प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में पीएम मोदी का बड़ा संदेश, डिजिटल भुगतान से आगे बढ़कर क्रेडिट-बीमा और निवेश पर जोर

मुंबई,9 सितंबर (युआईटीवी)- मुंबई में मंगलवार को सातवें ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। 8 से 11 सितंबर तक आयोजित होने वाले इस वैश्विक आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर समेत वित्तीय और प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के तेजी से विकसित हो रहे फिनटेक क्षेत्र और डिजिटल भुगतान व्यवस्था की उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में दुनिया के सामने एक मजबूत उदाहरण पेश किया है, लेकिन अब देश को केवल भुगतान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। फिनटेक क्षेत्र को अगले चरण में ले जाते हुए क्रेडिट, बीमा, बचत, निवेश और पेंशन जैसे क्षेत्रों में डिजिटल वित्तीय सेवाओं का विस्तार करना जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे देश के तकनीकी सामर्थ्य और वित्तीय समावेशन की क्षमता को दर्शाती हैं। यूपीआई ने देश में भुगतान के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी तक डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल कर रहे हैं और इससे वित्तीय सेवाओं की पहुँच उन लोगों तक भी बनी है,जो लंबे समय तक पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था से दूर रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब भारत को इस सफलता को अगले स्तर तक ले जाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि फिनटेक का भविष्य केवल पैसे के लेनदेन को आसान बनाने में नहीं है। आने वाले समय में डिजिटल तकनीक के जरिए लोगों को आसान और सस्ती ऋण सुविधाएँ, बीमा, बचत के विकल्प, निवेश सेवाएँ और पेंशन से जुड़ी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इससे वित्तीय समावेशन को और व्यापक बनाने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री के अनुसार, अगर फिनटेक कंपनियाँ इन क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देती हैं तो देश के करोड़ों लोगों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से और मजबूती से जोड़ा जा सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर भारतीय भुगतान प्रणालियों के विस्तार पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल घरेलू स्तर पर डिजिटल वित्तीय समावेशन बढ़ाना नहीं होना चाहिए, बल्कि भारतीय भुगतान प्रणालियों को दुनिया के दूसरे देशों की प्रणालियों से जोड़ना भी जरूरी है। यूपीआई आज कई देशों तक पहुँच चुका है,लेकिन यह केवल शुरुआत है। अब भारत को अलग-अलग देशों की भुगतान प्रणालियों के साथ इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास करने चाहिए।

