प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

पीएम मोदी की किर्गिस्तान यात्रा से आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार,निवेश और व्यापार बढ़ने की उम्मीद

नई दिल्ली,29 अगस्त (युआईटीवी)- किर्गिस्तान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी यात्रा को भारत और किर्गिस्तान के बीच आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया है। किर्गिस्तान के निवेश मंत्री रवशानबेक साबिरोव ने शनिवार को कहा कि उनका देश प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से निवेश, व्यापार और आर्थिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद कर रहा है। उन्होंने कहा कि किर्गिस्तान भारत की कंपनियों को अपने यहाँ निवेश के लिए आकर्षित करना चाहता है और इसके लिए कई प्रमुख क्षेत्रों में अवसर उपलब्ध हैं।

रवशानबेक साबिरोव के मुताबिक,भारत और किर्गिस्तान के बीच लंबे समय से मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच केवल आर्थिक और राजनीतिक संबंध ही नहीं,बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव भी काफी पुराना है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर तक ले जाने में अहम भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि किर्गिस्तान प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए तैयार है और उनकी यात्रा को देश के लिए ऐतिहासिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

निवेश मंत्री ने कहा कि किर्गिस्तान को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच निवेश की संभावनाओं और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में भारत और किर्गिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 91 करोड़ डॉलर तक पहुँच गया था। दोनों देश व्यापारिक संबंधों को और विस्तार देने की दिशा में काम कर रहे हैं। किर्गिस्तान का मानना है कि भारतीय कंपनियों की बढ़ती वैश्विक मौजूदगी को देखते हुए देश में उनके लिए कई नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

किर्गिस्तान फिलहाल भारत को कई तरह के उत्पादों का निर्यात करता है। इनमें शहद, सूखे मेवे, बीन्स और सोना प्रमुख हैं। वहीं भारत से किर्गिस्तान को काजू और खाद्य पदार्थों सहित कई तरह के उत्पादों का निर्यात किया जाता है। किर्गिस्तान के बाजारों में भारतीय उत्पादों की मौजूदगी पहले से है और दोनों देश आपसी व्यापार के दायरे को और व्यापक बनाने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।

साबिरोव ने कहा कि भारत और किर्गिस्तान के संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध भी बेहद मजबूत हैं। उन्होंने सोवियत दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय किर्गिस्तान के बहुत से लोग भारतीय फिल्में देखकर बड़े हुए हैं। भारतीय सिनेमा के लोकप्रिय कलाकारों और भारतीय संस्कृति से किर्गिस्तान के लोगों की अच्छी पहचान है। यही सांस्कृतिक जुड़ाव दोनों देशों के लोगों के बीच एक स्वाभाविक आत्मीयता पैदा करता है।

निवेश मंत्री ने कहा कि किर्गिस्तान भारत के साथ कारोबारी संबंधों को मजबूत करने के लिए बिजनेस फोरम,सेमिनार और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का इच्छुक है। उनका मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम दोनों देशों की कंपनियों और निवेशकों को एक-दूसरे के बाजारों को समझने का अवसर देंगे। इसके साथ ही किर्गिस्तान सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को भी आगे बढ़ाना चाहता है।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति सादिर जापारोव निवेश को देश की आर्थिक नीति में महत्वपूर्ण स्थान देते हैं। किर्गिस्तान के लिए विदेशी निवेश केवल पूँजी जुटाने का माध्यम नहीं है, बल्कि अर्थव्यवस्था के आधुनिकीकरण और रोजगार के नए अवसर पैदा करने का महत्वपूर्ण साधन भी है। सरकार ऐसे निवेश को बढ़ावा देना चाहती है जिससे देश की उत्पादन क्षमता बढ़े,नई तकनीक आए और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार हों।

किर्गिस्तान ने विशेष रूप से भारतीय कंपनियों के लिए बुनियादी ढाँचा,नवीकरणीय ऊर्जा, जलविद्युत,छोटे जलविद्युत संयंत्र,पर्यटन,प्रौद्योगिकी और कृषि-औद्योगिक क्षेत्र में संभावनाएँ बताई हैं। इन क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों के अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ किर्गिस्तान उठाना चाहता है। देश में ऊर्जा और बुनियादी ढाँचे की जरूरतों को देखते हुए भारतीय निवेशकों के लिए कई परियोजनाएँ आकर्षक हो सकती हैं।

