अमेरिका ने 27 ईरानी एयरलाइंस पर प्रतिबंध लगाए (तस्वीर क्रेडिट@Ms_Iranian)

अमेरिका का ईरान पर बड़ा प्रहार,27 एयरलाइंस एसडीएन सूची में शामिल; विमानन नेटवर्क पर कसा शिकंजा

वॉशिंगटन,9 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच वाशिंगटन ने तेहरान पर आर्थिक और रणनीतिक दबाव बढ़ाने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरान की 27 एयरलाइंस को अपनी ‘स्पेशली डिजाइनेटेड नेशनल्स’ यानी एसडीएन सूची में शामिल कर लिया है। अमेरिका का यह कदम ईरान के विमानन क्षेत्र के खिलाफ अब तक की सबसे व्यापक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। इसके साथ ही अमेरिका ने ईरान की बची हुई वाणिज्यिक एयरलाइंस को भी प्रतिबंधों के दायरे में लाने की दिशा में कार्रवाई की है।

अमेरिकी वित्त विभाग ने मंगलवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि ईरान की वाणिज्यिक एयरलाइंस लंबे समय से ईरानी सरकार की कथित अस्थिरता पैदा करने वाली गतिविधियों को समर्थन देती रही हैं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान के विमानन क्षेत्र का इस्तेमाल केवल यात्रियों और सामान्य वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए नहीं किया जा रहा,बल्कि इसका एक हिस्सा सैन्य और रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने में भी इस्तेमाल होता है। अमेरिकी विभाग के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी कथित तौर पर निजी एयरलाइंस की मदद से हथियारों की खरीद,परिवहन और अपने कर्मियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने का काम करता रहा है।

अमेरिकी वित्त विभाग का कहना है कि नए प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान के विमानन क्षेत्र के जरिए चलाए जा रहे उन नेटवर्क को कमजोर करना है,जो कथित तौर पर सैन्य गतिविधियों और संवेदनशील तकनीक हासिल करने में मदद करते हैं। अमेरिका ने विशेष रूप से उन गुप्त फ्रंट कंपनियों, विदेशी बिचौलियों और भ्रामक ट्रांजिट मार्गों को निशाना बनाया है, जिनका इस्तेमाल ईरान अमेरिकी मूल के विमानों और संवेदनशील विमानन तकनीक तक पहुँच बनाने के लिए करता रहा है।

ईरान की विमानन कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों का इतिहास काफी पुराना है। चीन की समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार,अमेरिका ने पहली बार अक्टूबर 2011 में ईरान की प्रमुख एयरलाइन महान एयर पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद अमेरिका लगातार महान एयर और उससे जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई करता रहा है। 30 जुलाई को भी अमेरिका ने उन कई कंपनियों को निशाना बनाया था,जिन्हें महान एयर के जनरल सेल्स एजेंट के रूप में काम करने वाला माना गया था। अब ताजा कार्रवाई के जरिए अमेरिका ने प्रतिबंधों का दायरा और व्यापक कर दिया है।

अमेरिकी वित्त विभाग के तहत काम करने वाले ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल यानी ओएफएसी ने तुर्किये, मलेशिया और कजाकिस्तान की चार कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी आरोप के मुताबिक,ये कंपनियाँ महान एयर को कार्गो सेवाएँ और बिक्री से जुड़ी सहायता उपलब्ध करा रही थीं। अमेरिका का कहना है कि इन कंपनियों के जरिए ईरानी विमानन क्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जरूरी सेवाएँ और संसाधन हासिल करने में मदद मिल रही थी।

ताजा कार्रवाई में अमेरिका ने विमानन क्षेत्र से जुड़े कुछ विशेष प्रावधानों को भी सख्त किया है। ओएफएसी ने उन अनुमतियों को निलंबित कर दिया है, जिनके तहत विमानों को ईरान के ऊपर से उड़ान भरने की अनुमति दी गई थी। इसके अलावा गैर-अमेरिकी एयरलाइंस को अमेरिकी मूल या अमेरिकी नियंत्रण वाले वाणिज्यिक विमानों को ईरान ले जाने की अनुमति से जुड़े प्रावधानों पर भी रोक लगाई गई है। इससे ईरान के लिए अंतर्राष्ट्रीय विमानन नेटवर्क और विमानों की उपलब्धता पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना है।

अमेरिका की चिंता केवल एयरलाइंस तक सीमित नहीं है। वित्त विभाग के तहत काम करने वाले फाइनेंशियल क्राइम्स एनफोर्समेंट नेटवर्क ने वित्तीय संस्थानों से ईरान के विमानन उद्योग को समर्थन देने वाले खरीद नेटवर्क से संबंधित गतिविधियों की जानकारी देने की अपील की है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि वित्तीय लेन-देन की निगरानी बढ़ाकर उन नेटवर्क की पहचान की जा सकती है,जिनके जरिए ईरान विमान, विमान के पुर्जे,तकनीकी उपकरण और अन्य संवेदनशील सामान हासिल करने की कोशिश करता है।