प्रधानमंत्री ने भारत और सिंगापुर के बीच डिजिटल भुगतान प्रणाली के एकीकरण का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच भुगतान व्यवस्था का जुड़ाव इस स्तर तक पहुँच चुका है कि सीमा के दोनों ओर लेनदेन करना काफी आसान हो गया है। उन्होंने कहा कि इसे केवल तकनीकी उपलब्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह भविष्य की वैश्विक वित्तीय व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन देशों में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं, जिनके साथ भारत के मजबूत व्यापारिक संबंध हैं और जो देश भारत के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं, वहाँ यूपीआई आधारित भुगतान ढांचे का विस्तार किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने डिजिटल भुगतान की बढ़ती स्वीकार्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल अगस्त महीने में यूपीआई के माध्यम से 24 अरब से अधिक लेनदेन हुए हैं। उन्होंने इस आँकड़े की तुलना कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान होने वाले लेनदेन से भी की। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस समय वह करीब 10 मिनट तक लोगों से बातचीत कर रहे होंगे,उस दौरान औसतन 50 लाख से अधिक यूपीआई लेनदेन हो चुके होंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल एक आँकड़ा नहीं है,बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि डिजिटल भुगतान भारतीय अर्थव्यवस्था और आम लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रौद्योगिकी समावेशन का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है और भारत के यूपीआई ने इसे व्यवहार में साबित किया है। उन्होंने कहा कि फिनटेक की सबसे बड़ी सफलता यह रही है कि उसने बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं को ऐसे लोगों तक पहुँचाने में मदद की, जहाँ पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था की पहुँच सीमित थी। मोबाइल फोन और इंटरनेट आधारित सेवाओं ने वित्तीय लेनदेन को आसान बनाया और छोटे कारोबारियों तथा आम नागरिकों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हालाँकि, प्रधानमंत्री ने फिनटेक उद्योग की मौजूदा दिशा को लेकर एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि वर्तमान में फिनटेक बाजार का बड़ा हिस्सा भुगतान सेवाओं पर केंद्रित है। भुगतान में भारत ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, लेकिन अब उद्योग को इससे आगे बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि फिनटेक कंपनियों को क्रेडिट, बीमा, बचत, निवेश और पेंशन जैसे क्षेत्रों में नए समाधान विकसित करने चाहिए। इससे न केवल लोगों को वित्तीय सेवाएँ मिलेंगी, बल्कि अर्थव्यवस्था में पूँजी निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री के मुताबिक,अगर डिजिटल तकनीक के जरिए वित्तीय सेवाओं को अधिक सरल, सुलभ और पारदर्शी बनाया जाता है तो बड़ी आबादी को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में शामिल किया जा सकता है। विशेष रूप से छोटे कारोबारियों, स्वरोजगार से जुड़े लोगों और उन नागरिकों के लिए डिजिटल वित्तीय सेवाएँ महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं, जिन्हें पारंपरिक संस्थानों से ऋण या अन्य वित्तीय सुविधाएँ हासिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय कई तरह की चुनौतियों से गुजर रही है। विभिन्न क्षेत्रों में संघर्ष, आर्थिक अनिश्चितता, आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी परेशानियाँ और ऊर्जा तथा वस्तुओं की आपूर्ति पर दबाव वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार भी विभिन्न भू-राजनीतिक तनावों के कारण चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे माहौल में आर्थिक विकास को बनाए रखना कई देशों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की विकास दर दर्ज कर रही है। उन्होंने इसे भारत की आर्थिक मजबूती और देश की सामूहिक क्षमता का संकेत बताया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत की आर्थिक मजबूती दुनिया को एक सकारात्मक संदेश दे रही है और इससे निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि मजबूत अर्थव्यवस्था, बढ़ती डिजिटल पहुँच और तकनीकी नवाचार भारत को वैश्विक वित्तीय और तकनीकी क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का पहला चौथाई हिस्सा अब समाप्त हो चुका है और दुनिया नई तकनीकी क्रांति के दौर में प्रवेश कर रही है। उन्होंने एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टोकनाइजेशन, क्वांटम तकनीक और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये तकनीकें वित्तीय क्षेत्र में अभूतपूर्व संभावनाएँ पैदा कर रही हैं। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में इन तकनीकों का इस्तेमाल बैंकिंग, भुगतान, निवेश, बीमा और वित्तीय जोखिम प्रबंधन समेत कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ेगा।

एजेंटिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए वित्तीय सेवाओं में स्वचालन और व्यक्तिगत सेवाओं के नए मॉडल विकसित हो सकते हैं। वहीं टोकनाइजेशन जैसी तकनीक परिसंपत्तियों और वित्तीय लेनदेन के प्रबंधन के तरीके में बदलाव ला सकती है। क्वांटम तकनीक भी भविष्य में डेटा सुरक्षा और जटिल वित्तीय गणनाओं के क्षेत्र में नई संभावनाएँ खोल सकती है। प्रधानमंत्री ने उद्योग जगत से इन तकनीकी अवसरों को केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रखने, बल्कि वास्तविक आर्थिक प्रभाव में बदलने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भारत का फिनटेक क्षेत्र आने वाले समय में वैश्विक नवाचार का केंद्र बन सकता है। इसके लिए सरकार, नियामक संस्थाओं, वित्तीय कंपनियों, तकनीकी क्षेत्र और स्टार्टअप कंपनियों को मिलकर काम करना होगा। प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत के पास विशाल डिजिटल बुनियादी ढाँचा, बड़ी युवा आबादी, तेजी से बढ़ता इंटरनेट उपयोग और डिजिटल सेवाओं को अपनाने वाला विशाल बाजार है। इन सभी क्षमताओं का इस्तेमाल भारत को वैश्विक फिनटेक नवाचार में अग्रणी बनाने के लिए किया जा सकता है।

