्व कप जीतने की उम्मीद लेकर उतरी फ्रांसीसी टीम सेमीफाइनल में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी। हालाँकि,टीम का अभियान अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अब फ्रांस तीसरे स्थान के मुकाबले में दूसरे सेमीफाइनल की हारने वाली टीम का सामना करेगा। फ्रांस की कोशिश होगी कि वह इस मुकाबले में जीत दर्ज कर टूर्नामेंट का समापन सकारात्मक अंदाज में करे।
स्पेन के लिए यह उपलब्धि ऐतिहासिक मानी जा रही है। वर्ष 2010 में पहली बार विश्व कप जीतने के बाद टीम एक बार फिर खिताब से केवल एक कदम दूर खड़ी है। इस बार भी स्पेन ने अपने पारंपरिक पासिंग गेम,मजबूत मिडफील्ड और अनुशासित रक्षापंक्ति के दम पर फाइनल तक का सफर तय किया है।
अब पूरी दुनिया की नजर दूसरे सेमीफाइनल पर होगी,जिसमें अर्जेंटीना और इंग्लैंड आमने-सामने होंगे। इस मुकाबले का विजेता फाइनल में स्पेन से भिड़ेगा। फुटबॉल प्रेमियों को एक रोमांचक खिताबी मुकाबले की उम्मीद है,जहाँ स्पेन दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने के इरादे से मैदान में उतरेगा,जबकि उसका प्रतिद्वंद्वी विश्व फुटबॉल की सबसे प्रतिष्ठित ट्रॉफी अपने नाम करने के लिए पूरी ताकत लगाएगा। ऐसे में विश्व कप 2026 का फाइनल एक यादगार और बेहद रोमांचक मुकाबला बनने की पूरी संभावना है।
