डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

डाक मतपत्रों पर ट्रंप प्रशासन को अदालत की रोक,चुनाव से पहले बढ़ा टकराव,जज इंदिरा तलवानी ने कहा- मामला काल्पनिक नहीं

वॉशिंगटन,5 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिका में 2026 के मध्यावधि चुनावों से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और न्यायपालिका के बीच टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। संघीय जिला जज इंदिरा तलवानी ने अमेरिकी डाक सेवा यानी यूएसपीएस को मेल-इन और डाक मतपत्रों से जुड़े ट्रंप प्रशासन के नए प्रतिबंध लागू करने से रोकने के लिए प्रारंभिक निषेधाज्ञा जारी की है। अदालत के इस आदेश से नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले डाक मतपत्रों की प्रक्रिया को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई और तेज हो गई है। प्रशासन ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और नए प्रतिबंधों को दोबारा लागू करने की अनुमति माँगी है।

यह पूरा विवाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश से जुड़ा है,जिसके जरिए डाक से भेजे जाने वाले मतपत्रों की प्रक्रिया में कई नए नियम लागू करने की कोशिश की गई थी। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत राज्यों को मेल-इन वोटिंग का इस्तेमाल करने वाले मतदाताओं की सूची पहले से जमा कराने की शर्त रखी गई थी। इसके अलावा डाक मतपत्रों पर विशेष बारकोड और एक निर्धारित डिजाइन लागू करने की बात कही गई थी। प्रशासन का तर्क था कि इन नियमों के जरिए डाक मतपत्रों की पहचान, प्रसंस्करण और सुरक्षा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित किया जा सकेगा। हालाँकि,राज्यों और चुनाव अधिकारियों की ओर से इन शर्तों को लेकर गंभीर आपत्तियाँ उठाई गईं।

विवाद का एक अहम पहलू यह है कि नए नियमों का पालन नहीं करने वाले मतपत्रों की डिलीवरी और प्रसंस्करण प्रभावित हो सकता था। इससे मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई गई। इसी आधार पर अदालत ने फिलहाल यूएसपीएस को प्रशासन के नए प्रतिबंधों को लागू करने से रोक दिया है। जज तलवानी ने कहा कि मामला अब केवल संभावित या काल्पनिक विवाद नहीं रह गया है, बल्कि नवंबर के चुनावों के लिए कई राज्यों में मतपत्र भेजने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐसे समय में नियमों में अचानक बदलाव से चुनाव प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

अदालत के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ राज्यों और स्थानीय चुनाव अधिकारियों के पास तैयारियों के लिए सीमित समय बचा है। डाक मतपत्रों की छपाई, वितरण, मतदाताओं तक पहुँच और वापस प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया पहले से तय कार्यक्रम के तहत संचालित होती है। ऐसे में यदि संघीय स्तर पर नियमों में अचानक बदलाव किया जाता है,तो राज्यों के लिए नई व्यवस्था को लागू करना कठिन हो सकता है। यही वजह है कि अदालत ने चुनाव प्रक्रिया के मौजूदा चरण को देखते हुए हस्तक्षेप किया है।

यह मामला ट्रंप प्रशासन और अमेरिकी राज्यों के बीच चुनावी अधिकारों तथा चुनाव संचालन के अधिकार क्षेत्र को लेकर चल रही व्यापक कानूनी लड़ाई का नया अध्याय माना जा रहा है। अमेरिकी चुनाव व्यवस्था में राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और चुनाव संचालन के कई पहलू राज्य स्तर पर तय किए जाते हैं। वहीं,संघीय प्रशासन राष्ट्रीय स्तर पर डाक सेवा से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। इसी अधिकार क्षेत्र को लेकर अदालतों में कई सवाल उठ रहे हैं।

ट्रंप प्रशासन ने जिला अदालत के फैसले को स्वीकार करने के बजाय इसे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। प्रशासन ने शीर्ष अदालत से निचली अदालत के आदेश को हटाने और डाक मतपत्रों से संबंधित नए प्रतिबंधों को बहाल करने की माँग की है। राज्यों को इस अपील पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए 8 सितंबर तक का समय दिया गया है। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर यह निर्भर करेगा कि नवंबर के चुनावों में इन नए नियमों को लागू किया जा सकेगा या नहीं।

इस विवाद की पृष्ठभूमि में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का 24 अगस्त का आदेश भी महत्वपूर्ण है। उस समय शीर्ष अदालत ने निचली अदालत की शुरुआती रोक में से एक को हटा दिया था और यूएसपीएस को नए नियमों को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता दिया था। हालाँकि,सुप्रीम कोर्ट ने उस समय इन नियमों की संवैधानिक वैधता पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया था। इसका अर्थ यह था कि नियमों को लेकर मूल कानूनी विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ था और आगे भी अदालतों में इसकी सुनवाई जारी रह सकती थी।

इसी बीच उत्तरी कैरोलिना में 2026 के मध्यावधि चुनावों के लिए डाक मतपत्र मतदाताओं को भेजे जाने शुरू हो चुके हैं। ऐसे में अदालतों के लगातार बदलते आदेश चुनाव अधिकारियों के लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा कर रहे हैं। अधिकारियों को यह तय करना पड़ रहा है कि मौजूदा कानूनी स्थिति के अनुसार मतपत्रों की छपाई और वितरण किस नियम के तहत किया जाए। यदि आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोई अलग आदेश आता है,तो राज्यों को एक बार फिर अपनी चुनावी तैयारियों में बदलाव करना पड़ सकता है।

मध्यावधि चुनाव अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा और सीनेट की सीटों के साथ-साथ कई राज्यों में स्थानीय और राज्य स्तरीय पदों के लिए भी मतदान होता है। ऐसे में डाक मतपत्रों से संबंधित नियमों पर जारी विवाद का असर बड़ी संख्या में मतदाताओं और चुनाव अधिकारियों पर पड़ सकता है। खासकर उन मतदाताओं के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण है,जो किसी कारण से मतदान केंद्र पर जाकर वोट देने के बजाय डाक या मेल-इन मतपत्र का इस्तेमाल करते हैं।

फिलहाल अदालत का ताजा आदेश ट्रंप प्रशासन के लिए एक और कानूनी चुनौती के रूप में सामने आया है। वहीं,अंतिम फैसला आने तक राज्यों और चुनाव अधिकारियों को बदलती न्यायिक स्थिति के बीच चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होगा। नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले यह मामला अब अमेरिकी चुनावी राजनीति के साथ-साथ संवैधानिक अधिकारों और संघीय-राज्य संबंधों की बहस का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।