वाशिंगटन,29 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका में एक रूसी नागरिक को रूस और उसकी सरकारी विमानन कंपनी एरोफ्लोट तक अमेरिकी विमान के पुर्जे गैर-कानूनी तरीके से पहुँचाने के मामले में दोषी ठहराया गया है। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार,फ्लोरिडा में रहने वाले 62 वर्षीय अलेक्जेंडर मामोनोव ने करीब 9 लाख डॉलर से अधिक कीमत के अमेरिकी एयरक्राफ्ट पार्ट्स को रूस तक पहुँचाने के लिए निर्यात नियंत्रण कानूनों का उल्लंघन किया। फ्लोरिडा के दक्षिणी जिले की एक संघीय जूरी ने मुकदमे के बाद मामोनोव को उसके खिलाफ लगाए गए सभी 12 आरोपों में दोषी पाया है।
मामले में मामोनोव पर निर्यात नियंत्रण सुधार अधिनियम का उल्लंघन करने की साजिश, नियंत्रित सामान का गैर-कानूनी निर्यात,तस्करी की साजिश,तस्करी,निर्यात संबंधी गलत जानकारी देने और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। अमेरिकी जिला जज कैथलीन विलियम्स ने मामोनोव को सजा सुनाने के लिए 20 नवंबर की तारीख तय की है। हालाँकि,अमेरिकी न्याय विभाग ने यह जानकारी नहीं दी है कि दोषी पाए जाने के बाद मामोनोव को अधिकतम कितनी सजा हो सकती है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक,मामोनोव पहले एरोफ्लोट का कर्मचारी रह चुका था। बाद में वह रूस से अमेरिका के दक्षिण फ्लोरिडा क्षेत्र में आकर रहने लगा। अभियोजकों का आरोप है कि अमेरिका पहुँचने के बाद उसने एक अन्य रूसी नागरिक इग्नात वाकोरिन के साथ मिलकर विमान के पुर्जों की अवैध खरीद और रूस तक उनकी आपूर्ति की योजना तैयार की। वाकोरिन फिलहाल फरार बताया जा रहा है। दोनों के खिलाफ अप्रैल 2025 में एक साथ आरोप लगाए गए थे।
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार,मामोनोव और वाकोरिन ने अमेरिका में मौजूद विभिन्न सप्लायर्स से विमान के पुर्जे हासिल किए। इन पुर्जों को रूस भेजने के लिए उन्होंने कथित तौर पर उनकी वास्तविक मंजिल छिपाई। अभियोजन पक्ष ने अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों और गवाही के आधार पर कहा कि आरोपियों ने अमेरिकी सप्लायर्स को बताया कि खरीदे गए विमान पुर्जे चीन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे तीसरे देशों में भेजे जाएंगे।
हालाँकि,अमेरिकी अभियोजकों के अनुसार, वास्तविकता इससे अलग थी। खरीदे गए विमान के पुर्जों को कथित तौर पर रूस और एरोफ्लोट तक पहुँचाया गया। अधिकारियों का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य अमेरिकी निर्यात नियंत्रण और रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों से बचना था। मामोनोव ने कथित तौर पर गलत गंतव्य की जानकारी देकर अमेरिकी कंपनियों से सामान हासिल किया और फिर उन्हें रूस पहुँचाने की व्यवस्था की।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक,यह योजना फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के बड़े पैमाने पर हमले के बाद अमेरिका द्वारा रूस पर लगाए गए कड़े निर्यात प्रतिबंधों के बाद शुरू हुई थी। रूस के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों में विमान,विमानन उपकरण और अन्य कई तरह के उत्पादों के निर्यात पर रोक या कड़े नियंत्रण शामिल थे। अमेरिकी सरकार का कहना रहा है कि इस तरह के सामान रूस की सैन्य क्षमता और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उद्योगों को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।
मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने एरोफ्लोट के खिलाफ अस्थायी डिनायल ऑर्डर जारी किया था। इस आदेश के तहत एरोफ्लोट को अमेरिका में निर्मित सामान हासिल करने से प्रतिबंधित किया गया था। ऐसे में अभियोजन पक्ष का आरोप है कि आरोपियों ने सीधे एरोफ्लोट के नाम पर सामान मंगाने के बजाय तीसरे देशों का इस्तेमाल करते हुए वास्तविक गंतव्य को छिपाने की कोशिश की।
अभियोजकों के अनुसार,मामोनोव और उसके सहयोगी ने विमान के पुर्जों की खरीद, शिपमेंट और भुगतान से जुड़ी जानकारियों में भी कथित तौर पर हेरफेर किया। करीब 10 लाख डॉलर मूल्य के विमान पुर्जों के निर्यात को छिपाने के लिए गलत गंतव्य और वित्तीय लेनदेन का इस्तेमाल किया गया। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों ने इस तरीके से यह दिखाने की कोशिश की कि सामान रूस नहीं जा रहा है।
एफबीआई के काउंटरइंटेलिजेंस और जासूसी-रोधी विभाग के सहायक निदेशक रोमन रोजाव्स्की ने मामले में आए फैसले को अमेरिकी निर्यात नियंत्रण व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मामोनोव ने अमेरिकी सप्लायर्स से विमान पुर्जों की वास्तविक मंजिल के बारे में झूठ बोला और करीब 10 लाख डॉलर के विमानन उपकरण रूस को गैर-कानूनी तरीके से निर्यात किए। उनके मुताबिक,सभी आरोपों में दोषी ठहराया जाना मामोनोव को उसके कृत्यों के लिए जिम्मेदार ठहराता है।