किर्गिस्तान का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र जलविद्युत भी है। पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण देश में जलविद्युत उत्पादन की अच्छी संभावनाएँ मौजूद हैं। सरकार छोटे जलविद्युत संयंत्रों के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश को बढ़ावा देना चाहती है। ऐसे में भारतीय कंपनियों के लिए ऊर्जा क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाएँ बन सकती हैं।

पर्यटन को भी दोनों देशों के बीच सहयोग का महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जा रहा है। किर्गिस्तान अपने प्राकृतिक सौंदर्य,पहाड़ों और पर्यटन स्थलों के कारण भारतीय पर्यटकों के लिए आकर्षक गंतव्य बन सकता है। दूसरी ओर,भारत का बड़ा पर्यटन बाजार किर्गिस्तान के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। निवेश मंत्री ने मेडिकल टूरिज्म को भी संभावनाओं वाला क्षेत्र बताया है।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी भारत और किर्गिस्तान के बीच सहयोग बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। साबिरोव ने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय छात्र पहले से ही मेडिकल शिक्षा के लिए किर्गिस्तान जाते हैं। इससे दोनों देशों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में पहले से एक मजबूत आधार तैयार है। इस सहयोग को आगे बढ़ाकर उच्च शिक्षा,प्रशिक्षण और अन्य शैक्षणिक क्षेत्रों में नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

प्रौद्योगिकी और कृषि-औद्योगिक क्षेत्र को भी किर्गिस्तान महत्वपूर्ण मानता है। भारतीय कंपनियों की तकनीकी विशेषज्ञता और कृषि क्षेत्र में अनुभव का उपयोग किर्गिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए कर सकता है। इससे स्थानीय उत्पादन बढ़ाने,प्रसंस्करण उद्योग विकसित करने और रोजगार पैदा करने में मदद मिल सकती है।

भारतीय निवेशकों को आकर्षित करने के लिए किर्गिस्तान में निवेश, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और उद्यम वित्तपोषण से जुड़े कानूनी प्रावधान भी मौजूद हैं। साबिरोव ने कहा कि इन कानूनों के जरिए विदेशी निवेशकों के लिए एक ढाँचा तैयार किया गया है। सरकार चाहती है कि भारतीय कंपनियाँ इन अवसरों का लाभ उठाएँ और किर्गिस्तान में दीर्घकालिक परियोजनाएँ स्थापित करें।

साबिरोव ने भरोसा दिलाया कि किर्गिस्तान सरकार निवेशकों को परियोजनाओं के हर चरण में सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों के साथ खड़ी रहेगी,उनकी मदद करेगी और परियोजनाओं को लागू करने की प्रक्रिया पर नजर रखेगी। संयुक्त निवेश परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी।

किर्गिस्तान को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा से देश की निवेश क्षमता और कारोबारी अवसरों पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान बढ़ेगा। खासतौर पर भारतीय कंपनियों को किर्गिस्तान में उपलब्ध निवेश अवसरों को सीधे समझने और वहाँ के कारोबारी माहौल का आकलन करने का अवसर मिलेगा। ऐसे में यह यात्रा दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।

भारत और किर्गिस्तान के बीच पहले से मौजूद राजनीतिक,सांस्कृतिक और शैक्षणिक रिश्तों को आर्थिक सहयोग के साथ जोड़ने की कोशिश दोनों देशों के संबंधों को व्यापक बना सकती है। यदि निवेश, ऊर्जा, पर्यटन, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और कृषि जैसे क्षेत्रों में ठोस संयुक्त परियोजनाएँ आगे बढ़ती हैं,तो इससे न केवल द्विपक्षीय व्यापार बढ़ सकता है, बल्कि दोनों देशों में रोजगार और विकास के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। इसी वजह से किर्गिस्तान प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को भारत के साथ अपने संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देख रहा है।