नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही,मृतकों की संख्या 616 पहुँचीं (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही,मृतकों की संख्या 616 पहुँचीं; सैकड़ों लोग अब भी लापता, अंतर्राष्ट्रीय मदद की तैयारी

काठमांडू,29 अगस्त (युआईटीवी)- नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। शनिवार सुबह तक बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 616 हो गई है,जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हिमालयी देश के कई जिलों में बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान जारी है। नदियों के उफान,बाढ़ के मलबे और भूस्खलन के कारण कई इलाकों में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। अधिकारियों को आशंका है कि राहत और बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।

स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार,शनिवार सुबह छह बजे तक पुलिस ने अलग-अलग प्रभावित जिलों से सैकड़ों शव बरामद किए थे। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि चितवन में सबसे अधिक 233 शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा नवलपरासी पूर्व में 158, गोरखा में 48, नवलपरासी पश्चिम में 47, धाडिंग में 45, नुवाकोट में 41, तनहुन में 31 और रसुवा में 13 शव बरामद किए गए हैं। इन आंकड़ों से बाढ़ की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

नेपाल के प्रभावित जिलों में अभी भी खोज और बचाव अभियान पूरी तेजी से चलाया जा रहा है। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां स्थानीय लोगों के साथ मिलकर लापता लोगों की तलाश कर रही हैं। बाढ़ के पानी में फँसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा रहा है। जिन इलाकों में पानी का स्तर और भूस्खलन का खतरा अधिक है,वहाँ से लोगों को निकालकर अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है।

बचाव अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाढ़ का मलबा और भूस्खलन बना हुआ है। कई सड़कों पर भारी मात्रा में मलबा जमा होने से यातायात बाधित है। खोज और बचाव दल सड़कों को साफ करने में भी जुटे हैं,ताकि प्रभावित इलाकों तक राहत सामग्री पहुँचाई जा सके और बचाव कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। सड़क संपर्क बहाल होना राहत अभियान के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है,क्योंकि कई प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँचने में मुश्किल हो रही है।

यह विनाशकारी बाढ़ बुधवार को नेपाल के रसुवा जिले में आई थी। अधिकारियों के अनुसार,बाढ़ की शुरुआत चीन के तिब्बत क्षेत्र से हुई और सीमा पार से बहने वाली भोटेकोशी नदी के जरिए नेपाल में इसका प्रभाव पहुँचा। अचानक आए तेज बहाव ने नदी किनारे बसे इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। इसके बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों के आसपास के कई जिलों में बाढ़ और मलबे ने भारी नुकसान पहुंचाया।

रसुवा के अलावा नुवाकोट,धाडिंग,चितवन,गोरखा,तनहुन,नवलपरासी पूर्व और नवलपरासी पश्चिम में भी नदी किनारों से शव बरामद किए जा रहे हैं। इन इलाकों में बाढ़ के साथ भूस्खलन ने भी मुश्किलें बढ़ाई हैं। कई स्थानों पर सड़कें बंद हो गई हैं और राहत दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँचने के लिए मलबे को हटाना पड़ रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि अभी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। ऐसे में खोज और बचाव अभियान पूरा होने तक मृतकों की संख्या को लेकर अंतिम तस्वीर साफ नहीं हो पाएगी। बचाव दल लगातार उन स्थानों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं,जहाँ लोगों के मलबे में दबे होने या बाढ़ के पानी में बह जाने की आशंका है। प्रभावित परिवार अपने प्रियजनों की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।

नेपाल सरकार ने अब अंतर्राष्ट्रीय खोज और बचाव टीमों से मदद लेने का फैसला किया है। यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है,क्योंकि इससे पहले सरकार ने विदेशी बचाव दलों की मदद लेने से इनकार किया था। बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार का शुरुआती रुख था कि नेपाली बचावकर्मी स्वयं खोज और बचाव अभियान सँभालने में सक्षम हैं और दूसरे देशों के बचावकर्मियों को अनुमति देने की जरूरत नहीं है।

हालाँकि,यह निर्णय ज्यादा समय तक कायम नहीं रहा। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन ने बाद में अपने रुख में बदलाव करते हुए बचाव कार्यों के लिए सीमित अंतर्राष्ट्रीय सहायता लेने का फैसला किया। भीषण तबाही और व्यापक स्तर पर चल रहे बचाव अभियान को देखते हुए विदेशी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया गया है। इससे विशेष तकनीकी क्षमताओं वाले बचाव दलों को प्रभावित इलाकों में काम करने का अवसर मिलेगा।

