न्यूयॉर्क,29 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तेल कारोबार को लेकर एक बड़े समझौते की घोषणा हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के साथ दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील की है। ट्रंप के मुताबिक,निजी कंपनियों के साथ साझेदारी के जरिए अमेरिका ने वेनेजुएला में मौजूद 65 अरब बैरल से अधिक तेल भंडार पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस समझौते के लिए अमेरिकी करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल नहीं किया गया है। दूसरी ओर,वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने भी शुक्रवार को अमेरिकी सरकार के साथ एक ‘ऐतिहासिक समझौते’ की घोषणा की, जिसका उद्देश्य देश के हाइड्रोकार्बन उद्योग के बुनियादी ढाँचे को दोबारा खड़ा करना और उसमें बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस समझौते को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा कि निजी कंपनियों के साथ साझेदारी के माध्यम से अमेरिका ने वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। उनके अनुसार,इस समझौते से अमेरिका का तेल भंडार दोगुने से अधिक हो जाएगा। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि इससे अमेरिकी बाजार में तेल की आपूर्ति में भारी बढ़ोतरी होगी और लंबे समय में देश के लोगों के लिए ईंधन की कीमतें काफी कम हो सकती हैं।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है,जब अमेरिका में ऊर्जा कीमतों को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक,फरवरी के आखिर में ईरान के साथ तनाव शुरू होने के बाद अमेरिका में तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है और इससे महँगाई का दबाव भी बढ़ सकता है। ऐसे माहौल में वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार तक अमेरिकी कंपनियों की पहुँच को ट्रंप प्रशासन ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने के एक महत्वपूर्ण विकल्प के तौर पर देख सकता है।
वेनेजुएला की ओर से भी इस समझौते को ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया गया है। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा कि अमेरिका के साथ हुआ समझौता दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ वेनेजुएला के ऊर्जा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश लाने में मदद करेगा। वेनेजुएला सरकार के बयान के अनुसार,इस समझौते के तहत देश के हाइड्रोकार्बन उद्योग के लिए जरूरी बुनियादी ढाँचे को फिर से विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।
समझौते में निजी कंपनियों की भागीदारी के जरिए वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ाने की योजना भी शामिल है। वेनेजुएला सरकार के अनुसार,इसके तहत 17 महत्वपूर्ण तेल क्षेत्रों का विकास किया जाएगा। इन क्षेत्रों में करीब 65 अरब बैरल तेल के भंडार की पुष्टि होने की बात कही गई है। सरकार का अनुमान है कि इन परियोजनाओं के जरिए 100 अरब डॉलर से अधिक का निवेश आकर्षित किया जा सकता है। इसके अलावा,वेनेजुएला सरकार को इन परियोजनाओं से 209 अरब डॉलर से अधिक कर राजस्व मिलने का अनुमान जताया गया है।
वेनेजुएला के लिए यह समझौता आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश की अर्थव्यवस्था लंबे समय से तेल उद्योग पर निर्भर रही है,लेकिन उत्पादन क्षमता और ऊर्जा बुनियादी ढाँचे में आई गिरावट ने इसकी अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। ऐसे में विदेशी निवेश और निजी क्षेत्र की भागीदारी के जरिए तेल उत्पादन को बढ़ाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। नए समझौते से तेल क्षेत्रों के विकास,उत्पादन क्षमता बढ़ाने और ऊर्जा क्षेत्र के बुनियादी ढाँचे को आधुनिक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार वाले देशों में नहीं,बल्कि वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है। इसी वजह से देश लंबे समय से वैश्विक ऊर्जा बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता रखता है। हालाँकि,आर्थिक संकट, प्रतिबंधों,तकनीकी चुनौतियों और तेल उद्योग में निवेश की कमी के कारण उसकी उत्पादन क्षमता अपनी संभावित क्षमता से काफी नीचे रही है। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच नया समझौता यदि योजनाओं के अनुसार आगे बढ़ता है,तो इससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है।
इस समझौते का राजनीतिक संदर्भ भी बेहद महत्वपूर्ण है। अमेरिका और वेनेजुएला के संबंध पिछले कई वर्षों से तनावपूर्ण रहे हैं। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार के साथ अमेरिका के संबंधों में लंबे समय से राजनीतिक और आर्थिक मतभेद रहे हैं। अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल उद्योग समेत कई क्षेत्रों पर प्रतिबंध लगाए थे। ऐसे में अब दोनों देशों के बीच तेल क्षेत्र में सहयोग की घोषणा को संबंधों में बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
इससे पहले 3 जनवरी को अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव और बढ़ गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार,उस दिन अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की और वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर न्यूयॉर्क ले जाया गया। इसके बाद वेनेजुएला की राजनीति और तेल क्षेत्र को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा हुई।
वेनेजुएला सरकार ने इसके बाद तेल क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए। 29 जनवरी को डेल्सी रोड्रिगेज ने देश के हाइड्रोकार्बन कानून में आंशिक सुधार को मंजूरी देने की घोषणा की थी। इस बदलाव का उद्देश्य ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ाना और तेल उद्योग में निवेश के नए रास्ते खोलना बताया गया था। अब अमेरिका के साथ हुआ नया समझौता उसी व्यापक आर्थिक और ऊर्जा नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
अमेरिका के लिए वेनेजुएला का तेल भंडार इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि घरेलू बाजार में ऊर्जा की कीमतों को नियंत्रित रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। ट्रंप ने इस समझौते को अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए भविष्य में कम ईंधन कीमतों से जोड़ते हुए कहा है कि तेल की आपूर्ति में भारी वृद्धि होगी। हालाँकि,तेल की कीमतें केवल किसी एक देश के उत्पादन या भंडार पर निर्भर नहीं करतीं। वैश्विक माँग,उत्पादन,परिवहन लागत,भू-राजनीतिक तनाव और अंतर्राष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियाँ भी इसकी कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं।
फिर भी यदि वेनेजुएला में 17 प्रमुख तेल क्षेत्रों का विकास होता है और बड़े पैमाने पर निवेश आता है,तो आने वाले वर्षों में देश का तेल उत्पादन बढ़ सकता है। इससे वेनेजुएला को विदेशी मुद्रा और सरकारी राजस्व बढ़ाने में मदद मिल सकती है,जबकि अमेरिकी कंपनियों को ऊर्जा क्षेत्र में नए कारोबारी अवसर मिल सकते हैं। अमेरिका के लिए यह आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में भी एक अहम कदम हो सकता है।
समझौते के तहत प्रस्तावित 100 अरब डॉलर से अधिक के निवेश और 209 अरब डॉलर से ज्यादा संभावित कर राजस्व के आँकड़े इसे वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद बड़ा प्रस्ताव बनाते हैं। हालाँकि,इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए तेल क्षेत्रों के पुनर्विकास,बुनियादी ढाँचे के निर्माण,तकनीकी निवेश और राजनीतिक तथा कानूनी स्थिरता की आवश्यकता होगी।
कुल मिलाकर,अमेरिका और वेनेजुएला के बीच हुआ यह तेल समझौता दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है। ट्रंप इसे अमेरिकी ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन कीमतों के लिए बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहे हैं,जबकि वेनेजुएला इसे अपने तेल उद्योग में निवेश और उत्पादन बढ़ाने के अवसर के रूप में देख रहा है। आने वाले समय में इस समझौते की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रस्तावित तेल क्षेत्रों का विकास कितनी तेजी से होता है,कितना निवेश वास्तव में आता है और उत्पादन बढ़ने का असर वैश्विक तथा अमेरिकी ऊर्जा बाजार पर कितना पड़ता है।