हालाँकि,प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल वित्तीय व्यवस्था का विस्तार केवल तकनीक और सुविधा तक सीमित नहीं होना चाहिए। साइबर सुरक्षा को विश्वस्तरीय बनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे डिजिटल लेनदेन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे साइबर हमलों और डिजिटल धोखाधड़ी का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए भारत को अपने डिजिटल वित्तीय ढाँचे की सुरक्षा के लिए लगातार नए और मजबूत उपाय विकसित करने होंगे।

प्रधानमंत्री ने फिनटेक उद्योग से अपने स्तर पर मजबूत और पारदर्शी डेटा सुरक्षा मानक विकसित करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल वित्तीय सेवाओं में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए उनके डेटा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उपभोक्ताओं को यह विश्वास होना चाहिए कि उनकी वित्तीय और व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित है तथा उसका इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है।

उन्होंने एक मजबूत फिनटेक-नियामक-उद्योग नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री के अनुसार, वित्तीय क्षेत्र में नवाचार और उपभोक्ता सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। अत्यधिक कठोर नियम नवाचार को प्रभावित कर सकते हैं,जबकि कमजोर निगरानी से उपभोक्ताओं के हितों को नुकसान पहुँचने का खतरा रहता है। इसलिए ऐसा नियामक ढाँचा जरूरी है,जो नई तकनीक और कारोबारी मॉडल को अवसर दे,लेकिन साथ ही वित्तीय स्थिरता और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करे।

प्रधानमंत्री ने इसी संदर्भ में एक फिनटेक उपभोक्ता संरक्षण सूचकांक विकसित करने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि इस तरह के सूचकांक के जरिए अलग-अलग फिनटेक कंपनियों का पारदर्शी तरीके से मूल्यांकन किया जा सकता है। इससे उपभोक्ताओं को विभिन्न सेवाओं और कंपनियों के बीच बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी। साथ ही कंपनियों के बीच भरोसेमंद और उपभोक्ता-केंद्रित सेवाएँ देने की प्रतिस्पर्धा भी बढ़ सकती है।

ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में प्रधानमंत्री का संबोधन ऐसे समय हुआ है,जब भारत का डिजिटल वित्तीय ढाँचा दुनिया में तेजी से पहचान बना रहा है। यूपीआई की व्यापक स्वीकार्यता ने भारत के लिए वैश्विक स्तर पर एक मजबूत डिजिटल भुगतान मॉडल पेश किया है। अब सरकार और उद्योग का अगला लक्ष्य इस सफलता को व्यापक वित्तीय सेवाओं तक पहुँचाना है। क्रेडिट से लेकर बीमा और निवेश तक डिजिटल सेवाओं के विस्तार से वित्तीय समावेशन को नई गति मिल सकती है।

चार दिवसीय ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में वित्तीय तकनीक से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इस दौरान डिजिटल भुगतान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वित्तीय समावेशन, साइबर सुरक्षा, डिजिटल परिसंपत्तियों, नवाचार और वैश्विक वित्तीय सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आ सकते हैं। भारत के लिए यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे और फिनटेक समाधानों को वैश्विक बाजार तक पहुँचाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का मुख्य संदेश यही रहा कि भारत ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एक मजबूत आधार तैयार कर लिया है,लेकिन अब फिनटेक की असली अगली छलांग व्यापक वित्तीय सेवाओं में होनी चाहिए। क्रेडिट, बीमा, बचत, निवेश और पेंशन को तकनीक से जोड़कर देश में वित्तीय समावेशन को और गहरा किया जा सकता है। इसके साथ साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण और उपभोक्ता हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एक ऐसा फिनटेक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना होगा, जो भारत की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।