इस बीच भारत ने नेपाल के लिए राहत और बचाव सहायता तेज कर दी है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के नवीनतम आँकड़ों के अनुसार,लापता लोगों में भारतीय नागरिकों की संख्या सबसे अधिक बताई गई है। इस स्थिति को देखते हुए भारत की ओर से नेपाल को मानवीय सहायता के साथ चिकित्सा और बचाव संबंधी सहायता भी भेजी जा रही है।

शुक्रवार को भारत से सहायता सामग्री और 11 सदस्यीय चिकित्सा एवं सुरंग बचाव दल के साथ तीसरा विमान नेपाल पहुँचा। इस विमान में करीब 10 टन मानवीय सहायता सामग्री भेजी गई। इसमें पोर्टेबल जनरेटर सेट,डिग्निटी किट,खाद्य पैकेट और पानी को शुद्ध करने वाली गोलियाँ शामिल थीं। इन सामग्रियों का इस्तेमाल प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देने और जरूरी सेवाओं को बनाए रखने के लिए किया जा सकता है।

भारत इससे पहले भी नेपाल को बड़ी मात्रा में राहत सामग्री भेज चुका है। गुरुवार को भारत ने नेपाल को मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री,दवाओं और खाद्य पैकेट की दूसरी खेप सौंपी थी। इस खेप का कुल वजन 37.5 टन बताया गया है। इसका उद्देश्य बाढ़ से प्रभावित नेपाल में राहत और बचाव कार्यों को मजबूत करना और प्रभावित लोगों की तत्काल जरूरतों को पूरा करने में सहायता देना था।

भारत की ओर से भेजी जा रही सहायता में चिकित्सा सामग्री और दवाओं का विशेष महत्व है। बाढ़ के बाद प्रभावित क्षेत्रों में साफ पानी,भोजन और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत तेजी से बढ़ जाती है। लंबे समय तक जलभराव और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचे के कारण संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में दवाओं, पानी शुद्ध करने वाली गोलियों और चिकित्सा दल की मौजूदगी राहत अभियान के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

नेपाल में चल रहे बचाव अभियान में स्थानीय प्रशासन,पुलिस और अन्य एजेंसियाँ लगातार काम कर रही हैं। सुरक्षा बलों के सामने चुनौती सिर्फ लोगों को बचाने की नहीं है,बल्कि बाढ़ के बाद बाधित हुए परिवहन और संचार नेटवर्क को बहाल करने की भी है। कई सड़कों पर मलबा होने के कारण राहत सामग्री पहुंचाने में परेशानी हो रही है। बचाव दल पहले सड़कों को साफ कर रहे हैं,ताकि प्रभावित इलाकों तक भारी उपकरण और अतिरिक्त राहत सामग्री पहुँचाई जा सके।

भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों के आसपास बसे जिलों में स्थिति विशेष रूप से गंभीर बनी हुई है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को अचानक बढ़े जलस्तर का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर बाढ़ का पानी और मलबा तेज गति से आगे बढ़ा,जिससे लोगों को सँभलने का पर्याप्त समय नहीं मिला। बाढ़ के बाद नदी किनारे से लगातार शव बरामद होने से प्रभावित इलाकों में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है।

बचाव कार्य जारी रहने के कारण आने वाले दिनों में स्थिति की वास्तविक तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश,फँसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित परिवारों तक जरूरी राहत पहुँचाना है। इसके साथ ही क्षतिग्रस्त सड़कों को खोलना और बाढ़ के कारण कटे क्षेत्रों को मुख्य नेटवर्क से जोड़ना भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।

इस आपदा ने नेपाल के सामने आपातकालीन प्रतिक्रिया और सीमा पार आपदा सहयोग की जरूरत को भी सामने ला दिया है। चीन के तिब्बत क्षेत्र से शुरू होकर भोटेकोशी नदी के जरिए नेपाल में पहुँची बाढ़ ने यह दिखाया है कि सीमा से जुड़े नदी तंत्र में अचानक होने वाले बदलाव का असर कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है। ऐसे में भविष्य में नदी जलस्तर की निगरानी, =शुरुआती चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत महसूस हो सकती है।

फिलहाल नेपाल के कई जिलों में राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। 616 लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के लापता होने के आँकड़े इस आपदा की गंभीरता को दर्शाते हैं। सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सहायता स्वीकार करने का निर्णय और भारत सहित पड़ोसी देशों से मिल रही राहत सामग्री बचाव प्रयासों को मजबूती दे सकती है। आने वाले दिनों में मलबे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की गहन तलाशी के बाद ही लापता लोगों की स्थिति और कुल नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।