भूकंप

पेरू में दो बार भूकंप से भारी तबाही, छह लोगों की मौत,कई घायल,राहत और बचाव अभियान जारी

लीमा,20 जुलाई (युआईटीवी)- दक्षिण अमेरिकी देश पेरू एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गया है। देश के मध्य पर्वतीय क्षेत्र में शनिवार देर रात आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने व्यापक तबाही मचाई है। इस आपदा में अब तक कम-से-कम छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है,जबकि 21 अन्य लोग घायल बताए गए हैं। कई मकान पूरी तरह ढह गए हैं और बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए हैं। प्रशासन ने आशंका जताई है कि कुछ लोग अब भी मलबे में दबे हो सकते हैं,जिसके चलते प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

पेरू के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार,पहला भूकंप शनिवार रात लीमा से लगभग 300 किलोमीटर पूर्व स्थित जुनिन क्षेत्र के चुपाका प्रांत में आया। इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.1 दर्ज की गई,जबकि कुछ अंतर्राष्ट्रीय भूकंप निगरानी संस्थानों ने इसकी प्रारंभिक तीव्रता 5.6 बताई थी। पहला झटका जमीन से लगभग 24 किलोमीटर की गहराई में आया। इसके कुछ समय बाद उसी क्षेत्र में दूसरा भूकंप आया,जिसकी तीव्रता 3.7 दर्ज की गई और इसका केंद्र लगभग 18 किलोमीटर की गहराई पर था। लगातार दो झटकों के कारण लोगों में दहशत फैल गई और रात के समय बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से बाहर निकल आए।

पेरू के नागरिक सुरक्षा विभाग के प्रमुख ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया कि भूकंप से छह लोगों की जान चली गई है और 21 लोग घायल हुए हैं। घायलों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है,जहाँ उनका उपचार चल रहा है। प्रशासन का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है,क्योंकि कई स्थानों पर अभी भी मलबा हटाने का कार्य जारी है और कुछ लोगों के दबे होने की आशंका बनी हुई है।

भूकंप का सबसे अधिक असर चुपाका प्रांत और आसपास के ग्रामीण इलाकों में देखने को मिला। शुरुआती आकलन के अनुसार लगभग 48 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि 18 अन्य मकानों को गंभीर नुकसान पहुँचा है। इन घटनाओं से लगभग 300 लोग प्रभावित हुए हैं। जिन परिवारों के घर पूरी तरह ढह गए हैं,उन्हें अस्थायी राहत शिविरों में स्थानांतरित किया जा रहा है। प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए भोजन,पेयजल,दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था शुरू कर दी है।

राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा संस्थान के प्रमुख लुइस वास्केज ने स्थानीय रेडियो स्टेशन को बताया कि प्रभावित क्षेत्र के अधिकांश मकान पारंपरिक एडोब ब्लॉकों से बने हुए हैं। ये मिट्टी और अन्य स्थानीय सामग्री से तैयार किए जाने वाले मकान अपेक्षाकृत कमजोर होते हैं और भूकंप के तेज झटकों को सहन नहीं कर पाते। यही कारण है कि कई घर पूरी तरह धराशायी हो गए। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है और प्रशासन उनकी हरसंभव सहायता करने में जुटा हुआ है।

रविवार सुबह से ही आपातकालीन सेवाओं,दमकल विभाग और बचाव दलों ने प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाने का अभियान शुरू कर दिया। बचावकर्मी विशेष उपकरणों की सहायता से ढही हुई इमारतों के नीचे फँसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभियान तब तक जारी रहेगा,जब तक यह पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि सभी लोग सुरक्षित निकाल लिए गए हैं। कई स्थानों पर भारी मलबे और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के कारण राहत कार्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

भूकंप के बाद देशभर में शोक का माहौल है। राष्ट्रपति-निर्वाचित केइको फुजीमोरी ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि वह इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी हैं। उन्होंने राहत और बचाव कार्यों में लगे सभी कर्मियों की सराहना की और आशा जताई कि घायल लोग जल्द स्वस्थ होंगे तथा प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति जल्द बहाल की जा सकेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार पेरू भौगोलिक दृष्टि से दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। यह देश प्रशांत महासागर के किनारे स्थित उस क्षेत्र का हिस्सा है,जिसे ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। यह क्षेत्र दुनिया की लगभग 85 प्रतिशत भूकंपीय गतिविधियों के लिए जिम्मेदार माना जाता है। यहाँ प्रशांत प्लेट सहित कई विवर्तनिक प्लेटें लगातार सक्रिय रहती हैं,जिसके कारण समय-समय पर भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियाँ देखने को मिलती हैं।

इसी वजह से पेरू में अतीत में भी कई विनाशकारी भूकंप आ चुके हैं। देश में मजबूत भवन निर्माण मानकों और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाने की कोशिशें की जा रही हैं,लेकिन पर्वतीय और ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में लोग अभी भी पारंपरिक निर्माण शैली वाले मकानों में रहते हैं। ऐसे घर भूकंप के दौरान अधिक जोखिम में रहते हैं और जान-माल का नुकसान बढ़ जाता है।

भूकंप के बाद स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी है। विशेषज्ञ लगातार आफ्टरशॉक यानी भूकंप के बाद आने वाले हल्के झटकों की संभावना पर नजर रखे हुए हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे क्षतिग्रस्त इमारतों में वापस न जाएँ और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। आपदा प्रबंधन एजेंसियाँ लगातार हालात की समीक्षा कर रही हैं,ताकि किसी भी नई आपात स्थिति का तुरंत सामना किया जा सके।

मानवीय सहायता एजेंसियों ने भी प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुँचानी शुरू कर दी है। अस्थायी शिविरों में रह रहे लोगों को भोजन,स्वच्छ पेयजल,कंबल,दवाइयाँ और अन्य जरूरी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। चिकित्सा दल घायलों का उपचार करने के साथ-साथ संभावित स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की रोकथाम के लिए भी कार्य कर रहे हैं।

पेरू में आया यह भूकंप एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्कता,मजबूत आधारभूत संरचना और प्रभावी आपदा प्रबंधन व्यवस्था कितनी आवश्यक है। राहत और बचाव दल पूरी तत्परता से अपने अभियान में जुटे हैं,जबकि प्रशासन प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है। आने वाले दिनों में विस्तृत सर्वेक्षण के बाद नुकसान का वास्तविक आकलन सामने आएगा, लेकिन फिलहाल पूरे देश का ध्यान प्रभावित लोगों की सुरक्षा, पुनर्वास और सामान्य जीवन को जल्द-से-जल्द बहाल करने पर केंद्रित है।