रोजाव्स्की ने यह भी स्पष्ट किया कि एफबीआई प्रतिबंधों और निर्यात नियंत्रण कानूनों को लागू करने को प्राथमिकता देती रहेगी। उन्होंने इस मामले को उन लोगों के लिए चेतावनी बताया,जो अमेरिकी तकनीक या नियंत्रित सामान को अमेरिका के विरोधी देशों तक अवैध तरीके से पहुँचाने की कोशिश कर सकते हैं। उनका कहना था कि अमेरिकी सरकार ऐसे मामलों में केवल सीधे निर्यात पर ही नहीं,बल्कि प्रतिबंधों और निर्यात नियंत्रण से बचने के लिए अपनाए जाने वाले रास्तों पर भी नजर रख रही है।
दक्षिण फ्लोरिडा के अमेरिकी अटॉर्नी जेसन रेडिंग क्विनोन्स ने भी फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मामला दिखाता है कि तीसरे देशों के माध्यम से अमेरिकी निर्यात नियंत्रण से बचने की कोशिश करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि रूस दक्षिण फ्लोरिडा के रास्ते अपनी खरीदारी करके अमेरिकी प्रतिबंधों और निर्यात नियंत्रण से बच नहीं सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि शिपिंग लेबल पर गलत गंतव्य लिखकर अमेरिकी निर्यात कानूनों को निष्प्रभावी नहीं बनाया जा सकता। अमेरिकी अभियोजन पक्ष का कहना है कि मामोनोव ने लगभग 10 लाख डॉलर मूल्य के विमान पुर्जों के निर्यात को छिपाने के लिए गलत गंतव्यों और वित्तीय लेनदेन का इस्तेमाल किया था। इस मामले में जूरी का फैसला अमेरिकी सरकार की उस नीति को भी दर्शाता है,जिसके तहत प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अप्रत्यक्ष व्यापार मार्गों पर कार्रवाई की जा रही है।
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूस के खिलाफ कई व्यापक आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें रूस के विमानन क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है। विमान और विमानन से जुड़े कई कंपोनेंट्स पर निर्यात नियंत्रण इसलिए लगाया गया है क्योंकि अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इनका इस्तेमाल रूस की सैन्य क्षमताओं या रणनीतिक उद्योगों को समर्थन देने में किया जा सकता है।
रूस की सरकारी एयरलाइन एरोफ्लोट पर भी अमेरिकी प्रतिबंधों और निर्यात नियंत्रण का प्रभाव पड़ा है। अमेरिकी सरकार की ओर से जारी डिनायल ऑर्डर ने कंपनी के लिए अमेरिका में बने सामान हासिल करने के रास्ते को और मुश्किल बनाया था। इसके बावजूद यदि अमेरिकी विमान पुर्जे तीसरे देशों या गलत दस्तावेजों के माध्यम से रूस और एरोफ्लोट तक पहुँचते हैं,तो यह अमेरिकी निर्यात नियंत्रण व्यवस्था को दरकिनार करने का प्रयास माना जाता है।
मामोनोव के खिलाफ आया फैसला ऐसे समय में भी महत्वपूर्ण है,जब अमेरिका रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू करने और उनकी कथित चोरी को रोकने पर लगातार जोर दे रहा है। अमेरिकी अधिकारियों की चिंता केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि प्रतिबंधित सामान सीधे रूस भेजा जा रहा है या नहीं,बल्कि यह भी है कि क्या तीसरे देशों के जरिए आपूर्ति श्रृंखला बनाकर रूस तक अमेरिकी तकनीक और उपकरण पहुँचाए जा रहे हैं।
इस मामले में इग्नात वाकोरिन का फरार होना भी जाँच का एक महत्वपूर्ण पहलू बना हुआ है। मामोनोव और वाकोरिन पर अप्रैल 2025 में एक साथ आरोप लगाए गए थे। अब मामोनोव को सभी 12 आरोपों में दोषी ठहराए जाने के बाद मामले में उसकी भूमिका को लेकर अमेरिकी सरकार का पक्ष अदालत में स्थापित हो गया है। हालाँकि,वाकोरिन की स्थिति और उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई का मामला अलग बना हुआ है।
अब सभी की नजर 20 नवंबर को होने वाली सजा सुनाए जाने की प्रक्रिया पर है। अमेरिकी जिला अदालत इस दौरान मामोनोव के खिलाफ लगाए गए आरोपों और जूरी के फैसले के आधार पर सजा तय करेगी। न्याय विभाग ने फिलहाल संभावित अधिकतम सजा की जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
कुल मिलाकर,फ्लोरिडा में आया यह फैसला अमेरिका और रूस के बीच जारी व्यापक प्रतिबंधों और निर्यात नियंत्रण की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह मामला दिखाता है कि अमेरिकी अधिकारी रूस तक विमानन उपकरण पहुँचाने के लिए तीसरे देशों,गलत गंतव्य और छिपे हुए वित्तीय लेनदेन के इस्तेमाल को भी गंभीरता से ले रहे हैं। अमेरिकी सरकार का स्पष्ट संदेश है कि प्रतिबंधित अमेरिकी तकनीक और विमानन उपकरणों को रूस तक पहुँचाने के लिए अप्रत्यक्ष रास्तों का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