अमेरिकी वित्त विभाग ने अपने बयान में महान एयर से जुड़े विमानों का भी उल्लेख किया है। विभाग के अनुसार, महान एयर को 2026 की गर्मियों में कम से कम तीन बी-777 विमान मिले थे। अमेरिका का दावा है कि इन विमानों को संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के रास्ते ईरान भेजा गया था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह के ट्रांजिट मार्गों का इस्तेमाल प्रतिबंधों से बचने और ईरान तक विमानन संसाधन पहुँचाने के लिए किया जा सकता है। इसी तरह के कथित नेटवर्क को रोकना अमेरिकी कार्रवाई का एक प्रमुख उद्देश्य बताया जा रहा है।

एसडीएन सूची में शामिल किए जाने के बाद संबंधित संस्थाओं की अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय गतिविधियों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत आने वाली संस्थाओं के साथ अमेरिकी व्यक्तियों और कंपनियों के लेन-देन पर व्यापक प्रतिबंध लागू होते हैं। इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान और कारोबार भी अमेरिकी प्रतिबंधों के जोखिम को देखते हुए ऐसी कंपनियों के साथ व्यापार करने से बच सकते हैं। इससे ईरानी एयरलाइंस के लिए विमान खरीदना, पुर्जे हासिल करना, बीमा और वित्तीय सेवाएँ प्राप्त करना तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर परिचालन बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

ईरान के लिए यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है,जब अमेरिका और तेहरान के बीच सैन्य तनाव पहले ही काफी बढ़ चुका है। दोनों देशों के बीच हाल के दिनों में मिसाइल,ड्रोन और समुद्री गतिविधियों को लेकर टकराव की खबरें सामने आती रही हैं। अमेरिका लगातार ईरान की सैन्य और आर्थिक क्षमता पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। वहीं ईरान का कहना है कि वह किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने के बजाय अपने हितों और संप्रभुता की रक्षा करेगा।

इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने मंगलवार को एक बार फिर अमेरिका और उसके सहयोगियों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ईरान पूरी ताकत के साथ अपना प्रतिरोध जारी रखेगा और तब तक पीछे नहीं हटेगा,जब तक ‘आक्रमण करने वालों’ को अपने कदमों पर पूरी तरह पछतावा न हो जाए। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान हमेशा युद्ध के खिलाफ रहा है। उनका कहना था कि लोगों के हितों की रक्षा और पश्चिम एशिया की सुरक्षा सुनिश्चित करने का सबसे अच्छा रास्ता युद्ध भड़काने से बचना है।

मसूद पेजेश्कियन ने हालाँकि यह भी कहा कि युद्ध से बचने की नीति का मतलब यह नहीं है कि ईरान अपने खिलाफ किसी कार्रवाई का जवाब नहीं देगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह ईरान ने अब तक साहस के साथ हर आक्रमण का मुकाबला किया है, उसी तरह वह आगे भी पूरी ताकत के साथ अपना प्रतिरोध जारी रखेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान तब तक पीछे नहीं हटेगा,जब तक आक्रमण करने वालों को अपने किए पर पूरी तरह पछतावा नहीं हो जाता। उन्होंने यह भी कहा कि उनका देश अपने लोगों के अधिकारों की रक्षा करता रहेगा।

अमेरिका की ओर से ईरान की 27 एयरलाइंस को एसडीएन सूची में शामिल करने से दोनों देशों के बीच आर्थिक टकराव और गहरा सकता है। ईरान पहले से ही वर्षों से अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण विमानन क्षेत्र में कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। पश्चिमी देशों की तकनीक और विमानन उपकरणों तक सीमित पहुँच के कारण ईरानी एयरलाइंस को पुराने विमानों के रखरखाव और संचालन में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता रहा है।

नई कार्रवाई से ईरान के नागरिक विमानन क्षेत्र पर दबाव और बढ़ने की आशंका है। इसका असर केवल सैन्य या रणनीतिक गतिविधियों पर ही नहीं,बल्कि वाणिज्यिक उड़ानों,विमान रखरखाव,कार्गो सेवाओं और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियों पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर,अमेरिका का कहना है कि उसका लक्ष्य ईरान के आम नागरिकों को निशाना बनाना नहीं,बल्कि उन संस्थाओं और नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना है,जिनके जरिए ईरानी सरकार और आईआरजीसी को आर्थिक तथा सैन्य सहायता मिलने का आरोप है।

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों और वित्तीय निगरानी के जरिए ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान अपने प्रतिरोध को जारी रखने की बात कह रहा है। ऐसे में विमानन क्षेत्र पर लगाए गए नए प्रतिबंध आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच चल रहे व्यापक आर्थिक और सैन्य संघर्ष का एक और महत्वपूर्ण मोर्चा बन सकते हैं। अब नजर इस बात पर होगी कि ईरान इन प्रतिबंधों का किस तरह जवाब देता है और क्या दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोई नई कोशिश शुरू होती है।